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डरें नहीं, समाधान केविकल्प तैयार रखें

एक वर्ष पहले
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मैनेजमेंट फंडा एन. रघुरामन की आवाज में मोबाइल पर सुनने के लिए9190000071 पर मिस्ड कॉल करें

फंडा यह है कि  बेवजह ज्यादा घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन समस्या बढ़ने की आशंका को देखते हुए वैकल्पिक व्यवस्थाओं के रूप में प्लान बी या प्लान सी तैयार रखने में भी कोई बुराई नहीं है।

भारत की पहली कोरोनावायरस की मरीज, त्रिस्सूर की रहने वाली लड़की अब भी उस कठिन परीक्षा को भूली नहीं है, जो जनवरी में शुरू हुई थी। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वह अपनी पढ़ाई को नजरअंदाज कर रही है। वास्तव में वह सुबह और भी जल्दी उठती है, ताकि कॉमन ग्लोबल टाइम के मुताबिक दिन शुरू कर सके। आजकल वह हफ्ते के पांच दिन सुबह 5.30 बजे से अपनी कक्षाओं में व्यस्त रहती है। यह 20 वर्षीय मेडिकल स्टूडेंट ऑनलाइन अपने चीनी शिक्षक से संपर्क करती है। दुनियाभर से उसके सहपाठी भी उसके साथ जुड़कर, सेमेस्टर कोर्स की पढ़ाई मिलजुलकर कर रहे हैं।

कोरोनावायरस फैलने की शुरुआत चीन के वुहान में हुई थी। इसी शहर में उसका मेडिकल कॉलेज कैंपस है, जिसे वायरस के खौफ के चलते उसके जाने के कुछ ही घंटों बाद बंद कर दिया गया था। यह डर इतना ज्यादा और इतनी दूर तक फैल गया है कि पुणे का एक सीबीएसई स्कूल वर्चुअल क्लासरूम की तैयारी कर रहा है। हर कोई चाहता है कि स्थिति खराब न हो, लेकिन अगर होती है तो स्कूल माता-पिता को वाट्सएप पर वीडियोज भेजेगा। और पैरेंट्स ने इस कदम का स्वागत किया है।

अभी शायद ज्यादा घबराने की स्थिति नहीं आई है। लेकिन देशभर में स्कूल धीरे-धीरे कोरोनावायरस को लेकर तैयारी कर रहे हैं। कई स्कूलों ने साफ-सफाई से जुड़े नियम जारी कर दिए हैं और सुबह की असेंबली बंद कर दी है। पुणे में स्कूलों की एक शृंखला, सीबीएसई से संबंद्ध आर्यन्स वर्ल्ड स्कूल है, जिसकी शहर में नौ शाखाएं हैं। अगर कोरोना की वजह से स्थितियां और खराब होती हैं, तो इसके लिए स्कूल वर्चुअल क्लासरूम तैयार कर रहा है।

कुछ स्कूलों ने बच्चों से एन-95 मास्क पहनने और अपने साथ एल्कोहल बेस्ड सैनिटाइजर रखने को कहा है। कुछ स्कूलों ने स्टाफ को प्रशिक्षित कर फ्लू के लक्षण वाले बच्चों की पहचान करने का काम दिया है। ज्यादातर स्कूल प्रशासन यह समझ रहे हैं कि कोई भी भीड़ वाला समारोह आयोजित करने से बचना है।

लेकिन आर्यन्स स्कूल शृंखला इससे एक कदम आगे है। उन्होंने इस महामारी को देखते हुए प्राइमरी सेक्शन की परीक्षाओं को मार्च में करवाने का फैसला लिया है, जो आमतौर पर अप्रैल में होती हैं। उन्होंने शैक्षणिक सत्र खत्म होने के बाद मिलने वाला ब्रेक भी रद्द कर अगले शैक्षणिक सत्र के लिए 16 मार्च से ही कक्षाएं शुरू करने का फैसला लिया है। वे ऐसा इसलिए कर रहे हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि वायरस का संकट और बड़ा होने की आशंका के चलते अप्रैल में स्कूल बंद रखने पड़ सकते हैं। ये सारे परिवर्तन इस बात को सुनिश्चित करने के लिए हैं कि स्कूल को शैक्षणिक प्रतिबद्धता से समझौता न करना पड़े।

अगर कोरोनावायरस के खतरे की वजह से स्कूल के दिनों को और ज्यादा कम करना पड़ा, तो स्कूल प्रबंधन लॉन्ग-डिस्टेंस एजुकेशन की संभावना पर भी गंभीरता से विचार कर रहा है। इस स्थिति में स्कूल वीडियो स्ट्रीम करने या शिक्षकों द्वारा उनके सिलेबस की वर्चुअल क्लासेस पैरेंट्स को वाट्सएप के जरिए भेजने के लिए पूरी तरह तैयार है। उनका उद्देश्य है कि वायरस की वजह से छात्रों की पढ़ाई न छूटे। शिक्षक भी सहमत हैं कि यह पहले से ही मौजूद स्मार्ट क्लासरूम्स को विस्तार देने का काम है। वे उनके स्मार्ट क्लासरूम्स की लिंक पैरेंट्स के साथ साझा करेंगे, जिससे छात्रों को मदद मिलेगी। इसके साथ शिक्षक मार्च में ज्यादा से ज्यादा वीकेंड्स पर काम कर रहे हैं, ताकि वह सिलेबस पूरा हो सके, जिसे गर्मी की छुट्टियों से पहले पूरा करना जरूरी होता है।

स्मार्ट क्लासरूम्स के अलावा जहां पहले से ही हर क्लास के लिए मॉड्यूल्स उपलब्ध हैं, आर्यन्स स्कूल सेकेंडरी क्लासेस को ध्यान में रखते हुए छोटे-छोटे वीडियोज भी बनाएगा, ताकि छात्रों के पास अपने पाठ दोहराने के लिए भी सामग्री उपलब्ध हो सके। माता-पिता स्कूल द्वारा उठाए जा रहे इन एहतियाती कदमों की सराहना कर रहे हैं। छात्र क्लास में जाएं, इसकी बजाय क्लास बच्चों के घर पर आ जाए, यह सुनिश्चित करने के लिए स्कूल द्वारा तकनीक में किए जा रहे निवेश की भी सराहना की जा रही है।

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एन. रघुरामन

मैनेजमेंट गुरु

raghu@dbcorp.in
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