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चाईबासा : 970 करोड़ से बन रहा ईचा डैम का काम बंद करने का आदेश
देश की महत्वपूर्ण जल परियोजनाओं में से एक स्वर्ण रेखा बहुद्देशीय परियाेजना की मूल इकाई ईचा डैम का काम अगले आदेश तक बंद करने को कहा गया है। 970 करोड़ की लागत से बन रहे डैम को जल संसाधन विभाग झारखंड सरकार के संयुक्त सचिव सतेंद्र नारायण उपाध्याय ने पत्र भेजकर काम अगले अादेश तक राेकने का निर्देश दिया है। 13 मार्च की शाम काे जारी किए गये पत्र में डैम का काम राेके जाने का काेई उचित कारण नहीं बताया गया है। पत्र में साफ निर्देश है कि खरकई बांध प्रमंडल संख्या 2 ईचा चालियामा का एकारारनामा संख्या एसबीडी दाे 9 अगस्त से शुरू किया गया काम काे राेक दिया जाए।
मुखयमंत्री सहित सरायकेला खरसांवा व चाईबासा डीसी काे पत्र भेजा गया है। ईचा डैम का काम 12 मार्च की दाेपहर बाद से ठेका कंपनी दिलीप कंस्ट्रक्शन ने बंद कर दिया है। कंपनी ने सैकड़ाें गाड़ियाें व मशीनाें काे डैम साइट से वापस कुजू स्थित बेस कैंप में बुला ली गई हैं।
कंपनी अधिकारियों के अनुसार, स्वर्ण रेखा बहुद्देशीय परियाेजना के वरीय अधिकारियों के निर्देश के बाद काम राेका गया है। लगभग 970 कराेड़ रुपए में मुख्य मेढ़ सहित कुल अाठ किमी लंबी मिट्टी का मेढ़ बनेगा। बता दें कि डैम से विस्थापित हाे रहे ग्रामीणों और स्थानीय सांसद-विधायकों के विराेध के कारण काम काे राेक दिया गया है। 16 मार्च काे डैc हाेना है। जिसकी तैयारी पिछले एक महीने से चल रही है। विधि-व्यवस्था काे लेकर जिला प्रशासन भी अलर्ट है।
पं. बंगाल, अाेडिशा और झारखंड काे मिलेगा पानी, डूबेंगे 9 गांव
इस परियाेजना से पं. बंगाल, अाेडिशा और झारखंड के ग्रामीण अंचलाें के खेताें काे पानी मिलेगा। इसमें पूर्णत: ईचा डैम से कुल 9 गांव राजनगर प्रखंड के रेंगालबेड़ा, ईचा, देउरीडीह, मझगांव, बंदाेडीह, बालीडीह, सरजमडीह, महूलडीह ,काेमडीह पूरी तरह डूब जाएंगे। जबकि अन्य गांव अांशिक रूप से डूब क्षेत्र में हाेंगे। डैम के प्रभावित अंचलाें में जल प्लावन कम करने के लिये केंद्र सरकार ने डैम की ऊंचाई पहले से घटाकर अब 213 मीटर जल क्षमता कर दी है। पहले 225 मीटर थी।
मुख्य मेढ़ की लंबाई 556 मीटर : ईचा डैम के मुख्य मेढ़ और 11 गेट पर कुल 970 करोड़ रुपये खर्च हाेंगे। इसके अलावे 556 मीटर की कंक्रीट दीवाल की मेढ़ बनेगी। इसके दोनों ओर चार चार किमी लंबी मिट्टी का मेढ़ हाेगा। चूंकि पहले ही 80 फीसदी काम कैनाल अादि का हाे चुका है। मुख्य मेढ़ का काम पूरा हाेने पर स्वर्ण रेखा परियाेजना का प्रोजेक्ट पूरा हाे जायेगा।
यह है मामला : केंद्र सरकार की इस परियाेजना का विराेध अारंभ के दिनाें से हाे रहा है। 40 सालाें से ईचा डैम का विराेध हाे रहा है। विस्थापितों में से कई डूब क्षेत्र के ग्रामीणों ने पुनर्स्थापना का पैसा अादि ले चुके हैं। हाल के दिनाें में निर्माण कार्य अारंभ हुअा है। जिसके बाद स्थानीय ग्रामीणों ने विराेध शुरू कर दिया।
16 मार्च काे हाेना है ग्रामीणों का विराेध प्रदर्शन... विस्थापित गांव, सांसद, विधायक भी कर रहे विरोध
सरकार द्वारा जारी पत्र।