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मध्यम वर्ग को बजट से हुई निराशा, कारोबारियों के लिए सिर्फ मुश्किलें कम करने के किए गए हैं दावे

सिटी रिपोर्टर

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 02, 2018, 02:25 AM IST

सिटी रिपोर्टर धनबाद

टैक्स स्लैब में छूट की सीमा नहीं बढ़ने के कारण बजट से मध्यम वर्ग पूरी तरह गौण है, जबकि लोगों को टैक्स में छूट की सीमा बढ़ने की उम्मीद थी। एक्साइज ड्यूटी में बढ़ोतरी से जरूरत की चीजें महंगी होंगी और इसका असर सीधे तौर पर मध्यम वर्ग पर ही पड़ेगा। कारोबारियों के लिए भी बजट में सिर्फ आश्वासन है। नई कर व्यवस्था (जीएसटी) और जरूरी किए जा रहे ई-वे बिल परेशानी का सबब बने हुए हैं। बजट में सिर्फ इस परेशानी को कम करने की बात कही गई है। 50 करोड़ लोगों के लिए स्वास्थ्य सुविधा, सीनियर सिटीजन और किसानों के लिए बजट में कई घोषणाएं अच्छी हैं, बशर्ते वे धरातल पर उतर सकें।

नोटबंदी के बाद डिजिटल इंडिया की रफ्तार तेज करने के लिए बजट में कुछ नहीं है, तो नई ट्रेनों के बजाय सुरक्षा पर अधिक ध्यान देने की योजना बेहतर है। हालांकि, स्थानीय स्तर पर झारखंड और धनबाद में सुविधाओं के नाम पर बजट में कुछ नहीं है। ये बातें शहर के कारोबारियों और अन्य लोगों ने गुरुवार को दैनिक भास्कर के कार्यालय में आयोजित टॉक शो में कहीं। जानते हैं, उन्होंने बजट पर क्या कहा।

दैनिक भास्कर कार्यालय मे टॉक शो में भाग लेते व्यवसायी।

ठगा हुआ महसूस कर रहा मध्यम वर्ग

संजय लोधा, मोटर डीलर्स एसोसिएशन : बजट से मध्यम वर्ग खुद काे ठगा महसूस कर रहा है। सीनियर सिटीजन, किसान और गरीब तबकों का ध्यान रखा गया है। कारोबारियों के लिए बजट में कुछ भी नहीं है। जीएसटी और ई-वे बिल की पेचीदगियों के कारण कारोबारियों की मुश्किलें बढ़ी ही हैं।

50 करोड़ को स्वास्थ्य सुविधा ऊंची छलांग

राजेश अग्रवाल, कारोबारी : बजट चुनाव को ध्यान में रखकर तैयार किया गया लगता है। 50 करोड़ लोगों के लिए स्वास्थ्य सुविधा ऊंची छलांग है। डिजिटल इंडिया के विस्तार के लिए खास योजना नहीं है। किसानों के लिए की गई घोषणाएं लागू होती हैं, तो निश्चित रूप से उनकी आय बढ़ेगी।

किसानों, गरीबों को लुभाने का प्रयास

जीतेंद्र अग्रवाल, कारोबारी : वित्त मंत्री ने पूरे देश में उड़ान योजना के तहत 56 बंद एयरपोर्ट और 37 हेलीपैड पर सेवाएं शुरू करने की बात कही, लेकिन धनबाद का नाम नहीं लिया। धनबाद से 22 ट्रेनें छिन गईं। बजट में किसान, गरीबों को लुभाने का प्रयास किया गया है।

कारोबारियों को कोई राहत नहीं

विनय रिटोलिया, शहरवासी : वर्तमान में नई ट्रेनों से ज्यादा जरूरी है सुरक्षा। बजट में नई ट्रेनों के बजाय सरकार ने सुरक्षा पर ध्यान देने की बात कही है, यह अच्छा है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में हुई घोषणा से गरीबों को फायदा होगा। बजट में कारोबारियों को थोड़ी भी राहत नहीं है।

