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सीसीएल व मोनेट प्रबंधन पर आपराधिक मामला दर्ज हो

खाद्य आपूर्ति मंत्री और दामोदर बचाव अभियान के संयोजक सरयू राय ने कहा कि सीसीएल व मोनेट कोल वाशरी प्रबंधन पर...

Danik Bhaskar | May 13, 2018, 02:15 AM IST
खाद्य आपूर्ति मंत्री और दामोदर बचाव अभियान के संयोजक सरयू राय ने कहा कि सीसीएल व मोनेट कोल वाशरी प्रबंधन पर आपराधिक मामला दर्ज होना चाहिए। ये दोनों कंपनियां सोनाडुबी और दामोदर नदी को प्रदूषित कर रही हैं। बिना तिरपाल से ढके कोयले की ट्रांसपोर्टिंग, साइडिंग से खिसक कर कोयला नदी में जाने और लोडिंग- अनलोडिंग से उड़ने वाले कोयले के डस्ट ने नदी के अस्तित्व को पूरी तरह समाप्त कर दिया है।

राय शनिवार को डकरा में दामोदर नदी का निरीक्षण करने आए थे। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष इस क्षेत्र का दौरा कर नदी में अतिक्रमण, ड्राई वाशिंग और प्रदूषण पर सीसीएल के अफसरों से रोक लगाने को कहा था। लेकिन, इस दिशा में सम्मानजनक कार्य नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि इस स्थिति से कोयला मंत्री को अवगत कराएंंगे। अगर, ये कंपनियां इसी तरह धरोहर को मिटाने की कोशिश करती रहीं, तो इनके खिलाफ स्थानीय लोगों को आगे आ कर न्यायालय में पीआईएल दाखिल करना चाहिए। उन्होंने मोनेट प्रबंधन से सोनाडुबी नदी में काला पानी छोड़ो, हापड़, रोटर ब्रेकर और साइडिंग में पानी का छिड़काव नहीं करने पर नाराजगी जताई। मोनेट प्रबंधन ने कहा कि सीसीएल नदी में गंदा पानी छोड़ती है। वहीं, स्थानीय भाजपा नेता आनंद झा ने बताया कि भूतनगर से गुजरी सोनाडुबी नदी को सीसीएल ने खदान विस्तार के दौरान दर्जनों बार छेड़छाड़ कर धारा बदल दी है। इससे नदी नाले के रूप में तब्दील हो गया है। उन्होंने कहा कि पिछले 10 वर्षों से बरसात में नदी के उफान से बस्ती के घरों में पानी घुस जाता है। ओबी के पत्थर से पूरा नदी भर गया है। सफाई के नाम पर सीसीएल प्रबंधन मात्र औपचारिकता निभाता है।

नदी में गंदा पानी छोड़ने पर मोनेट के अफसरों से पूछताछ करते मंत्री सरयू राय।

बालू का भंडारण देख मंत्री ने डीसी से पूछा-कार्रवाई क्यों नहीं की

एनके एरिया के मैगजीन घर के पीछे सोनाडुबी और देवनद नदी के संगम के समीप अवैध रूप से किए गए बालू के भंडारण को देखकर मंत्री ने रांची डीसी व एसडीओ से फोन पर बात की। पूछा-बालू का अवैध उत्खनन और भंडारण पर आप सख्त कार्रवाई क्यों नहीं करते हैं। राय ने कहा कि बालू माफिया और वन विभाग की सांठगांठ से जंगलों में रास्ता बनाया गया है। जबकि, जरूरत के लिए रास्ता बनाने पर वन विभाग की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। इनकी टालमटोल नीति से कई महत्वपूर्ण सड़कें रुकी हुई हैं। इस मामले पर जल्द जिला प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से कार्रवाई करने को कहेंगे।