Hindi News »Jharkhand »Dhanbad» झारखंड की 4 मलाला जिन्होंने पढ़ाई के लिए की लड़ाई

झारखंड की 4 मलाला जिन्होंने पढ़ाई के लिए की लड़ाई

बोकारो | चास के चंदाहा गांव की 18 वर्षीय हसीना परवीन को पढ़ाई के लिए संघर्ष करना पड़ा। गांव में 8वीं तक स्कूल है। 8वीं पास...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jul 12, 2018, 04:10 AM IST

  • झारखंड की 4 मलाला जिन्होंने पढ़ाई के लिए की लड़ाई
    +3और स्लाइड देखें
    बोकारो | चास के चंदाहा गांव की 18 वर्षीय हसीना परवीन को पढ़ाई के लिए संघर्ष करना पड़ा। गांव में 8वीं तक स्कूल है। 8वीं पास की तो पिता मो. असगर अंसारी ने पैसे की कमी को देखते हुए आगे की पढ़ाई के लिए मना कर दिया। लेकिन हसीना जिद पर अड़ी रही। टूयूशन पढ़ाकर अपना खर्च निकाला। अभी इंटर आर्ट्स में पढ़ रही है। इनकी मुहिम से गांव के सभी अवैध महुआ शराब के अड्‌डे खत्म हो गए।

    रांची| आज मलाला डे है। पाकिस्तान में लड़कियों की शिक्षा के खिलाफ तालिबान की हिंसा के विरोध में आवाज उठाने वाली मलाला यूसुफजई का जन्मदिन भी। मलाला जैसी ही कुछ लड़कियां झारखंड में भी हैं। इन लड़कियों ने भी विषम परिस्थितियों का सामना करके अपनी पढ़ाई जारी रखी है। पढ़िए भास्कर टीम की रिपोर्ट...

    मलाला डे आज

    1.बोकारो की हसीना परवीन

    पढ़ाई पूरी की, अब गांव में शराबबंदी की मुहिम

    2.गिरिडीह की अंजलि कुमारी

    दिव्यांग अंजलि को देख 100 लड़कियां पढ़ने लगीं

    गाेमाे | उग्रवाद प्रभावित गिरिडीह जिले के पीरटांड़ प्रखंड के अाधा दर्जन गांवाें की बच्चियां माध्यमिक शिक्षा ग्रहण करने के बाद घराें में बैठ जाती थीं। सबसे बड़ा कारण था स्कूल की दूरी, जंगल, हाथियों और माओवादियों का डर। लेकिन पीरटांड प्रखंड के झिलिंगटांड़ की दिव्यांग अंजलि ने हिम्मत दिखाई। वर्ष 2008 में तोपचांची के साहोबहियार में विनोद बिहारी महतो महिला इंटर कॉलेज में एडमिशन लिया। उसे देखकर 6-7 उग्रवाद प्रभावित गांवों की 100 से ज्यादा लड़कियां भी उसके साथ कॉलेज में जाने लगीं।

    3.जमशेदपुर की विनिता मिंज

    खुद ट्यूशन से पढ़ाई की अब 56 बच्चों को पढ़ा रही

    जमशेदपुर | जमशेदपुर के पुराना सीतारामडेरा की 20 वर्षीया विनिता मिंज के माता-पिता मजदूर हैं। दिहाड़ी कमाकर घर का खर्च चलता है लेकिन पिता शराब में पैसे उड़ा देते थे। ट्यूशन से खुद की पढ़ाई पूरी की। 10वीं और 12वीं प्रथम श्रेणी से पास किया। उसे लगा कि उसके जैसे बहुत से बच्चे हैं, जो पैसे की कमी से पढ़ नहीं पाते हैं। इसलिए वह आज 56 गरीब बच्चों मुफ्त शिक्षा दे रही है।

    4.धनबाद की सपना मल्लिक

    बहनों को बेचना चाहते थे पिता, पर हार नहीं मानी

    धनबाद | सपना 9 साल की थी, तभी उसकी मां बसंती देवी चल बसी। वह पढ़ना चाहती थी लेकिन शराबी पिता मिहिल मल्लिक बेटियों से छुटकारा चाहते थे। उन्हें बाजार में बेचने की धमकी देते थे। बेटियों को बेचने के लिए उन्हें लेकर निरसा भी गए, लेकिन तभी सपना के नाना-नानी मताल मल्लिक और जामी देवी आगे आए। उन्होंने सपना के पिता को कहा कि वह बच्चों की चिंता छोड़ दे। उन्हें वापस धनबाद ले आए। लेकिन सपना ने तभी से अपने छोटे भाई-बहनों का ख्याल रखना शुरू कर दिया। उन्हें रोज तैयार करके स्कूल भेजती थी।

  • झारखंड की 4 मलाला जिन्होंने पढ़ाई के लिए की लड़ाई
    +3और स्लाइड देखें
  • झारखंड की 4 मलाला जिन्होंने पढ़ाई के लिए की लड़ाई
    +3और स्लाइड देखें
  • झारखंड की 4 मलाला जिन्होंने पढ़ाई के लिए की लड़ाई
    +3और स्लाइड देखें
आगे की स्लाइड्स देखने के लिए क्लिक करें
दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए News in Hindi, Breaking News सबसे पहले दैनिक भास्कर पर |

More From Dhanbad

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×