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वाटर बॉक्स में मरे पड़े हैं जीव-जंतु, फिर भी उसी से कॉलोनियों में हो रही पानी सफ्लाई

एनके एरिया डकरा फिल्टर प्लांट से सीसीएल के आवासीय कॉलोनियों में प्रदूषित पानी सप्लाई किया जा रहा है। नल से गंदा और...

Danik Bhaskar

May 24, 2018, 02:25 AM IST
एनके एरिया डकरा फिल्टर प्लांट से सीसीएल के आवासीय कॉलोनियों में प्रदूषित पानी सप्लाई किया जा रहा है। नल से गंदा और बदबूदार पानी आने से लोग पीने से कतरा रहे हैं। लोगों की शिकायत पर प्लांट की जांच की तो देखा गया कि फिल्टर प्लांट में बिना फिल्टर के ही पानी सप्लाई किया जा रहा है।

लगभग 23 लाख की लागत से पानी को स्वच्छ करने की क्लोरीन मशीन खराब पड़ी है। दामोदर नदी से आने वाले पानी को सिर्फ फिटकिरी डाल कर आवासीय कॉलोनी में भेजा जा रहा है। प्लांट के वाटर बक्स में पक्षी मरे पड़े रहने के कारण पानी से दुर्गंध आ रही है। इस संबंध में प्लांट के कर्मचारी ने बताया कि पिछले दो दिन से खेलानधौड़ा खदान में लगा मोटर खराब होने के कारण प्लांट में पर्याप्त मात्रा में पानी संग्रह नहीं हो रहा है, जिसके कारण फिल्टर नहीं हो पा रहा है।

डकरा फिल्टर चैंबर के पानी में मारा पड़ा है कौआ।

दामोदर नदी से लिया जाता है पानी : डकरा फिल्टर प्लांट में सप्लाई के लिए दामोदर नदी से पानी लिया जाता है। जिसमें पहले से ही कोयला के गादी, झार के अलावा छोटे-बड़े फैक्ट्रियों के गंदा पानी नदी में बहाया जाता है, जिससे हाथ या कपड़ा धोने पर भी रोगों को आनंत्रण देना है। इसके बावजूद यही पानी सप्लाई होता है।

आवासीय कॉलोनियों में सप्लाई हो रहे पानी से आ रही है दुर्गंध

दूषित जल से होने वाली बीमारियां : विषैली रसायन या सूक्ष्म जीवाणु या किसी प्रकार की गंदगी यदि पानी में घुल जाए तो उससे सजीव प्राणी में कई तरह की बीमारियां हो सकती हैं। दूषित जल के माध्यम से मानव स्वास्थ्य को सर्वाधिक हानि पहुंचाने वाले कारक रोगजनक सूक्ष्म जीव होते हैं। इससे होने वाले रोग जैसे, पीलिया, पोलियो, गैस्ट्रो-इंटराइटिस, जुकाम, संक्रामक यकृत षोध, चेचक, अतिसार, पेचिस, मियादी बुखार, अतिज्वर, हैजा, कुकुर खांसी आदि शामिल है।

इंटकवेल में लगा मोटर पुरानाे : इंटकवेल में लगा मोटर पुराना है। दो-चार घंटे चलने के बाद मोटर गर्म हो जाती है। इस स्थिति में इतने बड़े आवासीय कॉलोनियों में नियमित पेयजल सप्लाई करना टेढ़ी खीर है। वहीं, मजदूर नेता कृष्णा चौहान का कहना है मिनिर| कंपनी होने के बावजूद कंपनी अपने कामगारों को शुद्ध पानी तक नहीं दे पाती है। जबकि हर साल पानी के नाम पर लाखों रुपया पानी की तरह बहाए जाते हैं। फिर भी हर वर्ष गर्मी के मौसम में ऐसी स्थिति उत्पन्न होती है।

फिल्टर प्लांट में जमा गंदा पानी, जो पानी है कि कीचड़ है पहचानना मुश्किल।

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