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अल्टीमेटम की तय अवधि खत्म, फिर भी नप के हवाले नहीं हुई शहरी जलापूर्ति

पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की करीब 60 साल पुरानी शहरी जलापूर्ति योजना को नप के हवाले करने की पहल पर पानी फिर गया है।...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 01, 2018, 02:15 AM IST

अल्टीमेटम की तय अवधि खत्म, फिर भी नप के हवाले नहीं हुई शहरी जलापूर्ति
पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की करीब 60 साल पुरानी शहरी जलापूर्ति योजना को नप के हवाले करने की पहल पर पानी फिर गया है। पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने नप को 25 मार्च तक इस योजना को टेक ओवर लेने को कहा था। वहीं विभागीय सचिव ने भी विभाग के कार्यपालक अभियंता को इस योजना को नप के हवाले करने का निर्देश दिया था।

साथ ही यह भी कहा गया था कि विभाग अब इस योजना मद में राशि उपलब्ध नहीं कराएगा। विभागीय सचिव के आलोक में पेयजल एवं स्वच्छता विभाग पिछले दो साल से नप से इस योजना को टेक ओवर करने का आग्रह करता आ रहा है, लेकिन नगर परिषद ने पिछले साल की तरह इस बार भी तकनीकी परेशानियों का हवाला देकर इस योजना को टेक ओवर करने से हाथ खड़ा कर दिया है।

शहर की जलापूर्ति व्यवस्था पर पड़ सकता है असर

संवेदक को मिलेगा तीन माह का एक्सटेंशन - नप द्वारा शहरी जलापूर्ति योजना को टेक ओवर नहीं किए जाने से पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने पुराने संवेदक को ही अवधि विस्तार देने का फैसला लिया है। हालांकि सरकार की ओर से अभी इसकी अनुमति नहीं मिली है, लेकिन विभाग के अधीक्षण अभियंता ने सरकार से पुराने संवेदक को ही नियमानुसार तीन माह का अवधि विस्तार देने का अनुरोध किया है।

विभाग के पास फंड नहीं

निविदा की अवधि शनिवार को खत्म होने के बाद यदि अगले दिन संवेदक को अवधि विस्तार की अनुमति नहीं मिलती है तो शहर में जलापूर्ति बाधित हो सकती है। इससे शहर के 50 हजार लोगों को पेयजल की गंभीर समस्या से जूझना होगा। विभाग के पास न जल शोधन के लिए केमिकल खरीदने का फंड है और ना ही लीकेज व अन्य रखरखाव के लिए पैसे हैं। ऐसे में विभाग को इस योजना के संचालन में परेशानी होगी।

नप वसूलता है वाटर टैक्स - विभाग का मानना है कि शहरी जलापूर्ति योजना का टैक्स नगर परिषद द्वारा वसूला जाता है। शादी समारोह या किसी भी अनुष्ठान के अवसर पर नगर परिषद द्वारा पेयजल उपलब्ध कराया जाता है। वहीं घरों में कनेक्शन देने व टैक्स वसूलने का अधिकार भी नगर परिषद के पास ही है, जबकि पेयजल एवं स्वच्छता विभाग अपने खर्च से शहर के घरों तक पानी पहुंचाता है।

आगे क्या

पेयजल एवं स्वच्छता विभाग इस योजना को नगर परिषद के हवाले करने के लिए दुबारा प्रयास करेगा। इसके लिए नप से फिर से पत्राचार किया जाएगा। साथ ही विभाग के सभी अभियंता नप कार्यालय पहुंचकर कार्यपालक पदाधिकारी से योजना को टेक ओवर लेने का अनुरोध भी करेंगे। इसके बाद भी जब बात नहीं बनेगी, तो इसकी जानकारी विभाग के आला अधिकारियों को दी जाएगी। इसके बाद सरकार के स्तर से इस मामले में फैसला लिया जाएगा।

नप से जलापूर्ति व्यवस्था को टेक ओवर लेने का आग्रह किया गया था। कहा गया था कि 31 मार्च के बाद नप ही इस योजना का संचालन करे, लेकिन तकनीकी दिक्कत का हवाला देते हुए नप ने इस योजना को टेक ओवर लेने से इनकार कर दिया है। अब दुबारा पत्राचार किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर विभाग के सभी अभियंता नप कार्यालय जाकर कार्यपालक पदाधिकारी को इस योजना को हैंड ओवर लेने को कहेंगे। - प्रभू दयाल मंडल, कार्यपालक अभियंता

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