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आत्मा चैतन्य शक्ति है, कभी नष्ट नहीं होता : बहन नीलम

प्रजापिता ब्रह्मा कुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय डकरा शाखा के द्वारा भारतीय शिल्प मेला में शिविर लगाकर लोगों को...

Danik Bhaskar | Apr 21, 2018, 05:00 AM IST
प्रजापिता ब्रह्मा कुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय डकरा शाखा के द्वारा भारतीय शिल्प मेला में शिविर लगाकर लोगों को सकारात्मक सोच जगाने का काम किया जा रहा। संस्थान के बहन नीलम और प्रीति शिविर में मानव जीवन के कर्म में को विस्तार पूर्वक समझा रही है। इनलोगों ने कहा कि जो व्यक्ति मन का राजा है वह विश्व का राजा है। आज समाज को विभिन्न धर्म व जाति के नाम पर बांटा जा रहा है। मनुष्य अपने स्वधर्म को भूल चुका है। कहा, आत्मा है तो सब कुछ है। आत्मा एक चैतन्य शक्ति है, इसका कभी भी विनाश नहीं होता है। आत्मा, अजर अमर अविनाशी है। मानव शरीर का निर्माण दो शक्तियों जड़ व चैतन्य से मिल कर हुआ है। शरीर का निर्माण प्रकृति के पांच तत्वों जल, वायु, भूमि, अग्नि और आकाश से मिलकर हुआ है। इनमें से किसी भी एक तत्व की कमी होने पर शरीर उसकी मांग करने लगता है। उसी प्रकार चैतन्य शक्ति आत्मा भी सात गुणों से मिल कर बनी है।

ज्ञान, पवित्रता, शांति, प्रेम, सुख, आनंद व शक्ति आत्मा के सात मौलिक गुण है। इसीलिए आत्मा को सतोगुणी कहा जाता है। इन सातों गुणों में से किसी एक गुण की कमी होने से व्यक्ति क्रोध, तनाव आदि व्याधियों से ग्रसित हो जाता है। उनलोगों ने आगे बताया कि किसी भी वस्तु के अस्तित्व का पता तभी चलता है जब मन के चैतन्य प्रकाश से वह प्रकाशित हो। आत्मा की तीन शक्तियां मन, बुद्धि और संस्कार के द्वारा वह अपने इन गुणों का अनुभव करती है। हम अपने मन की सिर्फ दो प्रतिशत शक्ति का ही उपयोग करते है जबकि 98 प्रतिशत शक्तियां सुस्त पड़ी है। जब हम मेरा-मेरा कहने लगते है तो काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार के वश हो जाते हैं। शिविर को सफल बनाने में केके सिंह, बीके तिवारी, दिलीप दास, अशोक कुमार आदि लोग सराहनीय योगदान दे रहे है।

प्रजापिता ब्रह्मा कुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की डकरा शाखा ने भारतीय शिल्प मेला में लगाया शिविर