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35 साल बाद अद्‌भुत चंद्रग्रहण; रोशनी ऐसी मानो डीजीएमएस के प्रांगण में उतर आया

कभी सफेद चमकीला, कभी लाल तो कभी ब्लू...। साल के पहले चंद्रग्रहण का धनबाद में अद्भुत नजारा दिखा। एशिया में 35 सालों बाद...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 01, 2018, 01:15 PM IST

कभी सफेद चमकीला, कभी लाल तो कभी ब्लू...। साल के पहले चंद्रग्रहण का धनबाद में अद्भुत नजारा दिखा। एशिया में 35 सालों बाद पूर्ण चंद्रग्रहण का संयोग बना। इस नजारे को देखने के लिए शहर के लोग घरों से बाहर निकल आए। सड़क, मैदान, घर-अपार्टमेंट की छतों पर लोग चंद्र के दीदार के लिए घंटों खड़े रहे। वैज्ञानिकों के मुताबिक, ग्रहण के प्रभाव से चंद्रमा का आकार 14 प्रतिशत बड़ा था। चंद्रमा का रंग कभी ब्लू तो कभी रेडिश हुआ। चांद के बदलते रूपों को देखने के लिए सभी की नजरें आसमान पर टिकी रही। कई लोग ग्रहण से जुड़ी मान्यताओं के कारण डरे-डरे नजर आए। वही, कई लोग ऐसे भी मिले... जिन्हें ग्रहण के प्रभाव से अधिक जगमगा (30 प्रतिशत अधिक चंद्र रोशनी) रही बुधवार की रात हसीन लगी। चंद्रग्रहण काल तक कई हिन्दू घरों में खाना नहीं बनाए गए। रात 8:42 बजे जब ग्रहण समाप्त हुआ तो कई लोगों ने स्नान कर स्वयं को पवित्र किया। ग्रहण के कारण मंदिरों में पूजा-पाठ की दिनचर्या प्रभावित हुई। शक्तिमंदिर सहित शहर के सभी प्रमुख मंदिरों के पट दिनभर बंद रहे। मंदिरों में न शाम की पूजा हुई और न ही भगवान के दर्शन हुए। पंडित, वैज्ञानिक और आम लोगों ने अपने-अपने हिसाब से इस चंद्रग्रहण का आकलन किया।

शाम5:18 से रात8:42 ऐसा दिखा चांद..

आकाश पर दिखने वाला यह पूर्ण चंद्रग्रहण खास था। चंद्रमा का आकार 14% बड़ा था। वहीं उसकी रोशनी 30% अिधक थी। आम दिनों से अिधक रोशनी ने अद्‌भुत नजारा बनाया। डीजीएमएस परिसर चांद की रोशनी में चमक उठा। इसकी सुंदरता देखते ही बन रही थी। लोगों ने इस नजारे को अपने मोबाइल के कैमरे में कैद किया। फोटो : मुकेश श्रीवास्तव

धनबाद में दिखा चंद्रग्रहण का पल-पल बदलता रूप, कोई ग्रहण से डरा, तो किसी को रात लगी ‘हसीन’

विज्ञान की नजर में चंद्रग्रहण से जुड़ी तीन महत्वपूर्ण बातें...

1. सुपर मून क्या होता है : चंद्रमा का अपने सामान्य आकार से ज्यादा बड़ा दिखाई देना सुपर मून कहलाता है। इस दौरान चंद्रमा पृथ्वी के नजदीक होता है। सुपर मून का आकार सामान्य से 10 - 14 फीसदी बड़ा होता है। यह 30% ज्यादा चमकदार भी दिखाई देता है।

2. ब्लू मून क्या होता है : ब्लू का मतलब चांद के ब्लू कलर से नहीं है। दरअसल, एक महीने में जब दो पूर्णिमा पड़ती हैं तो इस स्थिति को ब्लू मून कहते हैं। इस बार 2 जनवरी को पूर्णिमा थी और दूसरी 31 जनवरी को। नासा के मुताबिक, ब्लू मून हर ढाई साल में एक बार नजर आता है।

3. ब्लड मून क्या होता है : सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा जब एक सीध में होंगे तो यह पूर्ण चंद्रग्रहण होगा। हालांकि, इस दौरान सूर्य की कुछ किरणें पृथ्वी के एटमॉस्फियर से होकर चंद्रमा पर पड़ती हैं। इस दौरान वह हल्का भूरे और लाल रंग में चमकता है। कुछ लोग इसे ब्लड मून भी कहते हैं।

