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होली में खूब उड़ाएं रंग, लेकिन गुलाल पर सावधानी जरूर बरतें

अधिक मुनाफा कमाने के लिए रंगों में खाद, मिट्टी और सेक्रीन की मिलावट कर रहे है। मिलावटी रंग लागत खर्च से 20 गुणा महंगे...

Danik Bhaskar

Mar 01, 2018, 02:15 AM IST
अधिक मुनाफा कमाने के लिए रंगों में खाद, मिट्टी और सेक्रीन की मिलावट कर रहे है। मिलावटी रंग लागत खर्च से 20 गुणा महंगे मूल्य पर बिक रहे है। डीबी स्टार की टीम ने इसका जायजा लिया। सभी रंग औसतन 800 रुपए प्रति किलो बिक रहे है। बाजार में मिट्टी की कीमत 20 रुपए प्रति किलो, सेक्रीन या चीनी के डस्ट की कीमत 45 रुपए प्रति किलो और खाद की कीमत 60 रुपए प्रति किलो है। यानी एक किलो मिलावटी रंग (100 ग्राम असली में 100 किलो मिलावट) यानी अधिकतम 150 रुपए में मिलावटी रंग तैयार हो जाता है। वहीं बाजार में मिलावटी रंग 1500 से 2500 रुपए प्रति किलो बेचा जा रहा है।

होली के पहले घटिया और नुकसानदेह रसायनों से पटा बाजार

धनबाद . होली के लिए रंगों की खरीदारी कर रहे है, तो सतर्क रहे। बाजार में मिलावटी रंगों की भरमार है। डीबी स्टार टीम ने सोमवार को पुराना बाजार में रंगों के थोक विक्रेताओं के गोदामों की पड़ताल की। एक्सपर्ट व्यवसायियों से बात की। सामने आया कि रंगों में मिट्टी और खाद से लेकर सेक्रीन तक की मिलावट की जा रही है। ये मिलावट स्थानीय स्तर पर की जा रही है। स्किन के स्पेशलिस्ट डॉक्टरों का कहना है कि खाद की मिलावट वाले रंग से कई तरह के चर्म रोग होने की आशंका होती है। उनका सुझाव है कि शरीर पर चढ़े रंग को ज्यादा देर तक न रहने दे। एक्सपर्ट का कहना है कि सिर्फ आईएसआई मार्का वाले रंग ही खरीदें। इसके साथ ही अबीर लेते वक्त इस बात का ख्याल रखे, कि अबीर में अबरक मिला है या नहीं। अबरक वाला अबीर बेहतर होता है।

लागत से 20 गुना महंगे मिलावटी रंग

मिलावट करके 100 ग्राम को बना रहे हैं एक किलो

स्थानीय स्तर पर कुछ इस प्रकार की जाती है मिलावट

लाल-गुलाबी रंग में चीनी की मिलावट

बाजार में बिक रहे लाल और गुलाबी रंगों में चीनी मिलाई जा रही है। यह रंग सेहत और शरीर के लिए कुछ कम हानिकारक है। 100 ग्राम असली रंग में 1000 ग्राम सेक्रीन या चीनी का डस्ट मिलाया जाता है। चीनी मिलाए जाने के कारण है यह ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचाता। इसके साथ ही कुछ अन्य मिलाने पर रंग ज्यादा खतरनाक हो जाता है।

अबीर में अरारोट और स्टोन डस्ट : बाजार में दो तरह के अबीर उपलब्ध है। महंगा और सस्ता। महंगे अबीर में अरारोट की मिलावट हो रही है। वहीं सस्ते अबीर में स्टोन डस्ट मिलाया जा रहा है। मिलावटी अबीर को महंगी दर पर बेचने के लिए दुकानदार उसमें खुशबू भी डाल रहे है। बाजार में अरारोट से तैयार अबीर 150-200 रुपए प्रति किलो और स्टोन डस्ट मिला अबीर 60 से 80 रुपए प्रति किलो उपलब्ध है।

