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चईत में लिहले राम जी जनमवां झूला झूले ले ललनवा...ए रामा

मादक वातावरण...। छंद और लय का कमाल...। झाल के झझकार पर हंहुकार...। ढोलक के थाप पर... हो रामा और आहो रामा की संगीतात्मक...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 01, 2018, 02:25 AM IST

चईत में लिहले राम जी जनमवां झूला झूले ले ललनवा...ए रामा
मादक वातावरण...। छंद और लय का कमाल...। झाल के झझकार पर हंहुकार...। ढोलक के थाप पर... हो रामा और आहो रामा की संगीतात्मक गुणगान। ‘राम’ के नाम से गगन और धरती गूंज उठी...। जी सही समझे, ये लोक गायन की विशिष्ट शैली में गायी जाने वाली चैती के रंग हैं। वही चैती या चैैता, जिसके बारे में भोजपुर के लोग कहते हैं... ई पढ़े के ना, सुने के चीज ह। गुते के ना, गावे के चीज ह। गुनगुनाये के ना, करेजा फाड़ के अलावे के चीज है। चैता झोर के चीज ह, चैता झूमे के चीज ह...। ये सारे चैती रंग शनिवार को गोल्फ ग्राउंड में उतर आए। मौका था... विधायक राज सिन्हा द्वारा आयोजित चैत्र महोत्सव का। इस महोत्सव में बतौर गायक पधारे जाने-माने कलाकार राधे किशुन और तारकेश्वर सिंह ने भक्ति , प्रकृति और श्रृंगार व्याख्याओं पर ताल ठोके... ऐ सुनऽ हो सुनऽ। छंद और लय की दून पर एक-दूसरे को ललकारा...अब हई लऽ असली चैता। झाल का जवाब... झाल से दिया। प्रसंग को प्रसंग से काटा...। ढोलक को... ढोलक की थाप से समझाया। नृत्य की सार्थकता... नृत्य से समझायी...। गीत-संगीत, प्रसंग, नृत्य और झाल कूटन की इस महफिल ने बिहार के खेतों में रबी की पकी हुई फसल और सरसों की पीली फूलों की सुंदरता का एहसास करा दिया। पेश है, चैत के विभिन्न रंगों पर भास्कर की यह रिपोर्ट।

जानिए, चैता और इसके मायने

चैता का समाजशास्त्र: विक्रम संवत् के पहले महीने में गाए जाने वाले गीत ‘चैता’ का अलग महत्व है। मधुमास के दिनों में खेतों में रबी और सरसों की बालियां खलिहानों में पहुंच गई होती है। किसान खेतों के बजाए खलिहानों में ही समय बिताते हैं। इसलिए इसका आयोजन भी खुले जगह में होता है।

चैता का धर्मशास्त्र : चैता में राम के जन्म को विस्तार से गाने की परंपरा है। जनकपुर की पुष्प वाटिका में राम-सीता मिलन, सीता स्वयंवर से लेकर राम के वनवास और राम के जीवन का वर्णन चैता के गीतों के माध्यम से किया जाता है। गीतों में मुख्य रूप से इस महीने के मौसम का वर्णन भी होता है।

... और यहां चैता का राजनीतिशास्त्र

विधायक राज सिन्हा ने दूसरी बार चैता का आयोजन किया है। इस आयोजन के पीछे उनकी राजनीति मंशा भी झलकती है। बिहार और उत्तर प्रदेश के लोगों का चैता से खास लगाव है। चैता को वे अपनी संस्कृति मानते हैं। विधायक यह बात जानते और समझते हैं।

दृश्य : दो गोला चैता का मंच सज गया है। एक तरफ हैं... ब्यास तारकेश्वर। दूसरी तरफ हैं... ब्यास राधा किशुन। बाज यंत्र बजने को तैयार हैं। नृत्यांगनाएं थिरकने को तैयार हैं।

बना दियहली हो... बना दियहली हो... बना दियहली

मइया सुंदर ललनवा बना दियहली।।

प्रसंग : प्रकृति परक : ब्यास राधा किशुन कहते हैं... ई चैत राजा महीना है। रबी की पकी फसल लहलहाती है। पतझड़ के बाद पेड़ों में नई पत्तियां आ चुकी होती है। प्रकृति खिलखिलाता है। कैसे ई गीत से समझिए...

अरे चना दीवाना बा गेंहूं के क्यारी पर। जावा जवान भईल, ईहे रे चइत में।।

प्रसंग : भक्ति परक

ब्यास राधा किशुन कहते हैं... यह मामूली माह नहीं है। यह भगवान राम का जन्म का महीना है। राम चारों भाई के साथ चैत माह में अवतार लिए थे। ब्यास इसे गीत के रूप में रखते हैं।

ए रामा... रामा जी लिहले जनमवा। बाजे ला बारहों बजनवा।।

चईत के महिनवा... ए रामा...। राम जी लिहले जनमवां।।

झूला झूले ले राम ललनवा। अहो दशरथ अंगनवा...।।

(समुद्र की लहरों की तरह संगीत की लय ऊपर-नीचे होती। ब्यास ने इस गीत से चैती मादकता बिखरे दी। नृत्यांगनाएं झूम कर नाची। भीड़ की ओर से आवाज आयी... वाह - वाह, क्या बात है। राम नाम से गगन गूंज उठा।)

राधा किशुन प्रसंग : भक्ति परक

ब्यास राधा किशुन कहते हैं... मां पार्वती की दो सहेली थी। जया और विजया। उसके कहने पर मां एक बच्चे की कल्पना करती है। मां पार्वती क्या करती हैं...यह इस गीत से जानिए।

दृश्य : अब बारी ब्यास तारकेश्वर सिंह की है। उन्होंने ताल ठोक दी। उनके गोले के बाज यंत्र बज उठे। एक दून बजी और झाल कूटन शुरू हो गया। एकबार फिर नृत्यांगनाएं थिरक उठी।

माटी के दैहिया। माटी में मिल जाई।।

ससुरा नगरिया से पाती एगो आइल।।

प्रसंग : श्रृंगार परक : ब्यास तारकेश्वर कहते हैं... चैत का महीना है। नई दुल्हन को कटनी पर जाना है। चैत का महीना और कटनी... अपने पिया से क्या कहती है। सुनिए...।

हमसे न होई कटनिया पिया

बानी अभी नया तोहर कनिया... पिया

प्रसंग : भक्ति परक

ब्यास तारकेश्वर कहते हैं कि चैत में भगवान राम का जन्म है। आइए देखते हैं कि कैसे अयोध्या में लोग राम के जन्म की खुशियां मना रहे हैं...।

ऐ रामा...अयोध्या में राम जी जनमले... हो रामा। घरे-घरे...बाजे ला अानंद बधइयां...।। ऐ रामा - घरे-घरे...।बाजे ला आनंद बधइयां।। ऐ रामा-घरे-घरे...।

तारकेश्वर प्रसंग : भक्ति परक

ब्यास तारकेश्वर ने कहा... भगवान की वंदना के साथ प्रवेश करते हैं। गणेश वंदना के बाद ब्यास संगीत को निर्गुण गीतों की ओर गए। ब्यास गाते हैं...

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Web Title: चईत में लिहले राम जी जनमवां झूला झूले ले ललनवा...ए रामा
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