17 जिलों में 31403 लोग अभी होम क्वारेंटाइन में कोरोना टेस्ट अब तक सिर्फ 137 का किया गया

Dhanbad News - रिम्स में कोरोना के संदिग्ध मरीजों के बीच काम कर रहे जूनियर डॉक्टरों को पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट नहीं...

Mar 27, 2020, 06:40 AM IST

रिम्स में कोरोना के संदिग्ध मरीजों के बीच काम कर रहे जूनियर डॉक्टरों को पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट नहीं दिया गया है। इस वजह से उनमें नाराजगी भी है। जूनियर डॉक्टर्स का आरोप है कि अस्पताल में एक भी किट नहीं है। प्रबंधन सिर्फ सांत्वना दे रहा है कि मास्क और किट का ऑर्डर दे दिया गया है। उन्होंने बताया कि कोरोना के गंभीर मरीज को जब वेंटिलेटर पर लाया जाता है, तब सबसे ज्यादा खतरा डॉक्टर को ही होता है। जैसे ही पॉजिटिव केस आ जाएगा, वे हॉस्पिटल छोड़ने को मजबूर हो जाएंगे।

100 किट हैं, पॉजिटिव केस आया तो देंगे : सुपरिटेंडेंट

रिम्स के सुपरिटेंडेंट विवेक कश्यप का कहना है कि हमारे पास 100 से अधिक किट मौजूद हैं। मगर इनका इस्तेमाल कोई पॉजिटिव केस आने के बाद ही किया जाएगा। अभी इनकी जरूरत नहीं है।

राज्य ने केंद्र से दो और लैब की अनुमति मांगी

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राज्य सरकार की तैयारियों पर चर्चा की। स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने इटकी व धनबाद में अारटीपीसीआर मशीन के लिए अनुमति मांगी। पर्याप्त मात्रा में एन-95 मास्क, सेनेटाइजर, पीपीई गाउन की मांग की।

हजारीबाग में सबसे ज्यादा लोगों को होम क्वारेंटाइन में रखा गया

जिले में करीब 10 हजार लोग दूसरे शहरों से आए हैं। इनमें 6050 को होम क्वारेंटाइन किया गया है। दुबई, चीन, आस्ट्रेलिया समेत विदेश से 93 लोग हजारीबाग आए। इनमें से 55 लोग अंडर सर्विलांस पर हैं। 19 लोग रैपिड रिस्पांस टीम की नजर में हैं। एक संदिग्ध को रिम्स रेफर किया गया है।

अरगोड़ा के 2 लोगों ने होम क्वारेंटाइन तोड़ा, केस दर्ज

होम क्वारेंटाइन तोड़ने पर दो लोगों के खिलाफ अरगोड़ा थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। दोनों अविनाश कन्हैया और सत्यम कन्हैया अरगोड़ा के कुंज विहार के रहनेवाले हैं। 22 मार्च को दिल्ली से लौटे हैं। इन्हें होम क्वारेंटाइन में रहने का निर्देश दिया गया था, लेकिन दोनों बाहर घूम रहे थे। इसकी शिकायत सोसाइटी के लोगों ने की थी।

सहियाओं को करनी है गांवों में स्क्रीनिंग...मगर किट के अभाव में कई जिलों में निकली ही नहीं सहियाएं

राज्य सरकार ने 32000 सहियाओं को काम सौंपा है कि गांव-गांव जाकर दूसरे राज्यों से आए लोगों या अन्य संदिग्ध मरीजों की जांच करें और चिन्हित कर प्रशासन को रिपोर्ट दें। सहियाओं ने 25 मार्च से काम भी शुरू कर दिया है। मगर भास्कर पड़ताल में 5 जिलों साहेबगंज, दुमका, धनबाद, गढ़वा, लातेहार में इस काम के लिए जरूरी किट सहियाओं को नहीं दी गई है। इस वजह से वे काम पर निकल ही नहीं पा रही हैं। हजारीबाग में भी कटकमसांडी में कुछ सहियाएं काम कर रही हैं।

रिम्स में बिना पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट काम कर रहे जूनियर डॉक्टर, बोले-पॉजिटिव मरीज आया तो छोड़ देंगे अस्पताल

कोरोना से असली जंग तो बाकी है...

