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महाशिवरात्रि की तैयारी शुरू, मंदिरों में हो रहा रंग-रोगन

गुरुवार से फाल्गुन महीना शुरू हो गया। धनबाद शहर व आसपास के क्षेत्रों में महाशिवरात्रि की तैयारी शुरू हो गई है।...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 02, 2018, 02:55 AM IST

गुरुवार से फाल्गुन महीना शुरू हो गया। धनबाद शहर व आसपास के क्षेत्रों में महाशिवरात्रि की तैयारी शुरू हो गई है। हिंदू पंचांगों में दो दिन 13 और 14 दो दिन शिवरात्रि पड़ रही है। पंडितों व ज्योतिषियों की मानें तो त्रियोदशी व चतुदर्शी के संयोग को महाशिवरात्रि मानी गई है। इस महासंयोग में भवगवान शिव की शादी हुई थी, इसलिए महाशिवरात्रि का व्रत व भगवान शिव- पार्वती की शादी 14 फरवरी को ज्यादा फलदायी मानी जाएगी।

पंडित रमेश चंद्र त्रिपाठी का कहना है कि ऋषिकेश पंचांग में 12 फरवरी की रात आठ बजकर 15 मिनट के बाद त्रियोदशी तिथि शुरू हो जाएगी जो 13 फरवरी की रात 10 बजकर 22 मिनट तक है। 13फरवरी की रात 10 बजकर 23 बजे से चतुर्दशी तिथि शुरू हो जाएगी। इसलिए दोनों तिथि को महाशिवरात्रि मनाई जा सकती है।

13 को प्रदोष के कारण 14 की शिवरात्रि ज्यादा शुभ

रमेश चंद्र त्रिपाठी का कहना है कि शास्त्रों के अनुसार फाल्गुन कृष्ण पक्ष की द्वादशी व त्रियोदशी तिथि के संयोग को प्रदोष माना गया है। त्रियोदशी होने के कारण इस दिन भी शिवरात्रि मनाई जा सकती है। लेकिन, प्रदोष के कारण भगवान शिव और मां पार्वती की शादी नहीं हो सकती है। जो लोग प्रदोष का व्रत रखना चाहते हैं वे 13 फरवरी को प्रदोष का व्रत रखें। पंडित रमेश चंद्र का कहना है कि त्रियोदशी और चतुदर्शी तिथि के महासंयोग को ही महाशिवरात्रि कही जाती है। इस महासंयोग में ही भगवान भाले नाथ की मां पार्वती की शादी हुई थी। इस आधार पर महाशिवरात्रि का व्रत व भगवान शिव व मां पार्वती विवाह 14 फरवरी को त्रियोदशी व चतुर्दशी के संयोग में शुभ माना जाएगा।

शक्ति मंदिर में 13 फरवरी को मनाई जाएगी शिवरात्रि, भगवान भोलेनाथ का होगा रुद्राभिषेक : शक्ति मंदिर प्रबंधन के अनुसार शक्ति मंदिर में 13 फरवरी को महाशिवरात्रि मनाई जाएगी। दिन में 10 बजे से पूजन कार्यक्रम शुरू हो जाएगा। इस अवसर पर भगवान भोलेनाथ का रुद्राभिषेक, शृंगार, महाआरती व पूजन कार्यक्रम किया जाएगा।

ऐसे करें भगवान भोलेनाथ का अभिषेक

पंडितों का कहना है कि महाशिवरात्रि पर भगवान भोलेनाथ के रुद्राभिषेक का विशेष महत्व है। इस अवसर पर किया गया रुद्राभिषेक रोग, दुख व कष्ट निवारण के साथ सुख-संपत्ति दायक है। रुद्राभिषेक पर सबसे पहले भगवान भोलेनाथ का चरण पखार कर अर्घ्य व आचमन के बाद भगवान को पवित्र जल से स्नान कराएं। इसके बाद दूध, दही, घी, मधु, शक्कर आदि से स्नान के बाद हल्दी आदि का लेप लगाकर स्नान कराएं। इसके बाद सुगंधित तेल, सुगंधित चंदन, इत्र आदि से स्नान के बाद भांग स्नान के बाद गंगा जल से स्नान कराना चाहिए। इसके बाद पंच पूजा के बाद अभिषेक व शृंगार करें। विभिन्न फूलों से भगवान का शृंगार करें। इसके बाद भगवान की महाआरती व भजन-कीर्तन से भगवान का सुमिरन करें। भजन-कीर्तन व संगीत भगवान भोलेनाथ को अत्यंत प्रिय है।

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