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4 फीट बचा है पानी, 3 फीट और गिरा तो जल संकट

ब्रिटिश जमाने में बने इसी पंप हाउस से रेलवे कॉलोनियों को पानी मिलता है। फिलहाल 14 फीट तक पानी है, और तीन फीट नीचे गिरा...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 01, 2018, 02:20 AM IST

4 फीट बचा है पानी, 3 फीट और गिरा तो जल संकट
ब्रिटिश जमाने में बने इसी पंप हाउस से रेलवे कॉलोनियों को पानी मिलता है। फिलहाल 14 फीट तक पानी है, और तीन फीट नीचे गिरा तो जल संकट का सामना करना पड़ेगा। संभावना है कि इस बार चक्रधरपुर में पानी की समस्या होगी।

दरअसल वार्ड संख्या 22 स्थित पंप हाउस ही पानी का एक बड़ा स्रोत है। हालांकि डीप बोरिंग रेल क्षेत्र में है। विंजय नदी में बने पंप हाउस से पानी की आपूर्ति पुराने पाइप लाइनों से होती है। पंप हाउस में 37 सालों से ड्यूटी बजा रहे रेलवे के वरिष्ठ टेक्नीशियन बीएन शर्मा का कहना है कि वह दिसंबर में सेवानिवृत्त होने वाले हैं।

दिल में एक कसक हमेशा रहेगी कि जहां हम लाखों लोगों की प्यास को रोजाना बुझाते हैं, पर हमारी प्यास बुझाने वाला कोई नहीं है। पंप हाउस में पीने का पानी भी घर से लेकर आना पड़ता है। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि गांव-गांव में शौचालय का निर्माण हो रहा है। लेकिन पंप हाउस में शौचालय तक नहीं है।

वहीं टेक्नीशियन वन ए डाडेल ने बताया कि शौचालय नहीं रहने के कारण जंगल जाना पड़ता है।

रोजाना 16 घंटे पानी की होती है आपूर्ति

पंप हाउस में 150/200 एचपी व 160/204 एचपी की दो पंप मशीन आठ-आठ घंटे शिड्यूल पर चलती हैं। दोनों मशीनों से रोजाना 16 घंटे पानी की आपूर्ति होती है। जिससे रेलवे क्षेत्र सहित अन्य क्षेत्रों में भी पानी की आपूर्ति की जाती है। वहीं लाइट नहीं रहने व अन्य आपातकालीन सेवा के दौरान पानी की आपूर्ति बर्टन लेक व सेरसा स्टेडियम के पास स्थित जल भंडार गृह में स्टोर कर पानी की आपूर्ति होती है।

10 फीट पानी में पंप नहीं करता है काम

चेकडैम में बना पंप हाउस 10 फीट पानी रहने पर काम नहीं करता है। 11 फीट तक डैम में पानी रहने पर पंप काम करता है। 10 फीट हो जाने पर पंप पानी नहीं उठा पाता है। इस हाल में रेलवे को अन्य विकल्प की तलाश करनी पड़ती है।

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