एनडीए / टिकट के जाेड़ताेड़ से खत्म हुई थी दो दिग्गजों की बादशाहत, भाजपा के बागी ने लगाई थी सेंध

बबीता व लम्बोदर महतो। बबीता व लम्बोदर महतो।
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बबीता व लम्बोदर महतो।बबीता व लम्बोदर महतो।

  • गोमिया सीट पर 1977 से 2009 तक छत्रुराम महतो व माधवलाल सिंह ने बारी-बारी चार बार किया राज
  • एनडीए में गांठ के कारण योगेंद्र की पत्नी 2018 का उपचुनाव जीती थी, पिछले 2 चुनावों में झामुमो का रहा है वर्चस्व

दैनिक भास्कर

Nov 17, 2019, 04:08 AM IST

बोकारो (राजेश सिंहदेव). गोमिया का चुनावी अतीत रोमांचक रहा है। इस क्षेत्र के राजनीतिक दिग्गजाें ने 37 सालों तक बारी-बारी राज किया। वर्ष 1977 से 2009 तक चार बार माधवलाल सिंह और चार बार छत्रुराम महतो विधायक रहे। 2014 में पहली बार योगेंद्र प्रसाद ने सेंध लगाई और यहां की बागडोर अपने हाथों में लिया।

 

2014 के चुनाव में एनडीए गठबंधन ने आजसू के दावेदार योगेंद्र प्रसाद का टिकट काटते हुए कुछ समय पहले ही भाजपा में शामिल हुए माधवलाल सिंह को टिकट दे दिया। इससे नाराज होकर योगेंद्र प्रसाद ने झामुमो का दामन थाम लिया और चुनाव मैदान में उतर गए। परिणीति यह रही कि योगेंद्र ने निवर्तमान विधायक माधवलाल सिंह को करारी शिकस्त दी। इसके साथ ही झामुमो के लिए यहां एक सीट की नई लकीर खींच दी। उल्लेखनीय है कि गोमिया सीट पर तीसरे चरण में 12 दिसंबर को चुनाव होना है।

 

एनडीए में गांठ के कारण योगेंद्र की पत्नी 2018 का उपचुनाव जीती थीं 
2014 में चुनाव जीतने के दो वर्ष बाद ही योगेंद्र प्रसाद पर कोयला चोरी का मामला सिद्ध हो गया। इस कारण उन्हें तीन वर्ष की सजा सुनाई गई। इस सजा के कारण योगेंद्र की विधायकी चली गई और 2018 में गोमिया सीट के लिए उपचुनाव हुआ। झामुमो ने उस समय पार्टी प्रत्याशी के रूप में योगेंद्र महतो की पत्नी बबीता देवी को मैदान में उतार दिया। वहीं, एनडीए की ओर से आजसू प्रत्याशी डॉ. लंबोदर महतो को उतारा गया, लेकिन भाजपा ने पार्टी प्रत्याशी केे तौर पर माधवलाल सिंह को भी दोस्ताना संघर्ष के लिए चुनाव मैदान में उतार दिया। इसका पूरा फायदा झामुमो की बबीता को मिला और आजसू के लंबोदर उनसे मात्र 1341 वोट से पराजित हो गए।

 

इस बार भी दोहरा सकता है इतिहास

इस बार भी 2018 के उपचुनाव जैसे ही हालात हैं। आजसू से लंबोदर महतो मैदान में हैं। लेकिन एनडीए की आई दरार के कारण यदि गठबंधन धर्म का पालन नहीं हुआ तो भाजपा पार्टी प्रत्याशी के रूप में छत्रुराम महतो को दोस्ताना संघर्ष के लिए खड़ा कर सकती है। यदि ऐसा हुआ तो इसका सीधा फायदा झामुमो को मिल सकता है। अभी इस सीट पर झामुमो और आजसू का सीधा मुकाबला है।   

 

पिछले 2 चुनावों में झामुमो का रहा है वर्चस्व

 

2014 चुनाव में मतदान% 69.64

  • योगेंद्र प्रसाद, झामुमो:  97,799 वोट, वाेटिंग% 55.25
  • माधवलाल सिंह,भाजपा: 60,285 वोट, वाेटिंग% 34.06
  • विमल कुमार जयसवाल, आईएनसी: 3828, वाेटिंग% 2.16

 

2014 चुनाव में मतदान% 69.64

  • योगेंद्र प्रसाद, झामुमो:  97,799 वोट, वाेटिंग% 55.25
  • माधवलाल सिंह,भाजपा: 60,285 वोट, वाेटिंग% 34.06
  • विमल कुमार जयसवाल, आईएनसी: 3828, वाेटिंग% 2.16

 

1977 से अब तक कब कौन किस दल से विधायक

 

jhr

 

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