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आयकर सर्वे / ज्वेल ज्योति और चेतन के स्टॉक में ‌1.36 करोड़ की गड़बड़ी मिली



प्रतिष्ठानों में सोना, चांदी, हीरे समेत अन्य आभूषणों के स्टॉक का आकलन करने के लिए रांची से वैल्युअर बुलाए गए थे। प्रतिष्ठानों में सोना, चांदी, हीरे समेत अन्य आभूषणों के स्टॉक का आकलन करने के लिए रांची से वैल्युअर बुलाए गए थे।
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प्रतिष्ठानों में सोना, चांदी, हीरे समेत अन्य आभूषणों के स्टॉक का आकलन करने के लिए रांची से वैल्युअर बुलाए गए थे।प्रतिष्ठानों में सोना, चांदी, हीरे समेत अन्य आभूषणों के स्टॉक का आकलन करने के लिए रांची से वैल्युअर बुलाए गए थे।

  • कैश में भी हेरफेर, दोनों प्रतिष्ठानों ने टैक्स देने की भरी हामी 
  • ज्वेल ज्योति ने 35 लाख और चेतन ऑरनामेंट्स ने 13 लाख टैक्स देने की भरी हामी 

Dainik Bhaskar

Oct 13, 2018, 11:22 AM IST

धनबाद.  धनबाद के दो बड़े स्वर्णाभूषण प्रतिष्ठानों ज्वेल ज्योति और चेतन ऑरनामेंट्स के स्टॉक में 1.13 करोड़ रुपए की गड़बड़ी मिली है। ज्वेल ज्योति के स्टॉक और पंजी में अंकित रकम में 85 लाख रुपए का अंतर है, जबकि चेतन ऑरनामेंट्स में 51 लाख रुपए का। कैश में भी गड़बड़ी मिली। 

ज्वेल ज्योति ने 35 लाख और चेतन ऑरनामेंट्स ने 13 लाख टैक्स जमा करने की भरी हामी

  1. आयकर विभाग ने इस अंतर को अघोषित माना और टैक्स का दावा पेश किया। इसके बाद ज्वेल ज्योति ने 35 लाख और चेतन ऑरनामेंट्स ने 13 लाख टैक्स जमा करने की हामी भरी। मौजूदा वित्तीय वर्ष 2018-19 में टैक्स की यह रकम जमा करनी होगी। इससे पहले ज्वेल ज्योति के बैंक मोड़ के श्रीराम प्लाजा स्थित शोरूम और होलसेल प्रतिष्ठान तथा चेतन के बैंक मोड़ और गोविंदपुर में स्थित शोरूमों में गुरुवार से शुरू सर्वे 36 घंटे बाद गुरुवार को खत्म हुआ। सर्वे के दौरान प्रतिष्ठानों में सोना, चांदी, हीरे समेत अन्य आभूषणों के स्टॉक का आकलन करने के लिए रांची से वैल्युअर बुलाए गए थे। उन्होंने गुरुवार को भी काम पूरा कर स्टॉक की वैल्यू से अधिकारियों को अवगत कराया। स्टॉक के वजन और वैल्यू तथा पंजियों में दर्ज राशि में भारी अंतर पाया गया। 

  2. सोना-चांदी के मौजूदा भाव पर हुआ आकलन

    ज्वेल ज्योति और चेतन ऑरनामेंट्स के स्टॉक में मौजूद सोना, चांदी समेत अन्य आभूषणों की कीमत का आकलन मौजूदा भाव में किया गया। वहीं शोरूम मालिकों का कहना है कि स्टॉक में कुछ आभूषण पुराने हैं, जिसकी खरीद उस समय हुई थी, जब भाव कम था। इसी कम भाव को डिफरेंस बता विभाग टैक्स का दावा कर रहा है। वहीं विभाग का कहना है कि स्टॉक और उससे संबंधित पंजी-वाउचर के आधार पर अंतर का आकलन किया गया है। 

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