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30 बेड वाले मनोहरपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 47 बीमार पहुंचे, जमीन पर लिटाकर किया इलाज

एक वर्ष पहले
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आनंदपुर प्रखंड के झारबेड़ा पंचायत के तिलिंगदिरी गांव में विवाह भाेज खाने के बाद तबीयत बिगड़ने पर रविवार तक मनोहरपुर सीएचसी में कुल 47 लोगों को भर्ती कराया गया। इस घटना में शनिवार रात को इलाज के लिए सीएचसी लाने के क्रम में झारबेड़ा की सुषना किस्पोट्टा (16) की मौत हो गई। वह आनंदपुर के झारखंड आवासीय विद्यालय की छात्रा थी और हाल ही में मैट्रिक की परीक्षा में शामिल हुई थी। इस मामले पर जिला प्रशासन ने संज्ञान लेते हुए रविवार को चाईबासा से एक टीम भेजी। मनोहरपुर सीएचसी की टीम ने प्रभावित गांवों में कैंप लगाकर 150 से ज्यादा लोगों का इलाज किया। अधिकारियों ने ग्रामीणों को मांसाहार का सेवन नहीं करने, बासी खाना नहीं खाने, पानी उबालकर पीने और स्वच्छता का ध्यान रखने संबंधी निर्देश दिए। जिला सदर अस्पताल प्रभारी डॉ जगन्नाथ हेम्ब्रम, वरीय चिकित्सक डॉ संजय उरांव व फूड सेफ्टी पदाधिकारी संगीत घोष ने मनोहरपुर का दौरा किया और हालात का जायजा लिया।

ग्रामीणों ने बताया- तिलिंगदीरी गांव में शुक्रवार रात बुधनी कच्छप की शादी बुनुमदा निवासी किशोर तिर्की से हुई। इनकी शादी में 300 से ज्यादा लोगों ने खाना खाया। खाने में दाल, चावल, सब्जी के अलावा सूअर और चिकन भी बनाया गया था। खाना खाने के बाद देर रात तिलिंगदिरी, झारबेड़ा, बुनुमदा, बीजा टोली के कई लोग अपने घर लौट गए। लेकिन शनिवार सुबह से ही कई लोगों को पेट दर्द, उल्टी और दस्त की शिकायत होने लगी। सबसे पहले उल्टी-दस्त और पेट दर्द की समस्या दुल्हन की मौसेरी बहन को हुई। देखते-देखते कई लोगों को इस तरह की समस्या होने लगी तो ग्रामीणों ने इसे भूत-प्रेत का प्रकोप समझ झाड़फूंक से इलाज करने का प्रयास किया। हालात नहीं संभले तो ग्रामीणों ने शाम को झारबेड़ा पंचायत के मुखिया दिलबर खाखा को सूचना दी।

मनोहरपुर सीएचसी में इनका चल रहा इलाज

तिलिंगदिरी : बसंती कच्छप (4), राजेश्वरी कच्छप (35), एरेन तिग्गा (40), सोनामनी तिग्गा (7), फूलमनी तिग्गा (60), सुबंति तिग्गा (25), रंदाय कच्छप (55), विनीता कच्छप (20), सोमरा कच्छप (19), जुलमनि कच्छप (40), लेदरू कच्छप (60), सुखदेव तिग्गा (20), सुमित्रा तिग्गा (30), बंधनी कच्छप ( 25), बुधनी कच्छप (45), सुमी मिंज (45), सुकरु कच्छप (27), झालो कच्छप (18), रंदाय कच्छप (16), सीता कच्छप (30), अभिषेक कच्छप (1), सीमा कच्छप (9), सुकरो कच्छप (70), शिवानी कच्छप (26), शुभानी कच्छप (17), पुनिया कच्छप (22), असरिता कच्छप (25), सजनु कच्छप (2 माह), सरिता कच्छप (2), जामिया कच्छप (60), सुकुरमुनी कच्छप (55)। झारबेड़ा : अमृत खाखा (18), सुधीर खाखा (24), सुचिता खाखा (12), मतिलदा खाखा (35), बिलचन खाखा (60), असरिता खाखा (22 ), स्वाति खाखा (20), ओलिव किस्पोट्टा (16), रोशन एक्का (25), मेरी एग्नेस किस्पोट्टा (24), अखता किस्पोट्टा (12), बीजाटोली : सुषमा तिर्की (40), बंधु तिर्की (50), सदबमड़ी : शाहिद नोनहार (4), खुदपोस : निदिया मिंज (25), रावांगदा : रानी टोपनो (30)।