उठाए गए कदम हैं सराहनीय

ओम अग्रवाल, बैंक मोड़ चैंबर : देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए बजट में कई प्रावधान किए गए हैं, स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में उठाए गए कदम सराहनीय हैं। किसानों और गरीबों को उनका हक मिलना चाहिए, लेकिन टैक्स सीमा में छूट की उम्मीद रखनेवाले निराशा हुए।

टैक्स प्रणाली सरल होना जरूरी

प्रकाश चौधरी, शहरवासी : जॉब पर ज्यादा जोर दिया गया है। अगर सरकार का पैसा जॉब सेक्टर में जाएगा, तो रोजगार के अवसर जरूर बढ़ेंगे। टैक्स प्रणाली में ज्यादा फायदा नहीं है, लेकिन सरकार ने आधारभूत ढांचे में निवेश की तैयारी की है। साथ ही टैक्स प्रणाली सरल होना बेहद जरूरी है।

टैक्स में छूट बढ़ती, बजट अच्छा होता

हरदयाल सिंह ढिंगरा, सदस्य, धनबाद-मटकुरिया चैंबर : सरकार ने स्मार्ट शहर बनाने को बजट में गति दी है। डिजिटल इंडिया के लिए किए गए प्रावधान, पंचायतों तक इंटरनेट पहुंचाने पर बल दिया गया है। टैक्स में छूट होता तो बजट अच्छा होता।

उपभोक्ता और कृषि क्षेत्र को मिलेगी मदद

मनीष, शहरवासी : बुनियादी ढांचे के साथ सहायक क्षेत्र पर विशेष ध्यान दिया गया है। इससे उपभोक्ता और कृषि क्षेत्र को मदद मिलेगी। इन उपायों काे सुनिश्चित करके कृषि उत्पाद खेतों से अंतिम उपभोक्ताओं तक पहुंचाकर किसानों के अधिकतम लाभ को बढ़ाने में सहायक होगी।

हड़बड़ी में दिख रही है सरकार

विकास झांझरिया, कारोबारी : बजट में हुईं घोषणाएं धरातल पर कम, कागजों पर अधिक रह जाती हैं। 50 करोड़ परिवारों को स्वास्थ्य सुविधा की घोषणा हुई, लेकिन कैसे? जीएसटी अौर अन्य नियमों से स्पष्ट है कि सरकार सबकुछ हड़बड़ी में कर रही है। यह सब स्टेप-बाई-स्टेप होना चाहिए था।

कारोबारियों को राहत का प्रबंध नहीं

चंदन अग्रवाल, कारोबारी : जीएसटी के कारण व्यवसायी वर्ग पर भार बढ़ा है। वे नई-नई परेशानियों से जूझ रहे हैं। अब ई-वे बिल के कारण माल मंगाना, भेजना मुश्किल हो गया है। पेनाल्टी का भय अलग सता रहा है, लेकिन इससे कारोबारियों को राहत मिले, इसका प्रबंधन नहीं किया गया है।

एक हाथ से लिया, दूसरे से दिया

दिनेश हेलीवाल, अध्यक्ष धनबाद-मटकुरिया चैंबर : अच्छी बात है सरकार ने लघु और मध्यम उद्योगों पर जोर दिया है। टैक्स सिस्टम के बारे में उन्होंने कहा कि एक हाथ से लिया गया है, तो दूसरे से दिया भी गया है।

धनबाद के लिए कुछ नहीं है बजट में

सुरेंद्र अग्रवाल, शहरवासी : मध्यम वर्ग को छोड़कर हर वर्ग का ध्यान रखा गया है। धनबाद के लिए बजट में कुछ भी नहीं है। न स्मार्ट शहर के लिए और न ही एयरपोर्ट के लिए घोषणा हुई। नई ट्रेनों की बजाए सुरक्षा पर जोर दिया जाना बढ़िया है। 50 करोड़ लोगों के लिए स्वास्थ्य सुविधा खास है।

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Web Title: मध्यम वर्ग को बजट से हुई निराशा, कारोबारियों के लिए सिर्फ मुश्किलें कम करने के किए गए हैं दावे
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