(आईएसएम के प्रोफेसर बदम सिंह कुशवाहा से बातचीत पर आधारित)

चमकीला अर्द्ध चंद्र

चंद्रग्रहण शाम 5:18 बजे लगा। चंद्रग्रहण का पहला रूप शाम 6:07 बजे दिखा। चंद्र अर्द्ध और चमकीला था।

चंद्रग्रहण ने बदली मंदिरों से घराें तक की दिनचर्या

मंदिरों के पट बंद : धनबाद में सुबह की पूजा-अर्चना के बाद कुछेक मंदिरों को छोड़ बाकी सभी मंदिरों के पट बंद हो गए। शक्ति मंदिर में सुबह 8.30 बजे मां शक्ति की पूजा-अर्चना और भोग लगाने के बाद मंदिर के पट बंद हो गए। मंदिर कमेटी के अनुसार गुरुवार की सुबह सवा पांच बजे मंदिर में स्थापित देवी-देवताओं को पवित्र करने के बाद पूजा-अर्चना होगी। वहीं, खडेश्वरी मंदिर का पट दिन में 10 बजे के बाद बंद कर दिया गया।

6:07 बजे

खून की रंगत दिखी

चंद्रग्रहण का रूप बदल गया है। मून ने ब्लड मून का रूप ले लिया है। हल्का भूरे और लाल रंग का चांद अद्भुत दिखा।

घरों में नहीं बने भोजन : ग्रहण अवधि में भोजन नहीं बनाने और भोजन नहीं करने की मान्यता है। इसके कारण हिंदू घरों में ग्रहण अवधि तक किचन में चूल्हे नहीं जले। किसी ने खाना भी नहीं खाया। ग्रहण समाप्ति के बाद गृहणियां पवित्र होकर भोजन बनाईं।

चौपाटियों में सन्नाटा : चंद्रग्रहण के कारण चौपाटियों पर भीड़-भाड़ का नजारा नहीं दिखा। जैसे-जैसे चंद्रग्रहण का समय नजदीक आता गया, चौपाटियों में भीड़ छटने लगी। शाम 5.18 बजे के बाद जैसे ही चंद्रग्रहण का स्पर्श हुआ, चौपाटियों पर सन्नाटा पसर गया।

6:45 बजे

धुंधला हुआ चांद

चंद्रग्रहण का चांद का रंग लाल से बदल कर धुंधला हो गया। ग्रहण का पूरा प्रभाव दिखने लगा। चंद्रमा आंशिक दर्शक हुआ।

धर्म की नजर में चंद्रग्रहण : क्यों मंदिरों के पट हो जाते हैं बंद?

समुद्र मंथन के बाद अमृत निकला तो भगवान विष्णु मोहनी रूप धारन कर अमृत को ले लिए। मोहनी रूप में भगवान विष्णु अमृत को बांटने लगे। इसी बीच राहु को लगा कि कहीं देवता छलकर सिर्फ अमृत को अपने ही बीच न बांट लें। राहु रूप बदलकर चंद्रमा और सूर्य के बीच जाकर बैठ गए। मोहनी रूपी विष्णु ने राहु को जैसे ही अमृत दिए, चंद्रमा ने कहा कि प्रभु यह राहु है। तब भगवान विष्णु ने सूर्य से पूछा कि क्या सही में यह राहु है तो उन्होंने ने एकबार हां में सिर हिलाया। पर चंद्रमा बार-बार कहते रहे कि यह राहु है। इसके बाद विष्णु ने चक्र सुदर्शन से राहु का सिर धड़ से अलग कर दिया। लेकिन अमृत पी लेने के कारण सिर राहु का और धड़ केतु का हो गया। चंद्रमा के द्वारा राहु की पहचान उजागर करने के कारण ही चंद्रग्रहण बार-बार लगता है और सूर्य ग्रहण कम लगता है। ऐसी मान्यता है कि ग्रहण काल में सूर्य व चंद्रमा को आसुरी शक्तियां परेशान करती हैं। चंद्रमा और सूर्य की रक्षा करने देव लोक के सारे देवतागण उनके पास चले जाते हैं। इसके कारण सूतक काल में मंदिरों के पट बंद कर दिए जाते हैं।

(पंडित रमेश चंद्र त्रिपाठी से बातचीत पर आधारित)

7:30 बजे

सुपर चमकीला मून

चंद्रग्रहण समाप्त हो चुका है। आसमान में सुपर मून दिख रहा है। वह चमकीला है। उसमें अधिक रोशनी प्रतीत हो रही है।

8:42 बजे

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