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धनबाद: हाथ जोड़ते रहे परिजन, न डॉक्टर आए और न ही नर्स, ऑटो में ही बच्ची का हो गया जन्म

अनिल और परिजन डॉक्टरों और नर्सों के हाथ जोड़ते रहे लेकिन कोई भी ऑटो तक नहीं आया।

Dainikbhaskar.com | Last Modified - Jul 12, 2018, 10:40 AM IST

धनबाद: हाथ जोड़ते रहे परिजन, न डॉक्टर आए और न ही नर्स, ऑटो में ही बच्ची का हो गया जन्म

धनबाद. जोड़ाफाटक की रहने वाले अनिल कुमार ने पत्नी रिंकी देवी को बुधवार को प्रसव पीड़ा के बाद पीएमसीएच के गायनी इमरजेंसी वार्ड पहुंचे। यहां वे पत्नी को ऑटो से लेकर पहुंचे थे। प्रसव पीड़ा से पत्नी ऑटो में कराह रही थी। उधर, अनिल और परिजन डॉक्टरों और नर्सों के हाथ जोड़ते रहे लेकिन कोई भी ऑटो तक नहीं आया। उधर, दर्द से तड़प रही रिंकी देवी ने ऑटो में ही बच्ची को जन्म दिया।

क्या हुआ? समय पर भर्ती नहीं लिया
जोड़ाफाटक निवासी अनिल की पत्नी रिंकी देवी को प्रसव पीड़ा शुरू हुआ। अनिल उसे लेकर ऑटो से शाम 4:05 बजे पीएमसीएच गायनी इमरजेंसी वार्ड पहुंचे। दर्द बढ़ने पर परिजन मदद मांगने के लिए वार्ड के अंदर गए। एक घंटा बीत गया, पर न डॉक्टर आएं और न ही नर्स। रिंकी ने ऑटो में ही बच्चे को जन्म दे दिया।

क्यों हुआ? अनसुनी कर दी चीख
लापरवाही...। जी हां, यहां पीएमसीएच की लापरवाही साफ दिखी। एक घंटे तक गर्भवती की चीख को डॉक्टरों ने नजरअंदाज किया। परिजनों के बार-बार आग्रह करने पर भी रिंकी को भर्ती करने की दिलचस्पी नहीं दिखायी। जिसके कारण ऑटो में ही प्रसव हो गया।

ऑटो के अंदर... तड़पती रही रिंकी
प्रसव पीड़ा बढ़ती जा रही थी। ऑटो में बैठकर आयी रिंकी सीट पर दर्द से चीख रही थी। परिवार की महिलाएं उसे हिम्मत बढ़ा रही थी। वह चीख कर बार बार एक ही बात कहती - ' इस दर्द से मर जाऊंगी। डॉक्टर को बुला कर लाइए। मुझे बचा लीजिए... यह दर्द सही नहीं जा रही।'

वार्ड के अंदर... व्यस्त रहे डॉक्टर
परिजन से दर्द देखा नहीं जा रहा था। वे बार-बार दौड़ कर वार्ड के अंदर जाते। वार्ड के अंदर डॉक्टर मौजूद थे। पर वे अन्य मरीजों को देख रहे थे। नर्स भी स्वयं को व्यस्त बता रही थी। परिजनों की बातों को उन्होंने गंभीरता से नहीं लिया। मैं क्यों जाऊं, वह जाएगा... यही सोचते रहे।

...और जन्म के बाद आईं 2 नर्स
एक घंटे से प्रसव पीड़ा में तड़प रही रिंकी ने अंतत: ऑटो में ही बच्ची को जन्म दे दिया। ऑटो में प्रसव देख परिजन आक्रोशित हो उठे। उन्होंने वार्ड के अंदर घुसकर हंगामा शुरू कर दिया। हंगामा बढ़ता देख वार्ड से दो नर्सें बाहर निकली। जच्चा व बच्चा को साथ ले गई।

और पलभर के लिए बढ़ गईं धड़कनें
ऑटो के अंदर ही बच्ची का जन्म हो रहा था। परिवार की महिलाएं ऑटो को ढक कर एक महिला की लज्जा को बचाने में लगी थी। एक पल ऐसा आया, जब बच्चे की सांसें तेज हो गई। यह देख परिवार की महिलाएं चीख पड़ीं। परिवार वालों की धड़कनें बढ़ गई।

प्रभारी एचओडी बोली... इसकी शिकायत करुंगी
गायनी विभाग की प्रभारी एचओडी सविता शुक्ला दास ने कहा कि इमरजेंसी वार्ड में अन्य मरीज भी रहते हैं। उन्हें छोड़कर डॉक्टर नहीं जा सकते। गार्ड या अन्य कर्मियों को इसे लेकर गंभीरता दिखानी चाहिए थी। वैसे, यह मामला गंभीर है। अस्पताल अधीक्षक से इसकी शिकायत की जाएगी।

सबसे बड़ी हैरानी
ममता वाहन की सुविधा रहते हुए प्रसूता ऑटो से अस्पताल पहुंची थी। जरूरत पड़ने पर इस परिवार को ममता वाहन की सुविधा नहीं मिली। अनिल ने बताया कि सहिया कहां रहती है, पता नहीं। मरीज के लिए ममता वाहन है, इसकी जानकारी भी नहीं है।

पति की जुबानी पूरी कहानी: हमने बार-बार आग्रह किया, लेकिन कोई भी वार्ड से निकल कर झांकने नहीं आया
मेरा नाम अनिल कुमार है। मैं जोड़ाफाटक में रहता हूं। पत्नी के गर्भ में जब बच्चा ठहरा तो उसे पीएमसीएच ले आएं। हर माह पीएमसीएच में चेक कराने आते। डॉक्टरों ने 28 जुलाई तक प्रसव का डेट दिया था। बुधवार को अचानक दर्द शुरू हो गया। शाम 4:05 बजे पत्नी को ऑटो से लेकर पीएमसीएच पहुंचा। यहां आने के बाद कर्मचारियों को सूचना दी। तेज दर्द होने की बात बताई। लेकिन किसी ने मेरी बात नहीं सुनी। पत्नी को वार्ड तक ले जाने के लिए स्ट्रेचर तक नहीं दिया। धीरे-धीरे दर्द बढ़ता गया। पत्नी दर्द से जोर-जोर से चीखने लगी। उसका दर्द देख मैं एक घंटे में 11 बार वार्ड के अंदर गया। हर बार हाथ जोड़े। आग्रह किया कि चल कर एकबार देख लें। उसे भर्ती कर लें। मेरे बार-बार आग्रह करने के बावजूद कोई वार्ड से बाहर नहीं निकला। मेरी पत्नी की चीखें अनसुनी हो गई। मैं विवश बना रहा। अंतत: पत्नी ने ऑटो में ही बच्ची को जन्म दे दिया। जन्म के बाद भी यहां की व्यवस्था में कोई अंतर नहीं आया। हमारे द्वारा हंगामा मचाने पर जन्म के 5 मिनट बाद दो नर्स वार्ड से बाहर आयी। उन्होंने बच्ची का गर्भनाल काटा और वार्ड ले आयी। मैं बस यही कहूंगा कि मेरी किस्मत अच्छी थी, जो जच्चा और बच्चा दोनों बच गए।

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