भास्कर टीम | रांची/जमशेदपुर/धनबाद

झारखंड से सटे हर राज्य में कोरोना पॉजिटिव मरीज आने के बावजूद राज्य अब तक महामारी से महफूज है। जानकार मानते हैं कि अन्य राज्यों की अपेक्षा विदेश यात्रा से लौटने वालों की संख्या यहां कम होने के कारण ये स्थिति हो सकती है...मगर इसका एक दूसरा पहलू भी है। राज्य के 24 जिलों में भास्कर की पड़ताल में ये सामने आया कि कई जिलों में दूसरे राज्यों से आए लोगों का प्रामाणिक आंकड़ा ही नहीं है। ऐसे में इनकी स्क्रीनिंग ही नहीं हो पाई है। 17 जिलों में ऐसे 31403 को होम क्वारेंटाइन में रखा गया है। मगर ये सिर्फ वे लोग हैं जिनका पता चल पाया है। राज्य में कोरोना की जांच भी अब तक सिर्फ 137 लोगों की ही हुई है। जबकि डब्ल्यूएचओ ने हाल ही में सभी देशों को सलाह दी है कि सोशल डिस्टेंसिंग के साथ ही कोरोना जांच की संख्या बढ़ाएं। ऐसे में संदिग्ध मरीजों की जल्द से जल्द पहचान करना एक बड़ी चुनौती है। दूसरी चुनौती क्वारेंटाइन में रखे गए इन संदिग्ध मरीजों पर नियंत्रण रखना है। सीएम हेमंत सोरेन ने बुधवार को अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि संदिग्धों को होम क्वारेंटाइन नहीं, सरकारी क्वारेंटाइन में रखा जाए। मगर अब तक ऐसे लोगों को चिन्हित करने की गति ही धीमी है। भास्कर पड़ताल में ये भी सामने आया कि गांवों में स्क्रीनिंग के काम में लगाई गई सहियाएं प्रोटेक्टिव किट के अभाव में काम ही शुरू नहीं कर पा रही हैं।

क्वारेंटाइन का हाल

जिला क्वारेंटाइन

हजारीबाग 6050

गिरिडीह 5484

रांची 4000

कोडरमा 2635

चतरा 2500

पलामू 2000

गढ़वा 1852

सिमडेगा 1525

लातेहार 1500

लोहरदगा 1031

खूंटी 778

गुमला 750

रामगढ़ 615

बोकारो 300

पू. सिंहभूम 257

पाकुड़ 76

धनबाद 50

ये पशु नहीं...मानव तस्करी है : चोरी-छिपे झारखंड बिहार पहुंच रहे हैं लोग

कोडरमा| पूरे देश में लॉकडाउन होने के बावजूद भी बंगाल, महाराष्ट्र सहित अन्य महानगरों से लाेग निजी वाहन में लोड होकर झारखंड व बिहार आ रहे हैं। गुरुवार को बंगाल से एक पिकअप वैन में तिरपाल ढक कर दर्जनों की संख्या में लोग कोडरमा के रास्ते हाजीपुर जा रहे थे। झुमरी तिलैया स्थित झंडा चौक पर वे लोग रास्ता पूछने के लिए रुके तो मामला पकड़ में आया। पूछने पर इन लोगों ने बताया कि वे बंगाल में काम करते हैं, मगर अब लॉकडाउन से उनके सामने भुखमरी की स्थिति बन गई है। इसीलिए छिपकर बिहार लौट रहे हैं।

{सीएम ने बुधवार को कहा था-होम नहीं, सरकारी क्वारेंटाइन में रखें

{डब्ल्यूएचओ की सलाह-जांच संख्या बढ़ाएं, तभी स्थिति सुधरेगी

भास्कर पड़ताल

कई जिलों के पास बाहर से आए लोगों का सही आंकड़ा भी नहीं

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