ईदगाह मैदान में फातिहा कर मोहम्मद साहेब के संदेश को जन-जन तक पहुंचने का लिया संकल्प

Chaibasa News - खरसावां में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने क्षेत्र में विधि-व्यवस्था, अमन-चैन कायम रखने सहित भाईचारगी का संदेश देने के...

Nov 11, 2019, 07:05 AM IST
खरसावां में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने क्षेत्र में विधि-व्यवस्था, अमन-चैन कायम रखने सहित भाईचारगी का संदेश देने के लिए रविवार को खरसावां के मुस्लिम कमेटी बेहरासाई के द्वारा पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद के यौम-ए-पैदाइश पर निकाले जाने वाले ईद मिलादुन्नबी का जुलूस नहीं निकाला। देर शाम बेहरासाई मदीना मस्जिद के समीप ईदगाह मैदान में मगरीब के बाद मिलादुल नबी, फातिहा ख्वानी अाैर सलातो-सलाम के कार्यक्रम का आयोजन कर पैगंबर मोहम्मद सल्लल्लाह अलेहे व सल्लम के संदेश को जन-जन तक पहुंचनें का संदेश दिया। मिलादुल नबी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए खरसावां के बेहरासाई मदीना मस्जिद के मौलाना आसिफ इकबाल रजवी ने कहा कि पैगंबर मोहम्मद सल्लल्लाह अलेहे व सल्लम का पूरी जिंदगी मानवता की सेवा में गुजरी है। बिगड़ती हुई सामाजिक दशा को सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। उन्होंने बुराइयों के खिलाफ एक पहल की और लोगों को इंसानियत का पाठ पढ़ाया। मोहम्मद साहब के इंसानियत वाले व्यवहार के कारण ही उन्हें रहमत-उल-आलमीन अर्थात पूरे संसार पर रहमत करने वाला कहा गया है।

मोहम्मद साहेब की पूरी जिंदगी मानवता की सेवा में गुजरी: मौलाना आसिफ इकबाल रजवी

बेहरासाई से मिलादुल नबी-सलातो-सलाम के लिए मंचासीन मौलान व अन्य।

नात-ए-पाक व सलातो-सलाम कार्यक्रम

खरसावां में जुलूस ए मोहम्मदी का जलूस तो नहीं निकला। लेकिन बेहरासाई में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने लंगर का भी आयोजन किया। इस दौरान गरीबों को के बीच खिचड़ा का वितरण किया गया। दस दौरान कार्यक्रम में नात-ए-पाक एवं सलातो-सलाम कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में मौलाना आसिफ इकबाल रजवी, रमीजुल हक, जशीम कुरैशी, हाजी मुश्ताक, डा. एम ई खान, राज तबरेज, अंसार खान, परवेज आलम, अली खान, तसलीम आलम, मो. आसिफ, मो. खुरशीद, जाकिर असारी, मो. मनसुर, मो. जागु, मो. जहीर सहित मुस्लिम समाज के लोग व बच्चों ने लिया भाग।

हजरत मोहम्मद का संदेश

मौलाना आसिफ इकबाल रजवी ने कहा कि हजरत मोहम्मद का कहना है कि सबसे अच्छा आदमी वह है जिससे मानवता की भलाई होती है। साथ ही उन्होंने कहा था कि जो ज्ञान का आदर करता है, वह मेरा आदर करता है। ज्ञान को ढूंढने वाला अज्ञानियों के बीच वैसा ही है जैसे मुर्दों के बीच जिंदा। हजरत मोहम्मद ने कहा था कि भूखे को खाना दो, बीमार की देखभाल करो, अगर कोई अनुचित रूप से बंदी बनाया गया है तो उसे मुक्त करो, संकट में फंसे प्रत्येक व्यक्ति की सहायता करो, भले ही वह मुसलमान हो या किसी और धर्म का।

कौन थे पैगंबर हजरत मोहम्मद

पैगंबर मोहम्मद का पूरा नाम पैगंबर हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम था। इनके वालिद का नाम अब्दुल्लाह और वालदा का नाम बीबी अमीना था। वह इस्लाम के सबसे महान नबी और आखिरी पैगंबर थे। उनका जन्म मक्का शहर में जन्म 20 अप्रैल 571 ईस्वी को हुआ था। मक्का के पास हीरा नाम की गुफा में उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई। बाद में उन्होंने इस्लाम धर्म की पवित्र किताब कुरान की शिक्षाओं का उपदेश दिया। हजरत मोहम्मद ने 25 साल की उम्र में खदीजा नाम की विधवा से शादी की। उनके बच्चे हुए, लेकिन लड़कों की मृत्यु हो गई। उनकी एक बेटी का अली हुसैन से निकाह हुआ। उनकी मृत्यु 632 ई. में हुई। उन्हें मदीना में ही दफनाया गया।

खिचड़ा तैयार करते लोग।

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