एक्सपर्ट व्यू

केमिकल मिला रंग स्किन के लिए काफी खतरनाक है। इसके साथ ही सेक्रीन युक्त रंग इस्तेमाल करने से लीवर खराब होने की खतरा है। ऐसे में जहां तक संभव है केमिकल वाले रंगों का प्रयोग नहीं करना चाहिए। यदि रंग लगाना ही है, तो हर्बल या बायो रंग का इस्तेमाल करना चाहिए। इसके साथ ही अबीर की खरीदारी के वक्त इस बात का ख्याल रखना जरूरी है कि, अबीर में अबरक है या नहीं। अबीर में अबरक का होना जरूरी है।

एक्सपर्ट सलाह

वैसे तो होली के दौरान रंग और अबीर से बचने का ही प्रयास करना चाहिए, लेकिन न बच सकें तो इनका प्रभाव कम करने के लिए पहले चेहरे, आंख की पलकों काम आदि पर डर्माशिल्ड क्रीम लगा ले। शेष शरीर पर घर में उपलब्ध सरसों तेल या नारियल तेल लगा लें। ऐसा करने से शरीर के स्किन पर रंगों का असर कम होगा। रंग में मिले केमिकल से ज्यादा नुकसान नहीं होगा।

हरे रंग में खाद की मिलावट

बाजार में बिकने वाले रंगों में ज्यादा नुकसानदेह हरा रंग है। इस रंग को खाद मिलाकर तैयार किया जा रहा है। 100 ग्राम असली हरे रंग में 1000 ग्राम खाद मिलाई जाती है। खाद मिलने से यह रंग रंग काफी खतरनाक हो जाता है। यह सेहत और शरीर दोनों के लिए काफी हानिकारक है। यह रंग जल्दी छूटता भी नहीं है।

सस्ते रंग में बालू खाद

सस्ते रंगों में 20 से 25 रुपए प्रति किलों मिलने वाला बालू खाद मिलाया जा रहा है। लगभग सभी रंग के खाद बाजार में उपलब्ध है। किसी भी रंग में उसी रंग का खाद मिलाया जा रहा है। इसके इस्तेमाल से स्किन खराब होने व घिस जाने का खतरा बना रहता है। सस्ते मूल्य पर बिक रहे रंगों में बालू खाद की ही मिलावट हो रही है।

डॉ अमित गुप्ता, प्रोफेसर डिपार्टमेंट ऑफ केमिकल इंजीनियरिंग, बीआईटी

डॉ गंगा प्रसाद, चिकित्सक, पीएमसीएच

बाजार में मौजूद रंगों में मिलावट कुछ इस तरह की जा रही है कि उनमें रंग कम है और बेकार की चीजें ज्यादा है। इस तरह 100 ग्राम असली रंग में मिलावट कर उसे एक किलोग्राम बना दिया जा रहा है। पुराना बाजार, हीरापुर समेत शहर के विभिन्न बाजारों में सस्ते मिलावटी रंग को असली रंग से भी अधिक कीमत पर बेचा जा रहा है।

मान्यता के अनुसार,अपने तरीके से होली मनाने की तैयारियों में जुटे अलग-अलग समाज

होली में कुछ व्रत रख बुराइयों के नाश की करते हैं कामना तो कुछ शस्त्र का करते हैं प्रदर्शन

विक्की प्रसाद. धनबाद . होली एक ऐसा त्योहार जिसका नाम सुनते ही मन में गजब का उमंग छा जाता है। बच्चों से लेकर बड़े तक के जीवन में होली का त्योहार बहुत ही खास महत्व रखता है। होली का त्योहार हर समुदाय के लिए विशेष महत्व रखता है। आम हो या फिर खास होली की मस्ती सभी वर्ग के लोगों को अपने रंग में डुबो ही देती है। अलग-अलग समुदाय भी इस त्योहार को अपने तरीके से मनाते है। कुछ समुदाय की महिलाएं होलिका दहन से व्रत रखती है तो कुछ अपने घर, आंगन को गोबर से शुद्ध बनाती हैं। वही कुछ अपने और अपने परिवार के सदस्यों के सुख-शांति व बुराइयों के नाश के लिए भगवान से प्रार्थना करती हैं। वही कुछ त्योहार में अस्त्र-शस्त्र का प्रदर्शन करते है। हर समुदाय और वर्ग होली के त्योहार को जश्न की तरह मनाते है।

