झरिया / अग्निप्रभावित 1.04 लाख परिवार होंगे विस्थापित, सभी का होगा पुनर्वास



प्रतीकात्मक फोटो। प्रतीकात्मक फोटो।
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प्रतीकात्मक फोटो।प्रतीकात्मक फोटो।

  • झरिया पुनर्वास ए‌वं विकास प्राधिकार का सर्वे पूरा
  • पहली बार रैयताें काे मिलेगा मुआवजा

Dainik Bhaskar

Oct 12, 2019, 11:31 AM IST

धनबाद(संजय मिश्रा).  झरिया पुनर्वास एवं विकास प्राधिकार (जेआरडीए) ने भू-धंसान अाैर अग्नि प्रभावित क्षेत्राें में रह रहे गैर बीसीसीएल परिवाराें का सर्वे का काम पूरा कर लिया गया है। जेअारडीए ने धनबाद के 581, बाेकाराे के 3 अाैर पश्चिम बंगाल के 11 समेत कुल 595 साइट पर सर्वे किया है। सर्वे में 1 लाख 4 हजार 9 सौ 46 परिवार पुनर्वास के लिए चिह्नित किए गए हैं। उन्हे उचित मुअावजे के साथ पुनर्वासित किया जाएगा। सर्वे के अनुसार रैयताें की संख्या 32064 अाैर अतिक्रमणकारी परिवाराें की संख्या 72882 बताई गई है। जेअारडीए ने अपनी रिपाेर्ट काेयला मंत्रालय द्वारा गठित एचपीसीसी कमेटी काे साैंप दी है।

 

मास्टर प्लान के उलट सर्वे में तीन गुना बढ़ी कब्जाधारियों की संख्या
मास्टर प्लान के अनुसार जहां लीगल टाइटल हाेल्डर (एलटीएच/ रैयत) की संख्या 29,444 अाैर अतिक्रमणकारियाें की संख्या 23,847 थी, वहीं सर्वे में रैयताें की संख्या बढ़ कर 32064 अाैर अतिक्रमणकारियाें की संख्या 72882 पहुंच गई है। इस तरह कुल 1,04,946 गैर बीसीसीएल परिवाराें काे मुअावजा देने अाैर उन्हें सुरक्षित स्थानाें पर बसाने की जिम्मेवारी जेअारडीए पर अा गई है। जेअारडीए की अधिकारिक रिपाेर्ट के अनुसार भू-धंसान अाैर अग्नि प्रभावित क्षेत्राें में रह रहे परिवाराें में मास्टर प्लान के अनुसार 23847 परिवार अाैर सर्वे के अनुसार 72882 परिवार कब्जाधारी हैं। वहीं 2004 के पहले 23264 परिवार, 2004 से 2009 तक 12543 परिवार, 2009 तक 35807 परिवार तथा 2009 के बाद 37075 परिवार की संख्या है।

 

595 साइटों पर सर्वे पूरा करने में लगे सात साल
जेअारडीए की अाेर से वर्ष 2011 में अाईएसएम अाैर सिंफर द्वारा सर्वे शुरू किया गया था, लेकिन दाेनाें संस्थाअांे ने बीच में ही सर्वे का काम छाेड़ दिया। उसके बाद 2013-14 में बीज मंत्रा एनजीअाे से सर्वे कराया गया। बीज मंत्रा के खिलाफ शिकायत मिलने पर उसे सर्वे से हटा दिया गया। उसके बाद अगस्त 2018 में तीन एनजीअाे द्वारा सर्वे कराया गया।

 

अागे क्या ?
सर्वें में अतिक्रमणकारियाें अाैर रैयताें द्वारा जेअारडीए काे साैंपे गए कागजात का संबंधित क्षेत्र के सीओ से सत्यापन कराएगा। कट अॉफ डेट काे लेकर भी मामला फंस सकता है। केंद्र सरकार ने 2004 अाैर 2009 दाेनाें में से किसी कट अॉफ डेट काे अंतिम नहीं माना है।

 

11 साइटाें का सर्वे किया गया
पुनर्वास काे लेकर सभी 595 साइट का सर्वे का काम पूरा हाे गया है। इनमें धनबाद-बाेकाराे में 585 अाैर पश्चिम बंगाल में 11 साइटाें का सर्वे किया गया है। झरिया पुनर्वास एवं विकास प्राधिकरण के एमडी के माध्यम से रिपाेर्ट काेयला मंत्रालय काे भेजी गई है। -शशि रंजन, परियाेजना निदेशक, जेआरडीए

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