विवाहिताओं को अखंड साैभाग्य का अाशीर्वाद देती हैं गणगाैर माता

Dhanbad News - अखंड साैभाग्य की कामना के साथ महिलाएं शुक्रवार काे गणगाैर पूजन करेंगी। देश के विभिन्न हिस्साें में, खासकर...

Mar 27, 2020, 06:36 AM IST
Dhanbad News - goddess blesses unmarried good luck to married women

अखंड साैभाग्य की कामना के साथ महिलाएं शुक्रवार काे गणगाैर पूजन करेंगी। देश के विभिन्न हिस्साें में, खासकर मारवाड़ी परिवाराें में यह त्याेहार काफी धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं व्रत रखती हैं। वे मिट्टी से गाैर बनाती हैं अाैर उनका शृंगार करती हैं। खुद भी साेलह शृंगार कर सजती-संवरती हैं। विवाहिताएं अपने पति की लंबी अायु अाैर कुंवारी कन्याएं मनपसंद वर पाने की कामना के साथ यह व्रत करती हैं।

गणगौर का पर्व 16 दिनाें का हाेता है। यह चैत्र कृष्ण पक्ष की तृतीय से शुरू हाेता है अाैर शुक्ल पक्ष की तृतीया काे संपन्न हाेता है। यह बार 27 मार्च शुक्रवार को शुक्ल पक्ष की तृतीया पड़ रही है। 16 दिनाें तक महिलाएं सुबह जल्दी उठ कर बागीचे में जाती हैं, दूब अाैर फूल चुनकर लाती हैं। दूब लेकर घर आती हैं अाैर उस दूब से दूध के छींटे मिट्टी की बनी हुई गणगौर माता को देती हैं। वे चैत्र शुक्ल द्वितीया के दिन किसी नदी, तालाब या सरोवर पर जाकर अपनी पूजी हुई गणगौरों को पानी पिलाती हैं और तृतीया तिथि पर शाम में उनका विसर्जन कर देती हैं। जहां पूजा की जाती है, उस स्थान को गणगौर का पीहर और जहां विसर्जन किया जाता है, उसे ससुराल माना जाता है। तृतीया तिथि पर झांकियां भी निकाली जाती हैं, लेकिन इस साल काेराेनावायरस के प्रसार के बीच लाॅक डाउन की वजह से यह त्याेहार घर में ही मनाएंगी।

16 अंक का है विशेष महत्व

इस पूजा में 16 अंक का विशेष महत्व है। महिलाएं गणगाैर माता के गीत गाते हुए 16-16 बिंदया राेली, मेंहदी, काजल से लगाती हैं। प्रसाद अाैर सुहाग की सामग्री भी 16 की संख्या में अर्पित की जाती है। विशेष रूप से घेवर अाैर खीर, चूरमा, मठरी से माता काे पूजा जाता है।

अविवाहित कन्याएं करती हैं अच्छे वर की कामना

गणगौर एक ऐसा पर्व है, जिसे खासकर राजस्थान में अाैर देशभर में रहनेवाली वहां के परिवाराें की महिलाएं मनाती हैं। इनमें कुंवारी कन्याएं भी शामिल हैं। वे भगवान शिव अाैर माता पार्वती का पूजन करती हैं। मान्यता है कि शादी के बाद पहला गणगौर पूजन मायके में किया जाता हैं। कुंवारी कन्याएं अच्छे वर की कामना के लिए यह पूजा करती हैं।

काेराेना के चलते बाहर न जा पाएं, ताे घर पर एेसे करें पूजन

इस गणगाैर पूजा के दाैरान काेराेनावायरस का खाैफ है। लाॅक डाउन की वजह से लाेग घराें में ही कैद हैं। मान्यता है कि तृतीया तिथि पर महिलाएं नदी में स्नान करती हैं। गणगाैर का विसर्जन भी तालाबाें, नदियाें में किया जाता है। लेकिन इस बार बाहर जाना संभव नहीं है, इसलिए घर के बागीचे, अांगन, बालकनी या छत पर ही छाेटा-सा कुंड बनाकर अनुष्ठान पूरा करें।

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