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डैम विराेधियाें का 16 मार्च को धरना-प्रदर्शन कैंसिलअब 15 अप्रैल तक याेजना रद्द करने की चेतावनी
{मेन डैम का मेढ़ की लंबाई : 556 मीटर
स्वर्ण रेखा परियाेजना की मूल इकाई ईचा खरकई डैम पर सरकारी राेक के बाद अब पाॅलिटिकल स्टंट तेज हाे गया है। इस डैम पर राेक की विभागीय पत्र जारी हाेने के दूसरे ही दिन चाईबासा सदर विधायक दीपक बिरूवा ने डूब क्षेत्र के ग्रामीणााें व विस्थापिताें के साथ बैठक की।
इसके बाद घाेषणा कर कहा -ईचा डैम विस्थापित संघ ने 16 मार्च को आहूत प्रर्दशन काे कैंसिल किया है। वहीं अब 15 अप्रैल तक अगर डैम याेजना काे रद्द नहीं किया जाता है ताे अांदाेलन अाैर तेज हाेगा। डैम विराेधी अब याेजना काे ही रद्द की मांग कर रहे हैं। जब तक ईचा डैम परियोजना बंद नहीं किया जाएगा, तब तक डूब क्षेत्र के ग्रामीणों का आंदोलन जारी रहने की घाेषणा की है। शनिवार को कुर्सी गांव में आयोजित बांध विस्थापित व डूब क्षेत्र के ग्रामीणों की सभा में विधायक भी रहे। सभा में विधायक दीपक बिरूअा अाैर झारखंड सरकार के पक्ष में जाेरदार नारेबाजी की गयी। इधर, भाजपा के पूर्व प्रदेश अधयक्ष सह पूर्व सांसद लक्षमण गिलुवा ने प्रेस कांफ्रेंस कर मांग कर दिया है कि हेंमत सरकार ने झूठ बाेलकर वाेट लिया।
अब इस याेजना काे स्थगित नहीं रद्द कराये। बहरहाल, पूरे मामले में राजनीति तेज हाे गयी है। इधर, 970 कराेड़ की ईचा खरकई डैम की मुखय मेढ़ का काम राेक दिये जाने से 41 साल पुरानी देश की प्रमुख स्वर्ण रेखा नदी घाटी परियाेजना काे भी झटका लगा है।
ग्रामीणाें से विधायक बोले : रद्द होने तक जारी रहेगा आंदोलन
कुर्सी गांव में अायाेजित सभा में विधायक दीपक बिरुवा ने साफ कहा कि डैम का काम फिलहाल बंद किया गया है। परियोजना रद्द होने तक लड़ाई लड़ी जाएगी। विधायक ने कहा कि 15 अप्रैल के बाद आंदोलन और तेज किया जाएगा, ताकि केंद्र सरकार इस विनाशकारी परियोजना को पूरी तरह रद्द किया जा सके। कहा कि चूंकि ये भारत सरकार की याेजना है, लेकिन विस्थापित झारखंड के लाेग हाे रहे हैं। एेसे में टीएसी व सुप्रीम काेर्ट भी इस मामले में संवैधानिक वैद्यता काे देखेगी। इस लिये समय दिया जा रहा है। इस माैके पर विधायक ने ये भी कहा कि सीएम हेंमत साेरेन याेजना स्थल पर पहुंचकर ग्रामीणाें से मिलेंगे। इस सभा में झामुमो के केंद्रीय सदस्य सुभाष बनर्जी के अलावा दशकन कुदादा, मुंडा गंगाराम हेंब्रम, मुंडा हरीश सवैंया, मुंडा सुरेंद्र पाड़िया, मुंडा रायसिंह सामड, छोटा पूर्ति, जीवन पाड़िया, पलटन, गुलिया कुदादा, सुरेंद्र बिरुली, डोबरो तियू आदि ने भी संबोधित किया।
भाजपा का वाॅर : धाेखा देकर वाेट बटाेर लिया
इधर, ईचा डैम पर काम राेके जाने की सरकारी अादेश अाने के बाद भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सह सांसद लक्ष्मण गिलुवा ने इस पूरे मामले पर मुख्यमंत्री हेमंत साेरेन व झामुमाे काे घेरे में लिया है। कहा कि पब्लिक काे धाेखा अाैर फालतू का झूठ बाेलकर वाेट लिया है। अब एेसे में ईचा डैम का काम स्थगित नहीं कर रद्द करना चाहिये। स्थानीय लाेगाें की विराेध के साथ मैं भी हूं। मैंने इस प्राेजेक्ट पर जनविराेध काे देखते हुये माैखिक विराेध किया था। लेकिन झामुमाे ने वाेट लेने के लिये तरह तरह के झूठे वादे किये हैं। गिलुवा ने कहा कि साल 2013-14 में हेमंत सरकार बनी थी। उसी समय पर इस डैम का काम शुरु हुअा था। रद्द करने की ताकत नहीं थी ताे झूठा वादा नहीं करना चाहिये था।
2. दाे हजार कराेड़ रु. की याेजना हाेगी बेकार
