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पूर्णिमा पर हुआ हरि और हर का मिलन

Dhanbad News - गुरुवार को फाल्गुन पूर्णिमा पर बाबा नगरी में प्राचीन परंपरानुसार हरि और हर का मिलन कराया गया। गुरुवार की रात आठ...

Dainik Bhaskar

Mar 04, 2018, 02:20 AM IST
पूर्णिमा पर हुआ हरि और हर का मिलन
गुरुवार को फाल्गुन पूर्णिमा पर बाबा नगरी में प्राचीन परंपरानुसार हरि और हर का मिलन कराया गया। गुरुवार की रात आठ बजे आजाद चौक दोल मंच से भगवान हरि को होलिका दहन के बाद बाबा मंदिर लाया गया, इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा को बाबा के शिवलिंग से स्पर्श कराकर हरिहर मिलन कराया गया। हरिहर मिलन देखने के लिए मंदिर में लोगों की भारी भीड़ लगी रही। गुरुवार की दोपहर एक बजे बाबा मंदिर का पट बंद कर ढाई बजे भगवान श्री कृष्ण को पालकी में बैठाकर मंदिर का परिक्रमा कराते हुए पेड़ा गली होते हुए आजाद चौक दोल मंच ले जाया गया। जहां भगवान को झुले में बैठाकर झुलाया गया। शहर के कोने-कोने से लोग भगवान को अबीर चढ़ाने व झूला झुलाने के लिए दोल मंच पहुंचे। इसके बाद शाम सवा सात बजे विधि विधान के साथ होलिका दहन किया गया। होलिका दहन के बाद भगवान को मंदिर लाया गया और शिवलिंग से स्पर्श कराकर हरिहर मिलन कराया गया। हरिहर मिलन के बाद बाबा का श्रृंगार कर पट बंद कर दिया गया। हरिहर मिलन की परंपरा पूरे भारत वर्ष में सिर्फ देवघर में ही प्रचलित है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार फाल्गुन पूर्णिमा के दिन रावण द्वारा शिव जी को लंका ले जाने के क्रम में हृतिका वन में ग्वाले के वेश में भगवान विष्णु के हाथ में शिवलिंग को देकर रावण लघुशंका के लिए गया तभी हरि और का मिलन हुआ था। इस कारण यहां हरिहर मिलन की परंपरा प्रचलित है।

भगवान श्री कृष्ण को पालकी में बैठाकर मंदिर की परिक्रमा कराते श्रद्धालु।

भास्कर न्यूज|देवघर

गुरुवार को फाल्गुन पूर्णिमा पर बाबा नगरी में प्राचीन परंपरानुसार हरि और हर का मिलन कराया गया। गुरुवार की रात आठ बजे आजाद चौक दोल मंच से भगवान हरि को होलिका दहन के बाद बाबा मंदिर लाया गया, इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा को बाबा के शिवलिंग से स्पर्श कराकर हरिहर मिलन कराया गया। हरिहर मिलन देखने के लिए मंदिर में लोगों की भारी भीड़ लगी रही। गुरुवार की दोपहर एक बजे बाबा मंदिर का पट बंद कर ढाई बजे भगवान श्री कृष्ण को पालकी में बैठाकर मंदिर का परिक्रमा कराते हुए पेड़ा गली होते हुए आजाद चौक दोल मंच ले जाया गया। जहां भगवान को झुले में बैठाकर झुलाया गया। शहर के कोने-कोने से लोग भगवान को अबीर चढ़ाने व झूला झुलाने के लिए दोल मंच पहुंचे। इसके बाद शाम सवा सात बजे विधि विधान के साथ होलिका दहन किया गया। होलिका दहन के बाद भगवान को मंदिर लाया गया और शिवलिंग से स्पर्श कराकर हरिहर मिलन कराया गया। हरिहर मिलन के बाद बाबा का श्रृंगार कर पट बंद कर दिया गया। हरिहर मिलन की परंपरा पूरे भारत वर्ष में सिर्फ देवघर में ही प्रचलित है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार फाल्गुन पूर्णिमा के दिन रावण द्वारा शिव जी को लंका ले जाने के क्रम में हृतिका वन में ग्वाले के वेश में भगवान विष्णु के हाथ में शिवलिंग को देकर रावण लघुशंका के लिए गया तभी हरि और का मिलन हुआ था। इस कारण यहां हरिहर मिलन की परंपरा प्रचलित है।

बच्चों और युवाओं में दिखा होली का उल्लास

जसीडीह|जसीडीह बाजार व ग्रामीण क्षेत्र मे शुक्रवार को होली पर खूब रंग-गुलाल उड़े। जसीडीह बाघमारा स्थित सरस कुंज मे पल रहे दृष्टि बाधित बच्चे, असहाय और वृद्ध व्यक्तियो के बीच वार्ड पार्षद रिता चौरसिया ने सभी बच्चों के बीच मिठाई बांट व गुलाल लगाकर होली की बधाई दी। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में अंधरीगादर पंचायत के मुखिया सावित्री देवी के आवास पर होली मिलन समारोह का आयोजन किया गया। समारोह के दौरान गीत-संगीत का कार्यक्रम प्रस्तुत कर लोगों को गुलाल लगाकर बधाई दी।

आपसी सौहार्द के साथ होली सोल्लास संपन्न

देवघर| रंगों का त्योहार होली देवनगरी में आपसी सौहार्द के बीच मनाया गया। गुरुवार को देवनगरी में पारंपरिक तरीके से सभी बाबा बैद्यनाथ पर अबीर चढ़ाने केे बाद एक दूसरे को गुलाल लगाकर व बड़ों के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। शुक्रवार की सुबह से पूरे शहर में रंगों की बौछार शुरू हो गयी। खासकर बच्चों में होली को लेकर सबसे अधिक उत्साह छाया रहा। बच्चों ने पिचकारी से हर आने-जाने को रंगों से सराबोर कर दिया। होली को लेकर शहर का पूरा बाजार भी बंद रहा। वहीं शाम को लोगों ने एक-दूसरे के घर जाकर होली बधाई दी और पकवान का आनंद लिया।

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