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राम जैसे पुत्र के लिए दशरथ जैसे पिता, कौशल्या जैसी मां बनना होगा : अनुराधा

पेटरवार प्रखंड के चांदो पंचायत में श्री रामचरितमानस नवाह्न परायण महायज्ञ के पांचवें दिन यज्ञ स्थल पर महायज्ञ की...

Danik Bhaskar | Apr 02, 2018, 02:15 AM IST
पेटरवार प्रखंड के चांदो पंचायत में श्री रामचरितमानस नवाह्न परायण महायज्ञ के पांचवें दिन यज्ञ स्थल पर महायज्ञ की परिक्रमा के लिए चांदो समेत पेटरवार, जरीडीह, कसमार, गोमिया, बेरमो, चास के श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। पांचवें दिन भारी तादाद में महिलाएं, युवतियां, बच्चों ने परिक्रमा की। वहीं गांव की 38 युवतियां मानस पाठ करने के साथ देवी-देवताओं की आरती की।

पाठकर्ता विनोद शरण ने संगीतमय वातावरण में सुबह से दोपहर तक मानस पाठ किया। प्रवचनकर्ता मानस मंजरी सुश्री अनुराधा सरस्वती ने श्रीराम अवतार की प्रसंग पर कहा कि भगवान शंकर- मैया पार्वती से कहते हैं कि जब-जब इस धरती पर धर्म की हानि हुई है, तब-तब परमात्मा धर्म की रक्षा तथा ब्राह्मण, साधु, संत की रक्षा के लिए भिन्न-भिन्न रूपों में अवतरित होते रहे हैं। भगवान श्रीराम अवध की पावन धरा पर अवतार लेकर दशरथ, कौशल्या तथा तीनों लोकों को सुख प्रदान करते हैं। उन्होंने रामजन्मोत्सव की वर्णन करते हुए कहा कि कलियुग में हर माता-पिता की इच्छा होती है कि राम जैसा पुत्र हो, लेकिन वह स्वयं को दशरथ एवं कौशल्या नहीं बनाना चाहते। राम जैसे पुत्र की प्राप्ति के लिए माता-पिता को दशरथ जैसे पिता तथा कौशल्या की तरह मां बनने की जरूरत है।

इससे पूर्व बनारस से आए प्रवचनकर्ता अच्युतानंदन पाठक ने धनुष भंग के प्रसंग पर कहा कि जब तक भगवान राम ने शंकर के धनुष को नहीं तोड़ा, तब तक शांति रूपी सीता नहीं मिली। उसी तरह जब तक दहेज रूपी धनुष को नहीं तोड़ा जाएगा, तब तक घर में शांति कायम नहीं हो सकती है।

प्रवचन करतीं अनुराधा सरस्वती।