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दिल्ली और बेंगलुरु के लिए तो काेई नई ट्रेन नहीं ही मिलीं, दुरंतो भी धनबाद से छिन गई

संसद में पेश बजट में धनबाद के लोगों को एकबार फिर से छला गया। रेल बजट से धनबाद की जनता काफी उम्मीदें लगाए बैठी थी।...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 02, 2018, 02:55 AM IST

संसद में पेश बजट में धनबाद के लोगों को एकबार फिर से छला गया। रेल बजट से धनबाद की जनता काफी उम्मीदें लगाए बैठी थी। डीआरएम मनोज कृष्ण अखौरी ने भी कहा था कि लोगों की मांगों को ध्यान में रखते हुए उन्होंने नई दिल्ली, बेंगलुरु और वेल्लोर के लिए सीधी ट्रेन सेवा शुरू करने का प्रस्ताव रेलवे बोर्ड को भेजा था। डीआरएम को भी उम्मीद थी कि इस बार के बजट में कुछ-न-कुछ जरूर मिलेगा। लेकिन गुरुवार को वित्त मंत्री अरुण जेठली की ओर से पेश बजट में धनबाद के लिए किसी तरह की कोई घोषणा नहीं हुई। इससे जिले की जनता खुद को ठगा महसूस कर रही है। डीआरएम ने बंद की जा चुकीं रांची-जयनगर, हैदराबाद-रक्सौल और दरभंगा-सिकंदराबाद ट्रेनों को धनबाद से चलाने के लिए भी प्रस्ताव भेजने की जानकारी दी थी। हालांकि हुआ उल्टा। नई ट्रेन तो नहीं ही मिली, पहले से चल रही दुरंतो को भी धनबाद से छीन लिया गया। इस बारे में पूछने पर डीआरएम ने कोई प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया।

डीसी लाइन बंद होने के बाद बजट ने भी किया निराश

धनबाद | रेल बजट से यात्री निराश हैं। रेलयात्रियों को उम्मीद थी कि चंद्रपुरा लाइन बंद हो जाने के बाद इस बार धनबाद के लिए रेलवे से कुछ सौगातें मिलेंगी, जो मरहम का काम करेगी। यह उम्मीद निराशा बनकर सामने आई। हमने इस मुद्दे पर ट्रेन में सफर कर कुछ यात्रियों से बात की।

रेल बजट ने निराश किया। फ्लैसबल किराया गलत है। रेलवे में अनुकूल सफाई की व्यवस्था नहीं है। ट्रेनों की लेटलतीफी पर रेल प्रबंधन ध्यान नहीं दे रहा। बजट में धनबाद के लोगों की उपेक्षा की है, जो अच्छी बात नहीं है। आने वाला समय सरकार के लिए अच्छा नहीं है।’’ राजा पंडित, यात्री

कोई भी सरकार हम सीनियर सिटीजन के लिए अच्छा नहीं सोचती। नई दिल्ली ओर बेंगलुरु के लिए धनबाद से सीधी ट्रेन देनी चाहिए थी। सीधी ट्रेन नहीं होने से बीमारी की स्थिति में इलाज के लिए बाहर जाना मुश्किल हो जाता है। सरकार ने हमारे जैसे लोगों के साथ ठीक नहीं किया।’’ बबन सिंह, सीनियर सिटीजन यात्री

सरकार से उम्मीद थी कि धनबाद के लोगों के लिए कुछ घोषणा होगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। धनबाद चन्द्रपुरा रेललाइन को बंद कर रेलवे ने पहले ही धनबाद के लोगों के साथ अन्याय किया है। बजट में वैकल्पिक रूट चालू करने की घोषणा नहीं करना गलत है।’’ रजनीकांत पांडेय, रेलयात्री

सरकार को प्लेटफाॅर्म टिकट की दर और पेनल्टी में कमी करनी चाहिए थी। मांगों की उपेक्षा की गई है। यात्री सुरक्षा में सुधार पर घोषणा नहीं की गई। लम्बी दूरी के ट्रेनों में आधुनिक स्लीपर कोच लगाने, मध्यम वर्ग के लोगों पर ध्यान देने की जरूरत थी, जो नहीं हुआ।’’ अमन गौरव, रेलयात्री

धनबाद-चंद्रपुरा रेललाइन बंद कर उस पर चलने वाली दो दर्जन से अधिक ट्रेनों को बंद कर दिया गया। इतना ही नहीं, नई ट्रेन देने के पहले ही दूरंतो जैसी लक्जरी ट्रेन छीन ली। सरकार को धनबाद के लोगों की उपेक्षा कही से भी उचित नहीं है।’’ परेश प्रमाणिक, रेल यात्री

धनबाद रेल मंडल राजस्व देने में तीसरे स्थान पर है। बावजूद इसके धनबाद की मांगों पर काई ध्यान नहीं देना समझ से परे है। यात्री सुविधा के नाम पर लॉलीपॉप दिखाकर भ्रमित किया गया है। राजधानी छोड़कर अधिकतर ट्रेनों की बोगियो में चूहे घूमते हैं।’’ नरेन्द्र कुमार, रेलयात्री

धनबाद में 200 कुली थे। काम नहीं मिलने के कारण अधिकांश कुली पलायन कर गये। अब मात्र 80 बचे हैं। ट्राली बैग के कारण भी रोजगार में कमी आयी है। बजट से उम्मीद थी कि सरकार कुली को ग्रुप डी की नौकरी देने की फिर से घोषणा करती, लेकिन ऐसा नहीं कर कुलियों की उम्मीदों पर पानी फेरने का काम किया।’’ अर्जुन यादव, कुली संघ के नेता

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