घाघरी उप स्वास्थ्य केंद्र में जान जोखिम में डाल ड्यूटी कर रहे एएनएम-एमपीडब्ल्यू

Chaibasa News - घाघरी उप-स्वास्थ्य केंद्र के कर्मचारी अपनी जान को जोखिम में डालकर ड्यूटी कर रहे हैं। उप-स्वास्थ्य केंद्र कभी भी...

Dec 04, 2019, 08:25 AM IST
घाघरी उप-स्वास्थ्य केंद्र के कर्मचारी अपनी जान को जोखिम में डालकर ड्यूटी कर रहे हैं। उप-स्वास्थ्य केंद्र कभी भी धराशायी हो सकता है। बाहर से जब लोग आते हैं तब दूर से ही देखकर डर जाते हैं। उनका कहना होता है कि आप लोग कैसे ड्यूटी कर रहे हैं। लेबर रूम का छत भीतर से चटककर गिर गया है। अब भीतर के छड़ दिख रहे हैं।

ठीक इसी तरह की हालत अन्य कमरे की भी है। घाघरी का उप-स्वास्थ्य केंद्र चाईबासा जिला मुख्यालय से महज आठ किलोमीटर की दूरी पर मेन रोड पर ही अवस्थित है। अभी 15 दिनों पहले ही मेन गेट के सामने की छत का टुकड़ा गिरा था। तब कर्मचारी बगल में काम कर रहे थे, अन्यथा बड़ा हादसा हो सकता था। ऐसा भी नहीं है कि इसकी शिकायत यहां पर काम करने वाले कर्मचारी नहीं करते हैं। बराबर इसकी लिखित शिकायत वे करते हैं, लेकिन जिला स्तर से ही किसी तरह की पहल नहीं की जा रही है। जिस तरह से यहां की आबादी है उसके हिसाब से लोगों को इसका लाभ मिल सकता है। गर्भवती महिलाओं के लिए जो बेड है उसे कमरे के बजाए बाहर रखा गया है क्योंकि कमरे की छत कभी भी धराशायी हो सकती है। यहां पर विधिवत बिजली की भी सुविधा नहीं दी गयी है। यह उप-स्वास्थ्य केंद्र सिर्फ दिन में ही काम करता है। रात को अगर कोई गर्भवती महिला पहुंचती है तो बंद मिलेगा। बारिश के दिनों में तो उप-स्वास्थ्य केंद्र की छत झरने की तरह रिसता रहता है। ऐसे में कमरे के भीतर दवा रखने के लिए भी सुरक्षित जगह नहीं बचता है। कमरे में पानी भरा होता है। ऐसे में वे अपना काम ठीक तरह से नहीं कर पाते हैं। उनके लिए पल-पल काटना दूभर होता है। शिकायत कर्मचारी लिखित रूप से वरीय अधिकारियों को भी कर चुके हैं।

बारिश के दिनों में दवा रखने के लिए जगह नहीं

केंद्र की सुधि लेने नहीं आते अधिकारी, गर्भवती महिलाओं को समस्या

घाघरी का उपस्वास्थ्य केंद्र। चाईबासा पीएचसी की जर्जर लेबर रूम की छत।

दो एएनएम और एक एमपीडब्ल्यू हैं कार्यरत: उप-स्वास्थ्य केंद्र में दो एएनएम सावित्री देवगम और माधुरी कुमारी कार्यरत हैं। इसी तरह से एक एमपीडब्ल्यू मधुसूदन अपनी सेवा दे रहे हैं। सभी लोग चाईबासा में ही रहते हैं। उनका कहना है कि जर्जर छत के नीचे बैठ पाने में उन्हें डर लगता है। ड्यूटी करना मजबूरी है। इस कारण वे अपनी ड्यूटी जान जोखिम में डालकर किसी तरह से कर रहे हैं।

10000 रु मिलता है मेंटेनेंस खर्च

उप-स्वास्थ्य केंद्र को सालाना मेंटेनेंस खर्च के रूप में विभाग की ओर से मात्र 10 हजार रुपये दिए जाते हैं। यह रुपये उनके लिए नाकाफी है। जो पैसे मिलते हैं उससे आवश्यक दवाइयां खरीदना पड़ता है। मेंटेनेंस खर्च वे इस रुपये से किसी भी सूरत में नहीं करवा सकते हैं।

अशोक कुमार| चाईबासा

घाघरी उप-स्वास्थ्य केंद्र के कर्मचारी अपनी जान को जोखिम में डालकर ड्यूटी कर रहे हैं। उप-स्वास्थ्य केंद्र कभी भी धराशायी हो सकता है। बाहर से जब लोग आते हैं तब दूर से ही देखकर डर जाते हैं। उनका कहना होता है कि आप लोग कैसे ड्यूटी कर रहे हैं। लेबर रूम का छत भीतर से चटककर गिर गया है। अब भीतर के छड़ दिख रहे हैं।

ठीक इसी तरह की हालत अन्य कमरे की भी है। घाघरी का उप-स्वास्थ्य केंद्र चाईबासा जिला मुख्यालय से महज आठ किलोमीटर की दूरी पर मेन रोड पर ही अवस्थित है। अभी 15 दिनों पहले ही मेन गेट के सामने की छत का टुकड़ा गिरा था। तब कर्मचारी बगल में काम कर रहे थे, अन्यथा बड़ा हादसा हो सकता था। ऐसा भी नहीं है कि इसकी शिकायत यहां पर काम करने वाले कर्मचारी नहीं करते हैं। बराबर इसकी लिखित शिकायत वे करते हैं, लेकिन जिला स्तर से ही किसी तरह की पहल नहीं की जा रही है। जिस तरह से यहां की आबादी है उसके हिसाब से लोगों को इसका लाभ मिल सकता है। गर्भवती महिलाओं के लिए जो बेड है उसे कमरे के बजाए बाहर रखा गया है क्योंकि कमरे की छत कभी भी धराशायी हो सकती है। यहां पर विधिवत बिजली की भी सुविधा नहीं दी गयी है। यह उप-स्वास्थ्य केंद्र सिर्फ दिन में ही काम करता है। रात को अगर कोई गर्भवती महिला पहुंचती है तो बंद मिलेगा। बारिश के दिनों में तो उप-स्वास्थ्य केंद्र की छत झरने की तरह रिसता रहता है। ऐसे में कमरे के भीतर दवा रखने के लिए भी सुरक्षित जगह नहीं बचता है। कमरे में पानी भरा होता है। ऐसे में वे अपना काम ठीक तरह से नहीं कर पाते हैं। उनके लिए पल-पल काटना दूभर होता है। शिकायत कर्मचारी लिखित रूप से वरीय अधिकारियों को भी कर चुके हैं।

शौचालय बना दिया है बाहर

उप-स्वास्थ्य केंद्र में गर्भवती महिला को भर्ती किया जाता है। ऐसे में शौचालय के लिए कमरे से बाहर जाना उनके लिए उचित नहीं होता है, लेकिन शौचालय को ही बाहर बना दिया गया है। इस कारण से गर्भवती महिलाओं को भारी कठिनाइयां होती है।

ठीक कराने का हो गा काम


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