बिहारी समाज : होलिका दहन से शुरू हो जाती हैं झलकूटन ... बिहारी में होली का खास महत्व है। होलिका दहन से ही बिहारियों की होली शुरू हो जाती है। झलकूटन का दौर शुरू हो जाता है। समाज के लोग टोली के संग ढोल-झाल और हारमोनियम लेकर होली के गीत गाते हुए होलिका दहन के स्थान पर जाते हैं और होलिका दहन करते हैं। होलिका दहन से होली के दिन रात भर झलकूटन का दौर चलता है। इसी कीर्तन मंडली के साथ युवा, बुजुर्ग व बच्चें जोगिरा गाते हैं। एक-दूसरे के घरों में जाकर होली खेलते है और बने पकवान का आनंद उठाते हैं। बिहारी समुदाय के लोग शादी के बाद पहली होली ससुराल में मनाते हैं। वर्तमान समय में त्योहार में कई बदलाव आए है।

गुजराती समाज : मामा बच्चे को कंधे पर लेकर होलिका की करते हैं परिक्रमा ... गुजराती समाज में बच्चे के जन्म के बाद की पहली होली खासा महत्व रखती है। मान्यता के अनुसार होलिका दहन वाले दिन मामा अपने भांजे को अपने कंधे पर लेकर होलिका की परिक्रमा करते है और उसके उज्जवल भविष्य की कामना करते है। गुजराती समाज की मान्यता अनुसार इससे बच्चे को बलवान बनाने, जिंदगी में आने वाली कठिनाई से लड़ने की ताकत मिलती है। वही होली के दिन समाज के लोग एक-दूसरे के घर जाकर रंग-गुलाल के साथ त्योहार मनाते है और बधाइयां देते है।

बंगाली समाज : भगवान की पूजा के साथ शुरू होती है होली... बंगाली समुदाय की होली की शुरुआत प्रात: पूजा से होती है। पूजा के दौरान भगवान पर अबीर चढ़ाया जाता है। इसी अबीर से बंगाली समुदाय के लोग दोला (होली) खेलते है। बंगाली समुदाय के लोग यह होली पूर्णिमा के दिन खेलते है। समुदाय के बच्चें उम्र में बड़े लोगों के पैर पर अबीर डाल अपना प्रेम प्रदर्शित और आशीर्वाद लेते हैं।

मारवाड़ी समाज: महिलाएं रखती हैं व्रत... होलिका दहन के दिन मारवाड़ी समुदाय की महिलाएं व्रत रख अपने और अपने परिवार के सदस्यों के सुख-शांति की कामना करती हैं। होलिका दहन के लिए बनाए गए बेदी पर महिलाएं पूजा करती है। गोबर के बड़कुल (गोइठा) का तख्ता को प्रह्लाद मान भक्त इसकी पूजा करते है। सपरिवार मारवाड़ी समुदाय के लोग नाचते गाते होलिका दहन के लिए इकट्ठे होते हैं। विधिवत पूजा-अर्चना कर होलिका दहन की जाती है। बच्चे व बुजुर्ग सभी होली खेलते थे। होली में शामिल लोगों का स्वागत नाश्ता, पानी व ठंडाई से किया जाता था।

पंजाबी समाज : शस्त्र का करते हंै प्रदर्शन ... पंजाबी समुदाय के लोग मोहल्ले में मनाना ज्यादा पसंद करते है। इस दिन अस्त्र-शस्त्र प्रदर्शन किया जाता है। पंजाब में इस तरह के आयोजन देखने को मिलता है। हालांकि जिले में इस तरह के कार्यक्रम नहीं होते है। यहां समुदाय के लोग अपने मुहल्ले में रंग-गुलाल खेलते है। त्योहार के दिन लोग अपने पहचान वालों को शुभकामनाएं देते है। सगे-संबंधी व दोस्तों में पकवान का आदान-प्रदान कर लोग अपने तरीके से त्योहार का लुत्फ उठाते है।

ये है ज्यादा खतरनाक रंग : चाइना कलर, पेंट कलर, डार्क कलर, ब्लैक ऑयल कलर, पर्पल डार्क कलर आदि। ये है कम खतरनाक रंग : हर्बल कलर, लाल रंग, पिला रंग और अबीर आदि ।

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