मानव तस्करी / मिशनरी संस्था में नौकरी का झांसा दे बरहेट की दो आदिवासी बेटियों को दिल्ली में बेचा

(फाइल फोटो) (फाइल फोटो)
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(फाइल फोटो)(फाइल फोटो)

  • दो माह पैदल चलकर एक मध्यप्रदेश पहुंची, फिर पुलिस ने साहेबगंज पहुंचाया
  • पीड़िता बोली- होटलों का जूठन खाकर पैदल चलती रही, रात में पेड़ों पर रहती  थी

Dainik Bhaskar

Jan 16, 2020, 05:04 AM IST

साहेबगंज. जिले के बरहेट प्रखंड की दो आदिवासी बेटियों को मिशनरी संस्था में नौकरी लगाने का झांसा देकर मानव तस्करों ने दिल्ली में बेच दिया। इनमें से एक लड़की चंगुल से निकलने में कामयाब रही और दो महीने पैदल चलते हुए मध्य प्रदेश पहुंची। वहां पुलिस ने बदहवास हालत में देख थाने ले गई और फिर नाम-पता पूछने के बाद साहेबगंज पहुंचा दिया।

बरहेट पुलिस को लड़की ने पूरी आपबीती बताई। उसके बयान पर मानव तस्कर सृजन मुर्मू के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। युवती ने बताया कि उसके गांव के ही सृजन ने उसे 20 हजार रुपए में बेचा था। उससे दाई का काम कराया जाता था। सृजन ने उसके साथ बेची गई दूसरी लड़की को लाने का प्रलोभन देकर ढाई हजार रुपए और लिये थे। मानव तस्कर फरार है। इधर, एसपी अमन कुमार ने कहा कि यह मामला काफी गंभीर है। मानव तस्कर सृजन के अलावा जो भी शामिल हैं, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा। जल्द ही विशेष टीम गठित कर मामले की गंभीरता से जांच कराई जाएगी। दूसरी लड़की की बरामदगी की कार्रवाई होगी। 

पीड़ित लड़की ने भास्कर को बताया कि वह संथाली के अलावा कोई भाषा नहीं जानती। 20 दिन खरीदार केे चंगुल में रही, फिर मौका मिलने पर भाग खड़ी हुई। दो माह तक वह पैदल चलती रही। इस बीच भूख लगती तो वह होटलों का जूठन खाती। अंधेरा होने पर सुरक्षित रहने के लिए पेड़ पर चढ़ जाती। डर के कारण रातभर सोती नहीं थी। दिन में थोड़ी झपकी ले लेती थी। दो माह नहीं नहाने से शरीर से दुर्गंध आ रही थी, जिससे लोग उसे पागल समझते थे। कमजोरी से आंखें धंस गई थी। मध्यप्रदेश पुलिस उसकी भाषा समझ नहीं रही थी, लेकिन झारखंड बोलने के बाद पुलिस ने किसी प्रकार साहेबगंज पुलिस से संपर्क कर पहुंचाया।

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