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खुलासा / स्टेनो के पास मिले 14.65 लाख रुपए, कालाधन खपाने के सबूत भी मिले



पुलिस हिरासत में स्टेनो मुकेश कुमार। पुलिस हिरासत में स्टेनो मुकेश कुमार।
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पुलिस हिरासत में स्टेनो मुकेश कुमार।पुलिस हिरासत में स्टेनो मुकेश कुमार।

  • बोकारो डीसी के गोपनीय कार्यालय से एसीबी की टीम ने किया था गिरफ्तार 

Dainik Bhaskar

Dec 08, 2018, 12:40 PM IST

रांची. बोकारो उपायुक्त मृत्युंजय कुमार बर्णवाल के सहायक (स्टेनोग्राफर, गोपनीय शाखा में पदस्थापित) मुकेश कुमार के घर से एसीबी को 4.65 लाख रुपए मिले हैं। इसके अलावा पांच बैंक खाते भी मिले, जिनमें 10 लाख रुपए जमा हैं। एसीबी को कई महत्वपूर्ण दस्तावेज भी मिले हैं, जिससे फ्लैट और कई जगहों पर कालाधन खपाने का पता चला है। एसीबी ने मुकेश कुमार को गुरुवार को ट्रांसपोर्टर से 71 हजार रुपए घूस लेते गिरफ्तार किया था। पूछताछ के बाद एसीबी ने उसके घर पर छापेमारी की, जिसमें अकूत संपत्ति अर्जित करने के सबूत मिले। 

अनुकंपा के आधार पर कंप्यूटर ऑपरेटर पद पर हुआ था बहाल

  1. मुकेश अनुकंपा के आधार पर कंप्यूटर ऑपरेटर पद पर बहाल हुआ। डीसी के गोपनीय शाखा में पदस्थापित होने के बाद वह अफसरों का करीबी बन गया। बोकारो समाहरणालय में उसने अच्छी पैठ बना ली। बोकारो डीसी के सहायक के साथ-साथ सप्लाई विभाग में बड़ा बाबू के पद का काम भी अपने जिम्मे ले लिया। एसीबी यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि मुकेश के द्वारा ली गई घूस की रकम उसके खुद के थे अथवा अन्य किसी अधिकारियों का भी इसमें हिस्सा था। इस संबंध में भी एसीबी मुकेश से पूछताछ कर रही है। एसीबी के एडीजी मुरारी लाल मीणा ने भी मुकेश के आवास से रुपए बरामद होने की पुष्टि करते हुए कहा कि अभी जांच की जा रही है। जांच के बाद ही इस मामले में कुछ कहा जा सकता है। 

  2. रंगेहाथों एसीबी ने किया था गिरफ्तार

    आपूर्ति विभाग के ट्रांसपोर्टर को उसके बिल के भुगतान करने के लिए घूस मांगे थे। 12 लाख रुपए बिल का भुगतान कराने के लिए शिकायतकर्ता ट्रांसपोर्टर स्नेह लता साहू के पति कमल कुमार ने 71 हजार रुपए घूस की राशि दे रहे थे, तभी एसीबी ने रंगे हाथ गिरफ्तार किया था।

  3. पहुंच के बल पर पाया अधिकारी स्तर का आवास

    मुकेश कुमार सेक्टर वन सी की आवास संख्या 197 में रहता है। यह आवास अमूमन अधिकारियों के लिए आवंटित होता है। मुकेश ने अपनी पहुंच के बल पर यह आवास अपने नाम आवंटित करवा लिया। यह आवास डीसी पूल का है।  जो कि जिले के अधिकारियों के लिए बीएसएल की ओर से दी गई है। इस आवास में पहले जिला शिक्षा पदाधिकारी रहते थे। उसके बाद चास की अंचलाधिकारी वंदना सेजवलकर रहती थीं। अंचलाधिकारी ने जब अपना आवास बदला तो मुकेश ने उसे अपने नाम आवंटित करा लिया।

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