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इंटरेस्टिंग... सिंगल यूज प्लास्टिक से निपटेगा ‘द मिल्क मैन’ कॉन्सेप्ट
सिंगल यूज प्लास्टिक से निपटने के लिए एक अमेरिकी कंपनी लूप ‘द मिल्क मैन’ के कॉन्सेप्ट यानी ‘दूध वाला’ की वापसी कर रही है। यानी कि आने वाले दिनों में प्लास्टिक के बजाय कांच व मेटल की बोतलों में दूध सप्लाय किया जाएगा। दूध ही नहीं, अन्य सामान की डिलीवरी में भी प्लास्टिक का इस्तेमाल बंद किया जा रहा है। प्लास्टिक के कंटेनर तथा रैक के स्थान पर मेटल के होंगे। ऐसा कर कंपनी लाखों टन प्लास्टिक हटाने के लिए वचनबद्ध है।
लूप के संस्थापक और रिसाइक्लिंग के लिए प्रसिद्ध टेरासाइकल कंपनी के मास्टरमाइंड, टॉम स्जाकी ने बताया कि उनका यह काम अमेरिका की नई जनरेशन पीढ़ियों तक याद रखेगी। इतना ही नहीं, कंपनी योरप और ब्रिटेन में भी यह कॉन्सेप्ट इसी महीन से शुरू कर रही है। इसके बाद कनाडा, जर्मनी और जापान में भी जल्द इसका विस्तार करने की घोषणा कर दी गई है।
देखा जाए तो 40, 50 तथा 60 के दशक में मध्यम वर्ग के लोगों के घर के बाहर डिलीवरी ट्रक में आया ‘दूध वाला’ कांच की बोतलें छोड़ जाता था। हम दूध वापरकर खाली बोतल बाहर रख देते थे। उस काम में कभी कोई कचरा पैदा नहीं हुआ। आज वही कॉन्सेप्ट दोहाराया जा रहा है। अमेरिका के मध्य अटलांटिक क्षेत्र में जल्द ही लूप कंपनी अपने प्रॉडक्ट प्लास्टिक में पैक करना बंद कर रही है। इसी महीने यानी मार्च में अपना सिंगल यूज प्लास्टिक के मुक्ति वाला काम अपने अग्रणी बिजनेस मॉडल के साथ ब्रिटेन में स्थापित कर रही है। कंपनी को उम्मीद है कि वह जल्द ही विश्व के किराना बाजार से सिंगल यूज प्लास्टिक को बाय-बाय कर देगी।
कंपनी लूप ने एक वर्ष पहले फ्रांस में कैरेफोर के साथ साझीदारी कर कांच व मेटल वाला कॉन्सेप्ट लांच किया था। यह योरप में किराना सामान की सबसे बड़ी शृंखला में से एक है। इस काम के लिए छोटा सा डिपॉजिट लिया जाता है। मेटल व कांच के बर्तन साफ करके दोबारा काम में लिए जाने योग्य होते हैं। देखा जाए तो दोबारा इस्तेमाल करने योग्य उत्पाद ऑनलाइन लूप स्टोर्स के अलावा क्रोगर और वालग्रेन कंपनियां भी इस्तेमाल कर रही हैं। यदि बजट की बात की जाए तो इनका मूूल्य भी प्लास्टिक जितना ही होता है, तो प्लास्टिक के पहाड़ क्यों बनाए जाएं? हां, कंटेनर्स के लिए उपभेक्ताओं से एडवांस जमा कराया जाएगा।
बिजनेस इनसाइडर 2020 की रिपोर्ट के अनुसार किराने के सामान की ऑनलाइन खरीदी का बिजनेस 2018 में 26 बिलियन डॉलर हो गया था। यदि लूप जैसी कंपनी की देखादेखी अन्य भी करें तो लाखों टन प्लास्टिक अभी से बनना बंद हो सकता है। Âgoodnewsnetwork.org