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यथासंभव संस्कृत भाषा का ही करें उपयोग : श्रीश / यथासंभव संस्कृत भाषा का ही करें उपयोग : श्रीश

Bhaskar News Network

Feb 12, 2018, 02:25 AM IST

Dhanbad News - जीवन के अंत तक स्वाध्याय के रूप में संस्कृत का अध्ययन करते रहें। विद्यार्थियों को भी चाहिए कि जहां भी संस्कृत...

यथासंभव संस्कृत भाषा का ही करें उपयोग : श्रीश
जीवन के अंत तक स्वाध्याय के रूप में संस्कृत का अध्ययन करते रहें। विद्यार्थियों को भी चाहिए कि जहां भी संस्कृत पढ़ने का विकल्प मिले, वहां संस्कृत को ही चुने। सरकार को भी चाहिए कि मानव संसाधन के विकास के लिए संस्कृत का उपयोग करें। उक्त बातें संस्कृत भारती के अखिल भारतीय महामंत्री श्रीश देवपुजारी ने कहा। वे रविवार को राजकमल सरस्वती विद्या मंदिर में आयोजित जनपद संस्कृत सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। इससे पहले कार्यक्रम का उद्घाटन मेयर चंद्रशेखर अग्रवाल ने किया। उन्होंने संस्कृत की खूबियों को गिनाते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा को विश्व पटल पर लाने के लिए संस्कृत सीखने की जरूरत है। सम्मेलन में अर्थशास्त्र, विज्ञान एवं राजनीति शास्त्र की प्रदर्शनी संस्कृत भाषा में लगायी गयी थी। इस दौरान राजकमल, संस्कार भारती, सरस्वती विद्या मंदिर भूली, आदर्श हिंदी बालिका मध्य विद्यालय पुराना बाजार, सविमं श्यामडीह कतरास, डीएवी कुसुंंडा, सविमं सिनीडीह, बालिका विद्या मंदिर झरिया, संस्कृत पाठशाला झरिया, अभया सुंदरी बालिका विद्यालय के विद्यार्थियों ने रंगमंचीय कार्यक्रम प्रस्तुत किए। मौके पर अध्यक्ष एमएन दास, अर्जुन प्रसाद पांडेय, ज्ञानेश चंद्र मिश्रा, हरीश जोशी, राजेश कुमार, इंद्रजीत प्रसाद सिंह, शंकर दयाल बुधिया, राजकुमार अग्रवाल, डॉ देवकी नंदन पांडेय, दुर्गा प्रसाद, सिद्धार्थ दास आदि मौजूद थे।

सम्मेलन में पारित प्रस्ताव | झारखंड सरकार से संस्कृत भाषा को पढ़ाई में अनिवार्य करने की मांग की जाएगी। जो शिक्षक संस्कृत पढ़ाने में असमर्थ होंगे, उन्हें संस्कृत का बेहतर प्रशिक्षण दिया जाएगा। माध्यमिक, उच्च माध्यमिक एवं महाविद्यालयों में संस्कृत शिक्षक और प्राध्यापकों के रिक्त पदों को भरने की मांग की जाएगी। जहां संस्कृत भाषा पढ़ने का अवसर विद्यार्थियों को उपलब्ध हैं, वहां उन्हें संस्कृत को भाषा के रूप में स्वीकार करने की अपील की जाएगी।

राजकमल सरस्वती विद्या मंदिर में हुए जनपद संस्कृत सम्मेलन में डीएवी कुसुंडा के पांचवीं कक्षा के छात्र रयान जुल्फीकार ने शिव महिमा जटा कटा हसंभ्रम भ्रमन्निलिम्प निर्झरी...प्रस्तुत कर सबको मंत्रमुग्ध कर दिया। उसकी प्रस्तुति सुन उनकी मां हीना सिद्दीकी की आंखें भी छलक पड़ी और मंच पर बैठे अतिथि उसकी तारीफ किये बिना नहीं रह सके। कार्यक्रम में अन्य कई विद्यार्थियों ने एक से बढ़ कर एक प्रस्तुति दी।

राजकमल स्कूल में प्रदर्शनी का अवलोकन करते अतिथिगण।

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