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20 सालों में पूरा परिवार बर्बाद हो गया, आरोपियों को जो सजा दो गई है वह अपराध को देख कम है

पारसनाथ सिंह की हत्या मामले में फैसला आने के बाद पारसनाथ के पिता सिरम गांव निवासी रामजन्म सिंह ने बताया कि अभी जो...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 15, 2018, 02:30 AM IST

पारसनाथ सिंह की हत्या मामले में फैसला आने के बाद पारसनाथ के पिता सिरम गांव निवासी रामजन्म सिंह ने बताया कि अभी जो कोर्ट का फैसला आया है उससे वे संतुष्ट नहीं हैं क्योंकि लगभग 20 वर्षों में उनका परिवार बर्बाद हो गया। यहां तक कि आश्रितों को नौकरी के लिए किया गया फाइल कोर्ट के फैसले के कारण रुका हुआ था। राम जन्म सिंह ने रोते हुए बताया कि पुलिस ने आतंकवादी की तरह घटना को अंजाम दिया। अमानवीय तरीके से उसकी हत्या की गई। उन्होंने कहा कि पूर्व के एक आईजी ने उन्हें 9 लाख रुपए देने का प्रलोभन दे मामले को दबाने को भी कहा था लेकिन उन्होंने कहा कि व कफन का व्यापार करने उनके पास नहीं आएं।

उन्होंने घटना के दौर का जिक्र करते हुए बताया कि वर्ष 1998 में उनके घर की स्थिति ठीक-ठाक नहीं थी इस कारण वे बड़े लड़के के साथ पंचायत भवन में रहते थे । 1998 में अचानक कुछ पुलिसकर्मी जबरन उनके बेटे पारसनाथ को घर से उठा ले गए और पिपराटांड़ कैंप में बुरी तरह पीटने लगे। इस क्रम में उसकी मौत पुलिस पिकेट में ही हो गई। आनन-फानन में पुलिसकर्मियों ने उन्हें पांकी स्वास्थ्य केंद्र लाया जहां प्रभारी पर जबरन इंजरी रिपोर्ट बनवाने का काफी दबाव डाला गया लेकिन प्रभारी चिकित्सक ने रिपोर्ट नहीं बनाई। इसके बाद उसकी बॉडी को डाल्टनगंज सदर अस्पताल पोस्टमार्टम हेतु ले जाया गया। जहां तत्कालीन सीएस आरपी सिन्हा पर भी पुलिस ने अपनी मनमुताबिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट बना बनाने का दबाव डाला लेकिन वहां मौजूद स्थानीय विधायक रहे संकटेश्वर सिंह की सूझबूझ से मामले को दबाया नहीं जा सका। इसके बाद उन्होंने मानवाधिकार आयोग में कंप्लेन दर्ज करवाया। मृतक की प|ी का नाम अहिल्या कुंवर ने एफआईआर दर्ज करवाई।

राम जन्म सिंह ने बताया कि उनके बेटे को माओवादी का आरोप लगाकर पुलिस उन्हें उठाकर घर से ले गई थी । साथ ही सब कुछ कबूल करवाने को लेकर अमानवीय तरीके से पिटाई की गई थी जिनसे उनकी मौत हो गई थी।

मालूम हो कि सीबीआई की विशेष अदालत ने पारसनाथ सिंह की हत्या मामले में तत्कालीन डीएसपी दीनानाथ रजक, इंस्पेक्टर देवलाल उर्फ देवीलाल प्रसाद, तत्कालीन थाना प्रभारी सुरेंद्र प्रसाद और तत्कालीन सब इंस्पेक्टर रुकसार अहमद को 5-5 वर्ष की सजा सुनाई है। साथ ही, अदालत ने 1-1 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। हत्या जुलाई 1998 में की गई थी। मामले को लेकर दिल्ली सीबीआई की टीम जांच कर रही है।

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Web Title: 20 सालों में पूरा परिवार बर्बाद हो गया, आरोपियों को जो सजा दो गई है वह अपराध को देख कम है
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