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मां के दरबार में दूर-दूर से मन्नतें मांगने आते हैं लोग

बूढ़ी में मंदिर परिसर में स्थित कुसुम का पेड़। भास्कर न्यूज । डकरा मोहननगर स्थित प्रसिद्ध बूढ़ी मां मंदिर जन...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 18, 2018, 03:00 AM IST

बूढ़ी में मंदिर परिसर में स्थित कुसुम का पेड़।

भास्कर न्यूज । डकरा

मोहननगर स्थित प्रसिद्ध बूढ़ी मां मंदिर जन आस्था का केंद्र है। बुजुर्गों के अनुसार, चार दशक पूर्व सीसीएल कर्मी राधा नायक की नि:संतान प|ी कलावती ने एक रात सपना देखा कि मां काली उससे कह रही हैं : मैं एक कुसुम के सूखे पेड़ के नीचे विराजमान हूं, तुम मेरी सेवा करो, मैं तेरी गोद भर दूंगी। इसके बाद कलावती सुबह- शाम कुसुम के सूखे पेड़ की जड़ में पूजा-पाठ करने लगी। इसके कुछ साल बाद उसे संतान की प्राप्ति हुई और सूखे पेड़ भी हरे हो गए। देवी की इस लीला की चर्चा होने के बाद आसपास के लोगों के मन में आस्था जगी और लोगों ने मिलकर कुसुम के नीचे मंदिर बना दिया। मंदिर के पुजारी राधा नायक खुद बन गए। 2003 में राधा की मृत्यु के बाद उनकी प|ी कलावती मंदिर की पुजारिन बनी। चैत्र नवमी आते ही मंदिर परिसर के कुसुम पेड़ की सारी पत्तियां लाल हो जाती हैं। लोग इस मां का अागमन मानते हैं।

पुजारिन कलावती नायक बताती हैं कि श्रद्धालु अपनी मनोकामना पूरी करने के लिए मां के दरबार में आकर मन्नत मांगते हैं। चुनरी की गांठ बांधकर जाते हैं और मनोकामना पूरी होने पर मां को चुनरी और प्रसाद चढ़ाकर मंदिर परिसर में घंटा बांधते हैं। अमीर हो अथवा गरीब बूढ़ी मां के दरबार में सभी को समान अधिकार है। मंदिर में पूजा-अर्चना उड़िया रीति-रिवाज से की जाती है। चैत्र नवमी और शारदीय नवरात्र में यहां भक्तों की लंबी कतार लगी रहती है।

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