1980 में ईचा डैम को सुवर्णरेखा बहुद्देश्यीय परियोजना में शामिल किया गया था। अब पूरा परियाेजना करीब 33 सौ करोड़ की हो चुकी है। इससे 2900 करोड़ डैम निर्माण पर व 386 करोड़ रुपए जमीन अधिग्रहण व मुआवजे पर खर्च होने हैं। 2 हजार कराेड़ खर्च हाे चुका है। बंगाल-अाेड़िसा तक कैनाल भी बन गये हैं। सिर्फ ईचा डैम का मुखय मेढ़ बनना बाकी है। ये 213 फीट ऊंचाई तक बनेगा। याेजना बंद हुयी ताे सरकार की कराेड़ रुपये डूबेंगे।
1. दाे राज्य देंगे दबाव, विश्व बैंक की उधारी
देश की अाजादी के बाद ही स्वर्ण रेखा नदी घाटी परियाेजना की शुरुअात हुई। जिसका उद्देशय झारखंड के अलावे प.बंगाल अाैर अाेड़िसा के गांवाें में माैजूद 3 लाख 31 हजार हेक्टयर जमीन काे बारहमासी सिंचाई का पानी देना है। हाईड्राेइलेक्टि्क पावर उत्पादन हाेना था। इसके लिये अब तब तीनाें राज्याें काे इस प्राेजेक्ट पर विशव बैंक से लगभग 5 हजार कराेड़ की ऋण हाे चुका है। भविष्य में विश्व बैंक अन्य याेजनाअाें पर ऋण नहीं देगा।
डैम बनने के डर से लोग मकानों की मरम्मत भी नहीं करा रहे
प्रभावित गांवों में सालाें से डर
नहीं बनाए जा
रहे पक्के मकान
3. डूब जाएंगे नाै गांव, बाकी पर अांशिक असर
इस परियाेजना के तहत झारखंड के कुल 87 गांवों की जमीन अधिग्रहित हुई है। वहीं ओडिशा के 36 गांव की। इनमें अबतक झारखंड के 44 व ओड़िशा के 36 गांव की जमीन अधिग्रहित हो चुकी है, जबकि झारखंड की 43 गांव का जमीन अधिग्रहण बाकी है। लेकिन केंद्रीय जल अायाेग की रिपाेर्ट पर अब तक ईचा डैम की ऊंचाई घटाकर 225 मीटर से 213 की गयी है। इसके बावजूद अांशिक डूब क्षेत्र के कारण 40 के करीब गांव अांशिक जल प्रभाव के बावजूद पूरी तरह विस्थापित हाे जायेंगे।
3 प्वाइंट में समझंे, इस तरह पड़ेगा असर
{डैम के दाेनाें अाैर मिटटी मेढ़ : 4 किमी
{मेन मेढ़ की कंक्रीट ऊंचाई : 213 मीटर
{ईचा डैम के मुख्य मेढ़ पर खर्च: 970 कराेड़
{कब तक याेजना हाेगी पूरी : 2022 अगस्त
फैक्ट फाइल
खुशी जताते लोग।
डैम से सीधा असर पड़नेवाले ईचा, बंदाेडीह, मझगांव का दाैरा करने पर पता चला कि इन डूब क्षेत्र की एक बड़ी अाबादी गांव छाेड़ चुकी है। इसके बावजूद कई गांवाें में लाेग माैजूद हैं। लेकिन गांवाें में कच्चे घर रिपेयरिंग नहीं हाे रहे हैं। पक्के मकान नहीं बनाये जा रहे हैं। ये तब से हाे रहा जब 1986 के अासपास जल संसाधन विभाग ने डैम विस्थापिताें के बीच सरकारी मुअावजा बांटना शुुरू किया था। इन इलाकाें में एेसे भी कई परिवार मिलेंगे, जिन्हाेंने मुअावाजा नहीं पाया है। ज्यादातर लाेग इस बात से भी नाराज हैं कि उन्हें बहुत कम पैसे दिये गये । देरी से परियाेजना चालू हाेने के कारण अब नये पीढ़ी के युवा डैम का ही विराेध कर रहे हैं। यही कारण है कि दर्जन भर प्रभावित गांवाें के दीवाराेंपर कुजू डैम रदद कराे, डैम बनानेवाली कंपनी वापस जाअाे जैसे वाल राइटिंग देखने काे मिलेगा। खास बात ये कि पूर्णत: डूबने वाले नाै गांव सरायकेला खरसांवा जिले के राजनगर प्रखंड के हैं। दाे जिला प. सिंहभूम व सरायकेला खरसंवा के बाॅर्डर में ये डैम बन रहा है। जिसमें प सिंहभूम के सदर चाईबासा अाैर तांतनगर के गांव भी डैम प्रभावित क्षेत्र में अायेंगे।
ईचा डैम के डूब क्षेत्र में आने वाले गांव में लोगों ने पुराने मकानों की मरम्मत कराने भी छोड़ दी है।
डैम का काम राेकने के लिये सरकार काे धन्यवाद जरूर देते हैं। लेकिन हमारी मांग है कि इस परियाेजना काे ही रद्द कर दिया जाये। इससे हमारे लाेगाें काे काेई लाभ नहीं हाेगा। रद्द हाेने तक अांदाेलन जारी रहेगा। दशकन कुदादा, अध्यक्ष, विस्थापित संघ
विस्थापित बोले
सरकार का डैम निर्माण कार्य अगले आदेश तक स्थगित करने का निर्देश तत्कालिक खुशी है। डैम पूरी तरह रद्द होना चाहिए। पूर्व सरकार ने नियम कानून को ताक में रखकर बांध निर्माण कार्य शुरू कराया था।
मुकेश बिरूवा, विस्थापित संघ के नेता