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दाेनाें हाथाें से दिव्यांग थे... स्कूल जाते तो लोग हंसते, दूसरे बच्चे साथ नहीं बैठना चाहते, ताने सहकर पढ़ाई पूरी की, अब दूसरों को पढ़ा रहे

Dhanbad News - हाथ नहीं थे...। पैराें से जमीन पर लकीरें बनाकर लिखना सीखा। गायडेहरा गाेविंदपुर के अकबर अंसारी ने जमीन पर लकीर बनाकर...

Jan 20, 2020, 06:41 AM IST
Dhanbad News - both were handicapped people go to school laughing do not want to sit with other children taunted them and completed studies now teaching others
हाथ नहीं थे...। पैराें से जमीन पर लकीरें बनाकर लिखना सीखा। गायडेहरा गाेविंदपुर के अकबर अंसारी ने जमीन पर लकीर बनाकर पढ़ना -लिखना सीखा। अकबर कहते हैं कि एक दिन दादाजी स्व. इस्माइल अंसारी ने उन्हें जमीन पर लकीर बनाते देख लिया। दूसरे दिन दादा स्लेट लेते अाए। पैराें में पेंसिल पकड़ाई अाैर काेशिश करने काे कहा। उन्हाेंने ही मुझे पैराें से लिखने का हाैसला दिया। अकबर ने कहा कि इसी हौसले की बदौलत दोनों हाथों से दिव्यांग होते हुए भी उन्होंने पढ़ने का निर्णय लिया। अकबर कहते हैं कि उनके लिए स्कूलिंग इतनी अासान नहीं थी। कभी काेई मजाक बनाता ताे कभी काेई दुत्कार देता। ताने भी खूब सुना, लेकिन हार नहीं माना। हर सुबह नई ऊर्जा के साथ अागे बढ़ता गया। सरकारी स्कूल-काॅलेजाें में पढ़ाई की। 10वीं तृतीय श्रेणी अाैर 12वीं अाैर स्नातक द्वितीय श्रेणी से सफल हुए। साल 2005 में उर्दू प्राथमिक विद्यालय गायडेहरा में पारा शिक्षक बने। अकबर 14 सालाें से बच्चाें काे पढ़ा रहे हैं। स्कूल ड्यूटी के बाद घर पर 9वीं कक्षा तक के बच्चाें काे ट्यूशन भी देते हैं। ब्लैकबाेर्ड पर लिखना या मिटाना ही नहीं, हर काम वे पैराें से कर लेते हैं। पिता एनुल हक अंसारी दर्जी अाैर मां जुवैदा खातून गृहिणी हैं, जिन्हाेंने कभी टूटने नहीं दिया। अकबर की पढ़ने अौर पढ़ाने की ललक लोगों को प्रभावित करती है।

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अकबर ने पैरों से जमीन पर लकीरें बनाकर पढ़ाई शुरू की

बसंती पैराें से पढ़ाकर परिवार चला रही हैं



बसंती कुमारी 2005 से उत्क्रमित मध्य िवद्यालय राेड़ाबांध में पारा शिक्षिका हैं। जन्म से दाेनाें हाथाें दिव्यांग हैं। बताती हैं कि घर पर जहां भी बैठती थी, पैराें से लकीरे खींचती थी, कुछ न कुछ बनाने या लिखने की काेशिश करती रहती थी। फिर स्कूल जाने की जिद ठान ली। स्कूल में दाखिला लिया। पढ़ाई काेई स्पेशल स्कूल में नहीं, बल्कि सामान्य स्कूल में ही सामान्य बच्चाें के साथ की। 10वीं तृतीय श्रेणी अाैर 12वीं प्रथम श्रेणी से सफल रही। समाजशास्त्र में स्नातक किया। 5 बहनाें में बसंती सबसे बड़ी हैं। 3 की शादी हाे चुकी है अाैर सबसे छाेटी बहन की जिम्मेवारी बची है। बसंती बताती हैं कि सभी यही साेचते थे कि यह क्या कर सकेगी... लेकिन मुझे फर्क नहीं पड़ता था। मां प्रभावती देवी का पिछले साल देहांत हाे गया। पिता माधाे सिंह साल 2008 में चल बसे थे। अब वाे अपनी बहन के साथ किराये के मकान में रहती हैं।

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