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चार दशक तक शहर का चर्चित जेएमपी हाॅल अब सिर्फ यादाें में रहेगा, ताेड़कर बन रहा माॅल

एक वर्ष पहले
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चाईबासा शहर की पहचान अाैर सिनेप्रेमियाें के लिये खास पसंद रही 52 साल पुरानी जैन मूवी पैलेस यानि जेएमपी हाॅल का अब सिर्फ स्मृति शेष रहेगा। इस भवन काे अब ताेड़कर नया माॅल बनाया जायेगा। ताेड़ने का काम शुुरू हाे गया है। शहर के उद्याेगपति अाैर सिनेमा प्रेमी जैन परिवार ने इस हाॅल की स्थापना की थी। साल 1968 में 3 फरवरी काे इस सिनेमा हाॅल की शुरुअात हुयी थी। पहली फिल्म उपकार लगी थी। इस हाॅल के कदरदान अब भी शहर में हैं। सिनेमा हाॅल के धवस्त हाेने पर वे भी दर्द महसूस कर रहे हैं। लेकिन समय के साथ 25 एमएम की िसनेमाई परदा काेल्हान के इस इलाके में नापसंद हाेती गयी। हालंाकि जेएमपी हाॅल में नयी नयी तकनीकी अाने के बावजूद काफी काेशिश हुयी कि समय के साथ सिनेमा हाॅल काे चलाया जाये,लेकिन पिछले दस साल से हाॅल बंद रही। इस हाॅल में मुंबई की नई फिल्में भी रिलीज के पहले शाे के लिये लाये जाते थे। बाेनी कपूर जैसे फिल्म मेकर भी अपनी फिल्में इसी हाॅल से रिलीज कर चुके हैं।

हाॅल के मालिक का फिल्माें से था लगाव

पेशे से पत्रकार रहे नरेश खिरवाल बताते हैं कि 10 वर्षों से सिनेमा हॉल बंद पड़ा था। इसके कर्मचारियों को किसी प्रकार आधे वेतन का भुगतान किया जा रहा था। अंतत: मालिक अशोक जैन की मृत्यु के बाद सिनेमा हॉल को आखिरकार बेच दिया गया। एक जमाना था जब इस सिनेमा हॉल में शहर भर की भीड़ जुटा करती थी। नई फिल्मों का दौर हुआ करता था। लोगों में नई फिल्म पहले दिन में पहले शो देखने की होड़ मची रहती थी। हॉल के मालिक अशोक जैन को सिनेमा हॉल से काफी लगाव था । वे कई फिल्मों के निर्माता निर्देशक भी थे।

1968 काे चालू हुअा, पहली फिल्म थी उपकार

समाजसेवी गुरुमुख सिंह खाेखर ने बताया- 3 फरवरी 1968 को जेएमपी सिनेमा हाल का उद्घाटन तत्कालीन उपायुक्त जीएस कंग के हाथों हुआ था। उद्घाटन में खाेखर अपने पिता सरदार फौजा सिंह और चाचा जी सरदार राम सिंह के संग गए थे। उपकार फिल्म दिखाई गई थी। कहा कि इसी जगह पर पहले पेट्रोल पंप हुआ करता था। कुछ अर्से बाद फिल्म निर्माता बोनी कपूर मुंबई से खुद यहां आए थे एवं उनके भाई अनिल कपूर की पहली फिल्म \\\'वाे सात दिन\\\' का शो दिखाया गया था।

इधर...शहर के दाे खास लाेगाें ने बताये अपने अनुभव

नाम से ही पहचान : बहुत कम चीजें अाैर जगह एेसी हाेती है जिनकी पहचान नाम से हाे जाती है। एेसी ही पहचान जेएमपी यानि जैन मूवी पैलेश की थी। इस नाम से चाैक का नाम जेएमपी चाैक पड़ गया। काेल्हान के दूर दराज से अाने वाले हर अादमी की जुबान पर ये नाम चर्चित रहता है।

जेएमपी हाल धवस्त करते लोग।
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