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भारत में शिक्षा की अलख जगा रहे एनआरआई, प्रति वर्ष सैकड़ों वंचित मेधावी छात्र-छात्राओं को डाॅक्टर, इंजीनियर बनाने में कर रहे हैं सहयोग

विदेशों में जा बसे भारतवंशियों का जुड़ाव अपने देश से लगातार बना हुआ है। आर्थिक रूप से कमजोर समाज के मेधावी...

Dainik Bhaskar

Apr 17, 2018, 02:10 AM IST
भारत में शिक्षा की अलख जगा रहे एनआरआई, प्रति वर्ष सैकड़ों वंचित मेधावी छात्र-छात्राओं को डाॅक्टर, इंजीनियर बनाने में कर रहे हैं सहयोग
विदेशों में जा बसे भारतवंशियों का जुड़ाव अपने देश से लगातार बना हुआ है। आर्थिक रूप से कमजोर समाज के मेधावी छात्र-छात्राओं को उच्च शिक्षा प्रदान कराकर उनके सपनों को साकार करने को लेकर एनआरआई ने यूएसए में फाउंडेशन फार एक्सीलेंस नाम से एक संस्था स्थापित कर रखा है। जो मेडिकल और इंजीनियरिंग की पढाई करने वाले समाज के गरीब परिवार के मेधावी छात्र-छात्राओं को उनकी पढाई पूरा करने में छात्रवृति प्रदान करता है। इस संगठन की स्थापना वर्ष 1994 में गुजरात निवासी प्रभु गोयल, उनकी प|ी पुन गोयल सह संस्थापक वेंकटेश शुक्ला सहित आठ दस भारतीयों ने अमेरिका के कैलिफोर्निया शहर में की। जिसकी शाखा का संचालन बैंगलुरू में सुधा कि दोई कर रही हैं। यह संस्था नामांकन के साल से लेकर पढाई पूरी होने तक प्रति वर्ष चालीस से पचास हजार रुपए तक की छात्रवृति प्रदान करती है। स्थापना काल से लेकर अबतक लगभग तीन हजार टैलेंटेड छात्र-छात्राओं को छात्रवृति प्रदान किया जा चुका है, जो देश के विभिन्न हिस्सों में नौकरी पाकर देश की सेवा कर रहे हैं।

आईआईटी आईएसएम का कुमार सौरभ 18 लाख पैकेज पर वालमार्ट में कर रहा नौकरी

आईआईटी आईएसएम से 2017 में पास आउट हुआ कुमार सौरभ वाल मार्ट कंपनी के बंगलुरू में डेवलपर की नौकरी कर रहा है। उसे वाल मार्ट ने 18 लाख रुपए वार्षिक पैकेज दिया है। आर्थिक रूप से कमजोर सौरभ के पास स्कूल फी जमा करने की क्षमता नहीं थी। झारखंड के फेसिलिटेटर आर प्रसाद ने उसे एफ एफई से मदद दिलाई और आज वह एक कामयाब इंसान है। आईएसएम का ही विकास कुमार 2017 में मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढाई पूरी कर फ्रेंच कंपनी कैट डे मिनी में मुम्बई में छह लाख रुपए के पैकेज पर काम कर रहा है। इसके अतिरिक्त आईआईटी आईएसएम का ही प्रणव कुमार, खुशबू कुमारी, आईआईटी कानपुर का मृणाल कुमार, एनआईटी जमशेदपुर का संजय बनर्जी, प्रकाश कुमार, सुरज कुमार, बीआईटी सिन्दरी का सुमित कुमार पंडित, कविता कुमारी, यादव पुर यूनिवर्सिटी का मधुवन कुमार सहित कई अन्य छात्र-छात्राएं अपनी पढाई पूरी कर नौकरी में हैं। समाज में पिछड़े बहुमुखी प्रतिभा के धनी मेधावी छात्र-छात्राओं को मुख्यधारा में लाकर उन्हें ऐसे ही कामों के लिए फाउंडेशन फार एक्सिलैंस प्रेरित करता है। एफएफई के माध्यम से अपनी पढाई जारी रखने वाले कुछ स्टुडेंट्स ने डीबी स्टार से अपनी भावनाओं को साझा किया।

मेघा छात्रवृति पाकर खुश

बीआईटी सिन्दरी में केमिकल इंजीनियरिंग की पढाई कर रही प्रथम वर्ष की छात्रा मेधा रानी एफएफई से छात्रवृति पाकर खुश है। उसने कहा कि परिवार की आर्थिक स्थिति सही नहीं होने के कारण मैट्रिक के बाद आगे की पढाई जारी रखना मुश्किल लग रहा था। बीआईटी में सेलेक्शन होने के बाद फी को लेकर परिवार में तनाव था। इस बीच अपने साथियों से एफएफई के संबंध में जानकारी मिली। संस्था के झारखंड प्रमुख आर प्रसाद ने अमार मार्कोस के आधार पर हमें हमारे आवेदन को अग्रसारित करते हुए छात्रवृति के लिए नामित किया। अब मैं अपनी पढाई पूरी कर सकूंगी।

मथुरा के सपनों को साकार कर रही हैं संस्था

आईआईटी आईएसएम में पेट्रोलियम इंजीनियरिंग की पढाई कर रहे मथुरा दास के सपनों को सकार करने में एफएफई मदद कर रहा है। मथुरा की भी कहानी मेधा से मिलती जुलती है। मथुरा ने आईआईटी में नामांकन के लिए क्वालिफाई किया। लेकिन नामांकन के लिए जब पैसे की बारी आई तब उसके सामने पहाड़ जैसा फी का बोझ बाधक बन खड़ा हो गया। मथुरा ने हार नहीं मानी और अपने साथियों के माध्यम से एफएफई तक पहुंचा। आज वह अपनी पढाई जारी रखे हुए है।

ब्रेक लगने वाली थी सौमेन की पढ़ाई में

सोमेन कुमार बनर्जी इलाहाबाद एनआईटी में मैकेनिकल इंजीनियरिंग का प्रथम वर्ष का छात्र है । पढाई में तेज होने के बावजूद एनआईटी में नामांकन ले पाना उसके लिए मुश्किल लग रहा था ऐसे में दोस्तों ने इस संस्था के बारे में बताया जब संपर्क किया तो वहां से उसे पूरा सहयोग मिला।

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