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सुदृढ़ होगी झमाडा की जलापूर्ति व्यवस्था, बढ़ेंगे आय के स्रोत

झमाडा के पास बाजार फीस मद की 100 करोड़ से अधिक की राशि रखी हुई है। इस राशि को जलापूर्ति व्यवस्था को सुदृढ़ करने पर...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 02, 2018, 02:25 AM IST

झमाडा के पास बाजार फीस मद की 100 करोड़ से अधिक की राशि रखी हुई है। इस राशि को जलापूर्ति व्यवस्था को सुदृढ़ करने पर किया जाएगा जो झमाडा के आय का सबसे बड़ा स्रोत है। राज्य सरकार को 96 करोड़ रुपए का डीपीआर बनाकर अनुमोदन के लिए भेजा गया है। स्वीकृति मिलते ही जर्जर पाइप लाइन को बदलकर नई पाइप लाइन बिछाई जाएगी। फिलहाल जामाडोवा और तोपचांची जलसंयंत्र से झमाडा कोयलांचल की बड़ी आबादी (8-9 लाख आबादी) को पानी देता है। जामाडोवा से 140 एमएलडी (मेगा लाख गैलन) व तोपचांची से 20 एमएलडी पानी प्रतिदिन सप्लाई हो रही है। झमाडा ज्यादातर बीसीसीएल को सप्लाई पानी देता है। पाइप लाइन व्यवस्था सुदृढ़ होने से कोलियरी क्षेत्र में बीसीसीएल के अलावा और कई खरीदार मिल जाएंगे।

जर्जरपाइप लाइन बदलने के लिए 96 करोड़ का डीपीआर तैयार, अनुमोदन के लिए राज्य सरकार को भेजा गया प्रस्ताव

बाजार फीस मद की लगभग सौ करोड़ की राशि है झमाडा के पास, जिसे विकास मद में खर्च करना है

केके सुनील. धनबाद

झारखंड खनिज क्षेत्र विकास प्राधिकार (झमाडा), इससे पहले माडा, उससे पहले झरिया वाटर बोर्ड। धनबाद की सबसे पुराना संस्थान। कोयलांचल में करोड़ों की अचल संपत्ति। इसके बाद भी आर्थिक स्थिति में जर्जर। इसके बाद भी कर्मचारियों को वेतन देने के लाले। हाल के दिनों में झमाडा की आर्थिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए कई स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। अगर ये कवायद धरातल पर आ गए तो न केवल आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हो जाएगी, बल्कि कर्मचारियों के दिन भी पलट जाएंगे।

क्या-क्या हो रहे है प्रयास : Rs.96 करोड़ से सुदृढ़ होगी जलापूर्ति व्यवस्था

राजस्व के लिए माडा पूरी तरह से जलापूर्ति पर निर्भर, पानी का रेट बढ़ने के बाद आमदनी हो जाएगी तीन गुनी,राजगंज और तोपचांची में बनेंगी 45 दुकानें

पानी का रेट बढ़ते ही तीन गुनी हो जाएगी आमदनी: सरकार के यहां पानी का रेट बढ़ाने का प्रस्ताव है। पुराने पानी के रेट पर झमाडा को प्रत्येक साल 23-24 करोड़ की आमदनी हो रही है। पानी का रेट बढ़ाने के लिए कैबिनेट से मंजूरी मिल गई है। नगर विकास विभाग से अधिसूचना जारी होते ही पानी से झमाडा के आय स्रोत में तीन गुनी वृद्धि हो जाएगी। यह आमदनी बढ़कर लगभग 70 करोड़ हो जाएगी।

आमदनी से ज्यादा खर्च : आमदनी के ख्याल से झमाडा पूरी तरह जलापूर्ति से प्राप्त राजस्व पर निर्भर है। जलापूर्ति से प्रत्येक वर्ष 23 करोड़ की आमदनी होती है। टाउन प्लानिंग का अधिकार शहरी क्षेत्र में पूरी तरह से छिन गया है। शहर के बाहर घर का इक्का-दुक्का नक्शा ही पास होता है। झमाडा का दूसरा आय का स्रोत बाजार फीस है। इसमें सिर्फ बीसीसीएल से ही राशि मिल रही है। बाकी कंपनियां नहीं दे रही। उन कंपनियों से बाजार फीस के लिए केस चल रहा है। बाजार फीस का 50 फीसदी राशि झमाडा को मिलना है। उक्त राशि में 70 प्रतिशत राशि विकास पर और 30% राशि कर्मचारियों के वेतन मद में खर्च करना है।

आय स्रोत बढ़ाने के लिए हर स्तर पर प्रयास किया जा रहा है। आय का बड़ा स्रोत जलापूर्ति व्यवस्था है। जर्जर पाइप के कारण झमाडा सही से पानी नहीं दे पा रहा है। जर्जर पाइप लाइन बदलने के लिए सरकार के पास प्रस्ताव भेजा गया है। इसके अलावा तोपचांची और राजगंज में दर्जनों दुकानें बनाने की योजना तैयार की गई है। इससे भी आमदनी कुछ बढ़ेगी। नगर विकास विभाग में पानी का रेट बढ़ाने का प्रस्ताव लंबित है। अगर नगर विकास विभाग अधिसूचना जारी कर देता है तो झमाडा की आमदनी संतोषजनक हो जाएगी। प्रबंधन हर महीने कर्मचारियों को वेतन देने में समझ हा़े जाएगा। शशिधर मंडल, प्रबंध निदेशक, झमाडा

तोपचांची-राजगंज में बनेंगी दर्जनों दुकानें

आय स्रोत बढ़ाने के लिए झमाडा प्रबंधन कोयलांचल के विभिन्न क्षेत्रों में दुकान बनाएगी। फिलहाल 46 दुकान बनाने की योजना तैयार की गईं हैं। इनमें तोपचांची में 12 और राजगंज में 34 दुकानें बनाई जाएंगी। तोपचांची में दुकान को लेकर आवंटन के लिए लोगों से आवेदन मांगें गए है। जबकि, राजगंज में दुकान निर्माण के लिए निविदा निकाली गई है।

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