नीरज सिंह हत्याकांड / पुलिस तफ्तीश से झरिया विधायक संतुष्ट नहीं, सीबीआई जांच के लिए हाईकोर्ट पहुंचे



संजीव सिंह। (फाइल फोटो) संजीव सिंह। (फाइल फोटो)
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संजीव सिंह। (फाइल फोटो)संजीव सिंह। (फाइल फोटो)

  • एसआईटी जांच को दरकिनार करने पर जताया संदेह, हाईकोर्ट में क्रिमिनल रिट पिटीशन दाखिल किया

Dainik Bhaskar

Sep 13, 2019, 03:57 PM IST

धनबाद. धनबाद जेल में बंद झरिया विधायक संजीव सिंह ने पूर्व डिप्टी मेयर नीरज सिंह की हत्या की सीबीआई जांच की मांग की है। संजीव की ओर से 6 सितंबर को रांची हाईकोर्ट में रिट याचिका (संख्या 308/19) दाखिल की गई है। संजीव के अधिवक्ता मो जावेद और हाईकोर्ट के सीनियर एडवोकेट बीएम त्रिपाठी ने गुरुवार को मीडिया को बताया कि नीरज हत्याकांड के आईओ ने दुर्भावना से ग्रसित होकर अनुसंधान किया और जान-बूझकर उनके मुवक्किल को फंसाया। 

 

संजीव के वकील ने इन कारणों को बताया वजह
21 मार्च 2017 को संध्या 6.45 बजे नीरज सिंह की हत्या हुई थी, लेकिन इस कांड की एफआईआर 23 मार्च 2017 को प्रातः साढ़े छह बजे दर्ज कराई गई थी। हत्या सरायढेला थाना क्षेत्र में हुई थी, लेकिन चिरकुंडा थाना में पदस्थापित दारोगा निरंजन तिवारी को आईओ बनाया गया। हत्या के दो दिनों तक स्क्रिप्ट तैयार की गई। यह पूछे जाने पर कि सीबीआई जांच की मांग अब क्यों की जा रही है, अधिवक्ताद्वय ने कहा- आईओ द्वारा किस्तों में पुलिस पेपर उपलब्ध कराया, जो संदेहास्पद है। इसी कारण आरोपपत्र दायर होने के बाद सीबीआई जांच की याचिका नहीं डाली जा सकी थी। 

 

नीरज की गाड़ी को कोर्ट में पेश किया गया
नीरज सिंह समेत चार लोगों की हत्या के मामले में गुरुवार को अनुसंधानकर्ता निरंजन तिवारी ने नौवें दिन भी अदालत में गवाही दी। निरंजन ने 21 मार्च 2017 से 23 मार्च 2017 तक का सरायढेला थाना की स्टेशन डायरी अदालत के समक्ष प्रस्तुत की। अनुसंधानकर्ता द्वारा आज क्रेन पर लादकर नीरज सिंह की फॉरच्यूनर गाड़ी को अदालत के समक्ष प्रदर्श के रूप में प्रस्तुत किया गया। फॉरच्यूनर को क्रेन पर ढक कर लाया गया था। गवाही के दौरान न्यायाधीश ने तिरपाल हटाकर गाड़ी का मुआयना किया। बचाव पक्ष द्वारा आज फॉरच्यूनर के संबंध में सवालात किए गए। सवालों का जवाब देते हुए आईओ ने कहा कि उन्होंने फॉरच्यूनर की चाबी का अनुसंधान नहीं किया और न ही चाबी जब्ती सूची में शामिल है। घटनास्थल से सरायढेला थाना परिसर में फॉरच्यूनर कैसे लाई गई, इसकी जानकारी नहीं है। 

 

अधिवक्ताओं का दावा-गवाहों के रघुकुल में दर्ज हुए बयान 
अधिवक्ताओं ने कहा कि रिंकू सिंह के खिलाफ 7 सितंबर 2019 को चार्जशीट दी गई है, इसके बावजूद अनुसंधान जारी रखने की बात कही गई। सबसे अहम बात है कि कि सभी गवाहों का बयान रघुकुल में लिया गया था। घटना की रात 21 मार्च 2017 को ही इंक्वेस्ट रिपोर्ट पर अभिषेक सिंह ने हस्ताक्षर किया था। इस कारण हत्याकांड की सीबीआई जांच होनी चाहिए। 

 

केस की एफआईआर और पुलिस जांच की थ्योरी अलग-अलग 
संजीव सिंह के अधिवक्ताओं ने कहा कि अनुसंधानकर्ता द्वारा जिन महत्वपूर्ण बिंदुओं पर जांच करना चाहिए थी, उन्हें छोड़कर सूचक द्वारा बताए गए मार्ग पर अनुसंधान किया गया है। इस बात का खुलासा आईओ द्वारा अदालत में दिए गए बयान में हुआ है। अनुसंधानकर्ता ने 21 मार्च 2017 से एसआईटी की जांच को न अपने अनुसंधान में नहीं लाया और न उसका कहीं उल्लेख किया गया है। आईओ का अनुसंधान एवं सूचक द्वारा दर्ज प्राथमिकी दो अलग-अलग थ्योरी पर आधारित है। 

 

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