13 माह में 25% ही हुआ काम, बचा काम 20 महीने में पूरा होना मुश्किल

Dhanbad News - निरसा-गोविंदपुर मेगा ग्रामीण जलापूर्ति योजना अपने तय समय साल 2020 तक पर पूरी होती नहीं दिख रही है। 524 करोड़ रुपए की इस...

Bhaskar News Network

Mar 17, 2019, 03:10 AM IST
Dhanbad News - 25 work done in 13 months work saved in 20 months is difficult
निरसा-गोविंदपुर मेगा ग्रामीण जलापूर्ति योजना अपने तय समय साल 2020 तक पर पूरी होती नहीं दिख रही है। 524 करोड़ रुपए की इस योजना के तहत 436 गांवों में सप्लाई का पानी पहुंचाने की तैयारी है। इजराइल की टहल कंपनी को दिसंबर 2020 तक सभी गांवों में घर-घर पानी पहुंचाने का जिम्मा सौंपा गया है। झारखंड सरकार के साथ उसका अक्टूबर, 2017 में करार हुआ था, हालांकि काम दिसंबर 2018 में शुरू हुआ। उसके 13 माह बाद भी सिर्फ 20-25 फीसदी ही काम हुआ है। मैथन और पंचेत डैम के पास बन रहे वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का काम भी आधा ही हुआ है। विभिन्न गांवों में जलमीनारें और पाइप बिछाने का काम शुरू ही नहीं हो सका है। ऐसे में बचे हुए 20 माह में योजना पूरी हाे जाने के आसार कम ही हैं। हालांकि, ठेका कंपनी अब भी समय पर काम पूरा कर लेने का दावा कर रही है।

मैथन और पंचेत डैम के पास बनाए जाने हैं ट्रीटमेंट प्लांट, इजराइल की टहल कंपनी कर रही काम

इस दो वजहों से आई काम में बाधा

1. पेटी कांट्रेक्ट और स्थानीय लोगों को काम देने पर फंसा पेंच

योजना काफी बड़ी है, इसलिए इसमें बड़ी संख्या में मजदूरों की जरूरत है। वाटर ट्रीटमेंट प्लांट, इनटेकवेल, पानी टंकी का निर्माण और विभिन्न गांवों में पाइप बिछाने का काम किया जाना है। स्थानीय लोगों ने डीडब्ल्यूएसडी आैर टहल कंपनी के सामने शर्त रख दी कि पेटी कांट्रेक्ट और स्थानीय मजदूरों के जरिए काम कराया जाए, तभी वे सहयोग करेंगे। कई माह तक काम बंद रहा। आखिरकार डीडब्ल्यूएसडी और ठेका कंपनी को झुकना पड़ा। पेटी कांट्रेक्ट पर वे राजी हो गए।

2. डैमों के पास पाइप बिछाने के लिए डीवीसी से एनओसी नहीं

निरसा और गोविंदपुर प्रखंडों में एनएच-2 के उत्तर में बसे 301 गांवों में मैथन डैम से पानी लेकर जलापूर्ति करनी है। एनएच-2 के दक्षिण में 135 गांवों में पंचेत डैम से पानी लेकर जलापूर्ति की जाएगी। नॉर्थ साइड पर 344 करोड़ रुपए और साउथ साइड पर 180 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। दोनों जलसंयंत्रों से डीवीसी की जमीन से होकर विभिन्न गांवों में पाइपलाइन जाएगी, लेकिन डीवीसी से अभी तक इसके लिए एनओसी नहीं मिल सका है।

सभी पेटी कांट्रेक्ट स्थानीय को, 80 फीसदी मजदूर भी यहीं के : प्रोजेक्ट मैनेजर

टहल कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर देवाशीष कोले का कहना है कि श्रम अधिनियम के तहत बड़ी योजनाओं में स्थानीय लोगों को वरीयता देनी है। इस नियम का पालन किया गया है। 20 लोगों को पेटी कांट्रेक्ट दिया गया है और ये सभी ठेकेदार स्थानीय हैं। स्किल और अनस्किल्ड मजदूर मिलाकर लगभग 80 प्रतिशत स्थानीय ही रखे गए हैं। तकनीकी कामों के लिए ही कंपनी के अपने स्किल्ड मजदूर लगाए गए हैं।

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