यूपी के सभी 34 संवेदनशील जिलों में शांति, अयोध्या के साधु-संतों ने अंकोरवाट की तर्ज पर दुनिया का सबसे भव्य राम मंदिर बनाने को कहा

Chaibasa News - सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अयोध्या अब मेकओवर के लिए तैयार है। 67 एकड़ के क्षेत्र में राम मंदिर के साथ क्या-क्या...

Nov 11, 2019, 06:45 AM IST
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अयोध्या अब मेकओवर के लिए तैयार है। 67 एकड़ के क्षेत्र में राम मंदिर के साथ क्या-क्या बनेगा, 10 किमी के दायरे में अयोध्या कैसे बदलेगी, इसकी चर्चा शुरू हो गई है। संत-महंतों ने अयोध्या को दुनिया के सबसे बेहतर धार्मिक स्थल के रूप में विकसित करने और सबसे भव्य राम मंदिर बनाने की मांग की है। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी ने कहा कि दुनिया के अब तक के सबसे बड़े कंबोडिया के विष्णु मंदिर, अंकोरवाट मंदिर की तर्ज पर बने, ताकि दुनिया भारत की स्थापत्य और समृद्ध विरासत को नए रूप में देखे। मंदिर के लिए प्रस्तावित ट्रस्ट जन भागीदारी से फंड जुटाए। ऑनलाइन अकाउंट जारी करे। श्री सोमनाथ ट्रस्ट की तर्ज पर श्रीराम जन्म भूमि ट्रस्ट के अस्तित्व में आने के बाद सिर्फ मंदिर ही नहीं बनेगा, पूरी अयोध्या संवरेगी।

दिगंबर अखाड़े के महंत सुरेश दास ने कहा कि राम जन्मभूमि को दुनिया के सबसे बड़े मंदिर के रूप में बनाना चाहिए। सुरेश दास, रामचंद्र परमहंस के उत्तराधिकारी हैं। महंत अवधेश दास कहते हैं कि प्रस्तावित ट्रस्ट को विशाल राम मंदिर के साथ पूरी अयोध्या का निर्माण करना चाहिए।

योगी ने अयोध्या के लिए 226 करोड़ की योजनाएं दी हैं, 5 स्टार होटल भी बनेंगे: अयोध्या से भाजपा विधायक वेद प्रकाश गुप्त ने कहा कि सीएम योगी ने पहले ही अयोध्या के विकास का खाका खींच दिया है। 26 अक्टूबर को अयोध्या के लिए 226 करोड़ की योजनाएं घोषित की हैं। जल्दी ही निजी क्षेत्र के तीन से 5 सितारा 10 नए होटल बनेंगे। राम की पैड़ी के विकास के लिए 33 करोड़ िदए हैं। 70 हेक्टेयर में राम की 251 मीटर ऊंची प्रतिमा बननी है।

तस्वीर बनारस की है। यहां बारावफात जुलूस में लोग हाथों में तिरंगे लेकर निकले। जुलूस में एक एंबुलेंस फंस गई तो लोगों ने रास्ता दिया।

69 साल पुरानी रिपोर्ट को सुप्रीम कोर्ट ने बनाया अपने फैसले का हिस्सा

पवन कुमार | नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या फैसले में कमिश्नर की उस रिपोर्ट को जगह दी है, जिसकी वजह से हिंदुओं को दोबारा मूल जगह पर पूजा-पाठ की अनुमति मिली। दरअसल, 1949 में मुसलमानाें को ही नमाज पढ़ने से नहीं रोका गया था, बल्कि हिंदुओं की भी पूजा-पाठ बंद करवा दी गई थी। जब गोपाल सिंह विशारद ने 1950 में विवादित जगह पर पूजा-पाठ करने व मूर्तियों को न हटाने की मांग की, तो फैजाबाद कोर्ट ने एक कमिश्नर नियुक्त किया था। उस वक्त कोर्ट कमिश्नर ने हिंदू-मुस्लिम दोनों पक्षों की मौजूदगी में विवादित स्थल की एक रिपोर्ट बनाई थी। इसी आधार पर कोर्ट को विवाद को समझने में मदद मिली।

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