रातभर सीएचसी आते रहे मरीज

शनिवार रातभर बीमार लोगों को 4 एंबुलेंस के साथ-साथ किराए के वाहनों से मनोहरपुर सीएचसी लाने का क्रम जारी रहा। 30 बेड वाले सीएचसी में मरीजों के लिए बेड कम पड़ गए। लिहाजा कई मरीजों का जमीन पर लिटाकर इलाज करना पड़ा। रविवार को सुबह टेंट हाउस से गद्दे मंगवाए गए और कुछ अतिरिक्त बेड की व्यवस्था की गई। तभी जाकर मरीजों को थोड़ी सहूलियत हुई।

हमर छउवा के पुलिस मन के नी देब

इधर रविवार को पोस्टमार्टम के लिए आनंदपुर पुलिस छात्रा सुषना का शव लेने उसके घर पहुंची तो परिजनों और गांव की महिलाओं ने विरोध किया। रोते-बिलखते क्षेत्रीय भाषा में कहा- हमर छउवा के पुलिस के नी देब...। इस दौरान पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी। मुखिया दिलबर खाखा के समझाने के बाद शव को एंबुलेंस से भेजा।

ये रहे असली हीरो

दिलबर खाखा
(मुखिया, झारबेड़ा पंचायत)

दिलबर खाखा शनिवार को राउरकेला गए थे। शाम 6 बजे गांव लौटने पर मामले की जानकारी मिली। इसके बाद वे मनोहरपुर सीएचसी से एंबुलेंस लेकर प्रभावित गांवों की ओर निकले। गांव के चौक-चौराहों पर भीड़ मौजूद थी, लेकिन कोई बोलने की स्थिति में नजर नहीं आए। मरीज सड़कों पर कराह रहे थे। मुखिया ने ग्रामीणों के साथ मिलकर बीमार लोगों को एंबुलेंस में चढ़ाया और सीएचसी ले गए। मरीजों को गांवों से अस्पताल लाने का सिलसिला कई बार चला। एंबुलेंस कम पड़ता देख मुखिया ने किराए पर 4 वाहन लेकर मरीजों को अस्पताल पहुंचाया। रविवार को भी दिनभर प्रभावित गांवों में लोगों को जागरूक करते रहे।

सबसे पहले दुल्हन की मौसेरी बहन की तबीयत बिगड़ी, लोगों ने झाडफूंक कराया, शाम तक बीमारों की संख्या बढ़ी तो अस्पताल पहुंचे

प्रथमदृष्टया प्रभावित गांवों में बीमारी की मुख्य वजह फूड प्वाइजनिंग लग रही है। मांसाहार इसके लिए प्रमुख वजह हो सकती है। फूड सेफ्टी अधिकारी संगीत घोष ने गांव से परीक्षण के लिए खाने के सैंपल को इकट्ठा किया है। विस्तृत जांच रिपोर्ट सिविल सर्जन व जिला प्रशासन को सौंपी जाएगी। -डॉ जगन्नाथ हेंब्रम, जिला नोडल अधिकारी, पश्चिमी सिंहभूम

खुद बीमार पड़ी एएनएम : कुर्थाबेड़ा उप स्वास्थ्य केंद्र की एएनएम मेरी एग्नेस किस्पोट्टा भी शादी का खाना खाकर बीमार हो गईं। इस कारण वह अपनी चचेरी बहन सुषना किस्पोट्टा की जिंदगी बचा न सकी।

दूसरे दिन प्रभावित गांवों में 150 से अधिक लोगों का किया गया इलाज

शनिवार देर रात मैट्रिक की छात्रा की मौत, अभी मनोहरपुर सीएचसी में 47 लोगों का चल रहा इलाज

बेड के अभाव में जमीन पर मरीज को लिटाया।

मनोहरपुर सीएचसी में इलाजरत मरीज।

तिलिंगदिरी गांव में ग्रामीणों से बात करते अधिकारी

डॉ कन्हैयालाल उरांव
(चिकित्सक, मनोहरपुर सीएचसी)

मनोहरपुर सीएचसी के डॉ कन्हैयालाल उरांव की शनिवार को ओपीडी में ड्यूटी थी। दिन भर उन्होंने ओपीडी में मरीजों को देखा। फिर तिलिंगदीरी गांव से मरीजों के आने के बाद रातभर उनके इलाज में व्यस्त रहे। इस दौरान कई बार नींद ने उन पर हावी होने की कोशिश की, परंतु मरीजों की जिंदगी को बचाने की चुनौती को सहयोगियों के साथ सफलतापूर्वक पार किया। रविवार को ड्यूटी पर चिकित्सक के आने तक वे सभी मरीजों पर नजर बनाए रहे। इसके अलावा रोजगार सेवक संतोष तिग्गा, अस्पताल प्रबंधक स्वप्नजीत मोहंती, लेखा सहायक यशवंत कुमार, एमपीडब्ल्यू ओम प्रकाश पांडेय की उल्लेखनीय भूमिका रही।
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