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दामिनी वियतमान के बच्चों को समझा रहीं गुड टच-बैड टच, तो अरित्रा पोलैंड में बिखेर रहे भारतीय संस्कृति की खुशबू

कोई इंडोनेशिया में स्थानीय व्यवसायियों को मार्केटिंग का गुर सिखा रहा है, तो कोई स्कूली बच्चों के लिए वेबसाइट बना...

Danik Bhaskar | Jul 09, 2018, 02:30 AM IST
कोई इंडोनेशिया में स्थानीय व्यवसायियों को मार्केटिंग का गुर सिखा रहा है, तो कोई स्कूली बच्चों के लिए वेबसाइट बना रहा है। कोई स्कूली बच्चों को सुरक्षा के प्रति जागरूक बना रहा है, तो कोई उन्हें रोबोटिक्स प्रोजेक्ट तैयार करने का आइडिया दे रहा है। ये आईआईटी धनबाद के स्टूडेंट हैं और उनका मकसद है - वैश्विक भलाई। जहां दूसरे युवा छुट्टियां मौज-मस्ती में बिता देते हैं, वहीं आईआईटी के ये स्टूडेंट्स देश के विभिन्न हिस्सों और विदेशाें में जाकर वहां के लोगों की मदद कर रहे हैं। आईआईटी के ये स्टूडेंट एआईईएसईसी के वॉलंटियर हैं। एआईईएसईसी असल में इंटरनेशनल एसोसिएशन ऑफ स्टूडेंट्स इन इकोनॉमिक एंड कॉमर्शियल साइंसेंस का फ्रेंच में संक्षिप्त नाम है। इसका गठन दूसरे विश्व युद्ध के बाद विश्व शांति के उद्देश्य से किया गया था। इसका नाम इस संगठन से जुड़े बीआईटी सिंदरी, शिलांग, इलाहाबाद के स्टूडेंट भी यूक्रेन, नेपाल, इंडोनेशिया, वियतनाम, पोलैंड, इजिप्ट, मलेशिया आदि देशों में वहां के लोगों की मदद कर रहे हैं।

एआईईएसईसी से जुड़कर यूक्रेन, नेपाल, इंडोनेशिया, इजिप्ट, मलेशिया आदि देशों में बच्चों-युवाओं का जीवन बेहतर बनाने में जुटे हैं आईआईटी धनबाद के स्टूडेंट

ग्लोबल वॉलेंटियर, ग्लोबल इंटरप्रिन्योर, ग्लोबल टैलेंट की थीम पर कर रहे काम

पोलैंड में युवाओं के साथ अरित्रा (पीछे दाएं से दूसरे)।

जानिए कहां क्या कर रहे हैं आईआईटी के स्टूडेंट

दामिनी चौधरी: : वियतनाम में बच्चों को सुरक्षा, छात्राओं को गुड टच, बैड टच समझा रही हैं।

गौतम बत्रा : इंडोनेशिया में मार्केटिंग के गुर सिखा रहे हैं व्यवसायियों को।

जयंत खनवेल : इजिप्ट में स्कूली बच्चों के लिए वेबसाइट बना रहे हैं।

यश डेडिया : वियतनाम में मार्केटिंग संबंधी वीडियो बना रहे हैं।

सौम्या सृष्टि होरो : इजिप्ट में वहां की संस्कृति को समझ रही हैं।

प्रिंस : इजिप्ट में रोबोटिक्स प्रोजेक्ट पर काम करना सिखा रहे हैं।

प्रज्वल ठाकुर : मलेशिया में वंचित बच्चों को अंग्रेजी सिखा रहे हैं।

जतिन वार्ष्णेय : इंडोनेशिया में स्थानीय व्यवसायियों को मार्केटिंग सिखा रहे।

दर्शिल : इंडोनेशिया में लोकल स्टार्टअप शुरू करने की जानकारी दे रहे हैं।

अरित्रा रॉय : पोलैंड में युवाओं को भारत की संस्कृति से भी अवगत करा रहे हैं।

अमन: इजिप्ट में युवाओं को रोबोटिक्स की जानकारी दे रहे हैं।

वालंटियर 45 दिन विदेश में रहते हैं : एआईईएसईसी से जुड़ी जाह्नवी शर्मा कहती हैं- संगठन का मानना है कि विश्व में तभी शांति रह सकती है, जब हम एक-दूसरे देश के लोगों को समझें। इसलिए हर वालंटियर किसी दूसरे देश में 45 दिन रहकर अलग-अलग प्रोजेक्ट पर काम करता है। 17 सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल पर काम किया जा रहा है। अब भी कई स्टूडेंट विदेशों में हैं और हम इंस्टाग्राम से एक-दूसरे की गतिविधियां जानते हैं। 127 देशों में काम कर रहा एआईईएसईसी हर साल आईआईटी धनबाद के 100 स्टूडेंट को अलग-अलग देशों में भेजता है।