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कोल डस्ट से हो रहीं जानलेवा बीमारियां, न ही प्रदूषण जांच की मुकम्मल व्यवस्था और न ही रोकथाम के हो रहे उपाय

कोयलांचल में हवा में उड़ रहे जहरीले पदार्थ लोगों को बीमार बना रहे हैं। कोलियरी क्षेत्रों में प्रदूषण का बड़ा कारण...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 01, 2018, 02:30 AM IST

कोयलांचल में हवा में उड़ रहे जहरीले पदार्थ लोगों को बीमार बना रहे हैं। कोलियरी क्षेत्रों में प्रदूषण का बड़ा कारण ओपन कास्ट से हो रही कोयला की खुदाई और खदानों से फोड़ा कोयला निकालना है। इसके कारण कोयला डस्ट सीधे हवा के संपर्क में आकर आसपास की हवा आैर पानी को प्रदूषित कर दे रहा है। ये कोल डस्ट कितनी मात्रा में आसपास के वातावरण को प्रदूषित कर रही है जो लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रहीं हैं। चिकित्सकों का कहना है कि कोलियरी क्षेत्रों में कोल डस्ट के कारण प्रदूषित हवा के कारण अस्थमा, दमा, टीवी जैसी बीमारियां लोगों में तेजी से फैल रही हैं। एक अनुमान के तहत हाल के तीन-चार वर्षों में धनबाद और आसपास के क्षेत्रों संक्रामक बीमारियों में 10 फीसदी का इजाफा हुआ है जो चिंता का विषय है।

प्रदूषण फैलने के तीन बड़े कारण

1. ओपन कास्ट से फोड़ा कोयला कर निकालना :

ओपन कास्ट और इससे फोड़ा कोयला कर निकालना बड़ा कारण माना जा रहा है। खदानों से निकलने वाले कोल डस्ट सीधे वहा के संपर्क में अाकर आसपास की हवा और पानी को प्रदूषित कर दे रहा है।

2. कोयला ढुलाई में मानक का नहीं रखा जा ध्यान : नियमानुसार हाइवा या ट्रक से जो कोयले की ढुलाई हो रही है, उसे ढंक कर ले जाना है। कोयला ढुलाई में वाहन वाले इस नियम का पालन नहीं करते हैं। इसके कारण तेज रफ्तार में चल रहे वाहनों से कोयला डस्ट उड़कर प्रदूषित कर रहा है।

3. कोयला ढुलाई के लिए अलग यातायात की व्यवस्था जरूरी : नियम के अनुसार काेयला ढुलाई के लिए अलग सड़क होना चाहिए। जिसे आम लोगों को कोई मतलब नहीं है। लेकिन धनबाद में ज्यादातर पीडब्ल्यूडी या एनएच पर कोयला की ढुलाई हो रही है। जिसका उपयोग आमलोग करते हैं।

कंपनियां सिर्फ कोयला उत्पादन करती है, पब्लिक हित में कुछ नहीं करती

गोपाल महतो, महतो बस्ती गोधर : कोल कंपनियां सिर्फ कोयला उत्पादन करती हैं, पब्लिक हित में कुछ नहीं करती हैं। सही से पानी का भी छिड़काव नहीं किया जाता है। कोल डस्ट के कारण सांस लेना दुश्वार हो गया है।

पंकज महतो, गोधर : ओपन कास्ट से ज्यादा प्रदूषण फैल रहा है। सांस लेने में दिक्कत होती है। लोगों को जानलेवा बीमारियां हो रही हैं। लेकिन, सरकार और बीसीसीएल इसके रोकथाम के लिए कुछ नहीं करती है।

अभिराम हांसदा, गाेधर : प्रदूषण के कारण सांस लेना मुश्किल हो गया है। खांसते हैं तो कोल डस्ट निकलता है। पानी ढक कर नहीं रखे तो पीना मुश्किल हो जा रहा है। लोग समय के पहले जानलेवा बीमारियों के कारण मर रहे हैं।

ज्यादातर बीमारियों का कारण प्रदूषित हवा और पानी : डॉ आरके सिंह

कोल डस्ट के कारण सांस संबंधित बीमारियां अस्थमा, सिलकोसिस, टीवी एवं लंग्स जैसी बीमारियां हो रहीं हैं। ज्यादातर रोगी इसी के आते हैं। प्रदूषित हवा के कारण पानी भी प्रदूषित हो रहा है। इसके कारण दो साल से कम उम्र के बच्चों में डायरिया बीमारी होती हैं। वहीं प्रदूषित पानी में स्नान के कारण ज्यादातर किशोर को चर्म रोग हो रहे हैं। पिछले दो-तीन सालों में इन रोगों में 10 फीसदी का बढ़ावा हुआ है।

प्रदूषण रोकथाम के क्या ये हैं 3 उपाय

1. कोयला ढुलाई में मानकाें का कड़ाई से पालन हो

कोयला ढुलाई में यातायात नियमों, वाहनों में ढक कर कोयला ले जाने की व्यवस्था आदि का कड़ाई से पालन होना चाहिए। इससे 50 फीसदी प्रदूषण की समस्या पर रोक लग सकती है।

2. कोयला उत्पादन वाले क्षेत्रों में पानी छिड़काव की व्यवस्था

काेयला उत्पाद वाले क्षेत्रों में कोयला उत्पादन करने वाली कंपनियों को पब्लिक हित में बराबर पानी का छिड़काव करनी है। हर रोज सुबह, दोपहर और शाम में पानी छिड़काव करना है। इस नियम का पालन जरूरी है।

3. जांच की समुचित व्यवस्था हो :

कोलियरी क्षेत्रों में प्रदूषण जांच के नाम पर खानापूर्ति होती है। सरकार और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड जगह-जगह जांच की व्यवस्था करे, जिससे पता चल पाए कि कितना प्रदूषण है और समय रहते इसके रोकथाम के उपाय किए जाएं।

झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद का निर्देश

झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद की 34 वीं बैठक 15 मार्च, 2018 को रांची में हुई। जिसमें बीसीसीएल क्षेत्र में प्रदूषण जांच की आॅनलाइन व्यवस्था किए जाने का निर्देश दिया गया। इसके लिए कोलियरी क्षेत्रों में तीन जगहों पर ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम लगाए जाएंगे। सिस्टम लगाने में सारा खर्च बीसीसीएल करेगी। इसका बड़ा फायदा होगा कि प्रदूषण जांच के नाम पर खानापूर्ति नहीं होगी। उन क्षेत्रों में कितनी मात्रा में प्रदूषण है ऑनलाइन देख सकते हैं। यह सिस्टम कहां लगेगी तय नहीं है, लेकिन बोर्ड की बैठक मेें गोधर, बस्ताकोला आदि ज्यादा प्रदूषित क्षेत्रों में सिस्टम लगाने पर चर्चा हुई है। बीसीसीएल के साथ बैठक में इस पर निर्णय लिया जाएगा। राजीव शर्मा, सदस्य, झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद

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