शिक्षक नियुक्ति घाेटाले में सीएम का री-ट्वीट, कार्रवाई का अादेश
जिले में वर्ष 2015-16 में हुई शिक्षक नियुक्ति में गड़बड़ी व नियमाें की अनदेखी के मामले में सीएम हेमंत साेरेन के री-ट्वीट के बाद रविवार काे शिक्षा मंत्री जगरनाथ महताे ने भी री-ट्वीट किया। ट्वीटर पर उन्हाेंने बताया कि मामले में विभागीय अधिकारियाें काे जांच करने व दाेषी पर कठाेर कार्रवाई का अादेश दिया गया है। इससे पहले अपने ट्वीटर हैंडर पर री-ट्वीट करते हुए सीएम ने शिक्षा मंत्री काे कार्रवाई का निर्देश दिया था। मामले की शिकायत अंकित अानंद नाम के एक व्यक्ति ने शुक्रवार काे सीएम काे ट्वीट कर की थी। ट्वीटर पर उन्हाेंने लिखा था कि जांच में दाेषी साबित हाेने के बावजूद पिछले दाे वर्षाें से अब तक झारखंड शिक्षा सेवा वर्ग के अधिकारी बांके बिहारी सिंह का निलंबन नहीं हाेना विभागीय सेटिंग की अाेर इशारा कर रहा है। अंकित ने अपने ट्वीट में झारखंड सीएमअाे, एजुकेशन झारखंड व एचअारडी मिनिस्ट्री काे भी टैग किया था। मामले में संज्ञान लेते हुए कार्रवाई का अाग्रह किया था। इसके बाद सीएम ने शिक्षा मंत्री काे टैग करते हुए री-ट्वीट किया कि कृपया मामले में संज्ञान लें। फर्जी कागजात व गलत तरीके से शिक्षकाें की नियुक्ति का अाराेप झारखंड राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ के नीलकंठ मंडल ने लगाया था। पूरे मामले की जांच की जिम्मेवारी तत्कालीन विभागीय संयुक्त सचिव की अध्यक्षता में बनी तीन सदस्यी कमेटी काे दी गर्इ थी। कमेटी ने छह अाराेपाें की जांच की थी, जिसमें पांच अाराेप सही पाए थे। कमेटी में तत्कालीन अारडीडीई व तत्कालीन धनबाद डीईअाे शामिल थीं।
156 शिक्षकाें की नियुक्ति में अनदेखी का अाराेप
नियमाें की अनदेखी कर नियुक्ति कर 156 शिक्षकाें की नियुक्ति का अाराेप था। टेट व शैक्षणिक प्रमाणपत्राें की जांच के बाद अाराेप सही मिले थे अाैर शिक्षकाें काे बर्खास्त कर दिया गया था। सभी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गर्इ। मामले में शिक्षक नेता नीलकंठ मंडल ने तत्कालीन डीएसई पर मिलीभगत का अाराेप लगाते हुए जांच की मांग की थी। अपनी शिकायत में उन्हाेंने कहा था कि नर्सरी के प्रमाणपत्र पर बहाली हुई। जब काउंसिलिंग के समय ही फर्जी प्रमाणपत्र का पता चला ताे प्राथमिकी क्याें नहीं की गई। वास्तविक अभ्यर्थी का नाम हटा कर दूसरे का नाम जाेड़ा गया। इंटर में 40% से कम अंक के बावजूद नियुक्ति हुई।