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झुंड से बिछड़े शिशु हाथी को लाया गया मनोहरपुर, रांची भेजने की तैयारी में जुटा वन विभाग
झुंड से बिछड़े हुए हाथी के बच्चे को वापस भेजने की तमाम कोशिशों के फेल होने और लोगों के अनावश्यक हस्तक्षेप से बचने की वजह से वन विभाग बुधवार को हाथी के बच्चे को मनोहरपुर ले आया है। उसे वन विश्रामागार में रखा गया है।
इधर, इस खबर के मिलते ही यहां भी बच्चे को देखने के लिए लोगों की आवक शुरू हो गई है। परंतु गांवों की तुलना में यहां हाथी काफी सहज महसूस कर रहा है। गुरुवार को यहां हाथी का पुनः स्वास्थ्य परीक्षण किया गया और प्रखंड पशुपालन पदाधिकारी डॉ संजय घोलटकर ने उसे रिहाइड्रेट करने के लिए स्लाइन चढ़ाया। अब हाथी पूरी तरह से स्वस्थ है।
पोड़ाहाट वन प्रमंडल पदाधिकारी शिवकुमार प्रसाद ने बताया- शिशु हाथी को 1-2 दिन के अंदर रांची भेज दिया जाएगा। वन विभाग के मुताबिक पिछले साल दिसंबर माह में इस हाथी के बच्चे का जन्म बारंगा गांव में हुआ है। वन विभाग व पशुपालन विभाग के मुताबिक विगत बुधवार को हाथी को बुखार हो गया था। अतः उसे बुखार दूर करने संबंधी इंजेक्शन दिए गए। विभाग द्वारा उसके खान-पान का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। रोजाना 10 लीटर दूध दिया जा रहा है।
हाथियों के झुंड से नहीं मिल रहा िरस्पांस
वन विभाग के मुताबिक हाथी के बच्चे को उसकी मां व झुंड से कोई रिस्पांस नहीं मिल रहा है। इसकी दो वजह हो सकती है। या तो हाथी का वह झुंड कहीं और चला गया है। या फिर झुंड को आशंका है कि कहीं बच्चे की मार्फ़त इंसानों द्वारा हाथियों को पकड़ने की मंशा तो नहीं है। डॉ संजय घोलटकर के अनुसार, हाथी स्वभाव वश अपने झुंड से बिछड़े बच्चे को तब नहीं स्वीकारता है जब उसे आशंका होती है कि बच्चे के शरीर से कोई छेड़छाड़ हुई है या फिर उसके मार्फ़त झुंड को पकड़े जाने अथवा नुकसान होने की आशंका हो।
रविवार दोपहर को मां व झुंड से बिछड़ा था हाथी
8 मार्च की दोपहर हाथियों के झुंड के गुटिनासा पहुंचने पर लोगों द्वारा उन्हें खदेड़ा जा रहा था। उस वक्त हाथियों का झुंड दो ग्रुप में बंट गया और हाथी का यह बच्चा झुंड से अलग हो गया। रात 8 बजे वह रेंगालबेड़ा गांव पहुंच गया। सूचना मिलने पर वन विभाग ने रात में उसे कब्जे में ले लिया। फिर रात में उसे जंगल के किनारे ही रखा गया। ताकि उसकी मां उसे अपने साथ ले जा सके। परंतु सोमवार को बच्चा सिरका गांव चला गया। वहां वह ग्रामीणों के साथ रहा। वहां से वन विभाग मंगलवार को काशिजोड़ा ले गए।
हाथी को उसकी मां व झुंड से मिलाने की कई दफा कोशिश की गई है। परन्तु इसमें हमें सफलता नहीं मिली है। अब उसे रांची के बिरसा जैविक उद्यान भेजने के लिए कागजी प्रक्रिया जारी है। 1-2 दिन में उसे हर हाल में वहां भेज दिया जाएगा। - शिवकुमार प्रसाद, डीएफओ, पोड़ाहाट वन प्रमंडल
हाथी पूरी तरह स्वस्थ है। परंतु उसे जल्द - से - जल्द उसके प्राकृतिक आवास या किसी चिड़ियाघर में भेजना जरूरी है। अन्यथा ज्यादा देर होने की हालत उसे खतरा हो सकता है। -डॉ. संजय घोलटकर, प्रखंड पशुपालन पदाधिकारी, मनोहरपुर
हाथी को स्लाइन चढ़ाते चिकित्सक व वनकर्मी
बारंगा में दिसंबर में हुआ था जन्म