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कागजों में ही शिशु सदन, अधिकत्तर स्कूलों में नहीं चलती हैं कक्षाएं

निजी स्कूलों की तरह सरकारी स्कूलों में भी केजी के तर्ज पर शिशु सदन कक्षा शुरू की गई थी, जो एक साल होने से पहले ही...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 03, 2018, 02:35 AM IST

कागजों में ही शिशु सदन, अधिकत्तर स्कूलों में नहीं चलती हैं कक्षाएं
निजी स्कूलों की तरह सरकारी स्कूलों में भी केजी के तर्ज पर शिशु सदन कक्षा शुरू की गई थी, जो एक साल होने से पहले ही हवा-हवाई हो गई है। अधिकांश स्कूलों में इस कक्षा का संचालन ही नहीं होता है। स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के आदेश पर जिन स्कूलों में दाखिला हुआ भी था, वहां बच्चों का कोई मौखिक मूल्यांकन भी नहीं हुआ। बच्चों को विभाग का कोई लाभ भी नहीं मिला। मूल्यांकन में केवल पहली-आठवीं कक्षा के बच्चों को शामिल किया गया। इस वर्ष भी नामांकन को लेकर स्कूलों में भ्रम की स्थिति है। इसी तरह सरकारी प्रारंभिक स्कूलों में विभाग ने आदेश देकर लाखों रुपये खर्च कर पहले लो डेस्क बनवा लिया था। बाद में आदेश जारी कर छोटे बच्चों के लिए भी बेंच-डेस्क बनाने का आदेश जारी किया गया। तर्क दिया गया कि लो डेस्क की ऊंचाई अधिक है, जिसका छोटे बच्चे इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे।

जारी हुआ था संकल्प :शिशु सदन (केजी) को लेकर विभाग ने 28 जुलाई 2017 को संकल्प जारी किया था। इसमें कहा गया था कि जिन स्कूलों में भी पहली कक्षा से नामांकन होता है, वहां शिशु सदन कक्षा शुरू होगी। इसमें पांच वर्ष से अधिक आयु के बच्चों का नामांकन होगा। आंगनबाड़ी के बच्चे, जिनकी उम्र एक अप्रैल को पांच वर्ष से अधिक हो जाएगी, उनका नामांकन लिया जाएगा। इस कक्षा के बच्चों के लिए जेसीइआरटी पाठ्यक्रम तैयार करेगी और समय-समय पर विकसित करेगी। प्रवेशिका में खेल खेल में शिक्षा दी जाएगी। इसकी जिम्मेवारी पारा शिक्षकों को दी जाएगी। बच्चों को एमडीएम, स्कूल किट, पूरक पोषाहार, स्कूल ड्रेस का लाभ मिलेगा। इसके बाद विभाग ने अपने किसी पत्र में शिशु सदन का जिक्र तक नहीं किया है।

आदेश माने स्कूल, भ्रम हो तो बताएं, उसे दूर किया जाएगा

स्कूल विभाग के आदेशों का अनुपालन करे। कोई संशय है तो विभाग को अवगत कराए, उसे दूर किया जाएगा। पिछले वर्ष करीब ढाई लाख बच्चों का नामांकन हुआ था। इस साल भी लिया जाएगा। इस कक्षा में मूल्यांकन नहीं होना है, बच्चों में केवल स्कूल में बैठने की आदत डालनी है। अमरेंद्र प्रताप सिंह, प्रधान सचिव, स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग

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