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बच्चे की हत्या में दोषी को उम्रकैद की सजा

अगस्त 2016 में बासुकीनाथ में दुकान चलाने वाले दुकानदार अशोक मंडल के 12 साल के भांजे श्रवण मंडल की अपहरण के बाद पांच लाख...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jul 13, 2018, 02:25 AM IST

अगस्त 2016 में बासुकीनाथ में दुकान चलाने वाले दुकानदार अशोक मंडल के 12 साल के भांजे श्रवण मंडल की अपहरण के बाद पांच लाख रुपया फिरौती नहीं मिलने पर हत्या करने वाले मुख्य आरोपी मिथुन मंडल को चतुर्थ अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश तौफिक आलम की अदालत ने गुरुवार को दोषी करार देते हुए सश्रम उम्रकैद और 50 हजार रुपया जुर्माना की सजा सुनायी। जुर्माना नहीं जमा करने पर अभियुक्त को तीन साल की अतिरिक्त सजा काटनी होगी। जरमुंडी के बेलगुमा निवासी अशोक मंडल बासुकीनाथ में दुकान लगाते हैं। सावन माह में हाथ बंटाने के लिए उन्होंने रामगढ़ के भालसुमर गांव में रहने वाली बहन तारा देवी को बुलाया था। मां के साथ दो बेटे श्रवण मंडल और कुंदन मंडल भी आए थे। 22 अगस्त 16 को बुढ़ीझिलवा गांव का विकास हजारी दुकान पर आया और दोनों भाई को अंडा खिलाने के बहाने ले गया। करीब डेढ़ घंटे बाद कुंदन लौटा लेकिन श्रवण का पता नहीं चला। खोजबीन के बाद भी जब पता नहीं चला तो मामा अशोक ने थाना में अपहरण का मामला दर्ज कराया। अपहरण के बाद बुढ़ीझिलवा गांव के मिथुन ने अशोक से रिहाई के बदले में पांच लाख की फिरौती मांगी। परिजनों ने इसकी जानकारी पुलिस को दी। पुलिस ने 26 अगस्त को विकास और मिथुन को धर दबोचा। उनकी निशानदेही पर पुलिस ने गिधनी पहाड़ी से श्रवण की सड़ी गली लाश बरामद की। अशोक के बयान पर पुलिस ने विकास, मिथुन और दिवाकर, दीनानाथ और उमेश को आरोपी बनाते हुए मामला दर्ज किया। मिथुन ही विकास की सहायता से श्रवण को अपनी बाइक से उठाकर ले गया था। दस जुलाई को अदालत ने मिथुन को छोड़कर बाकी आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। गुरुवार को सहायक लोक अभियोजन एसपी सिन्हा और बचाव पक्ष के अधिवक्ता शंकर बसईवाला की दलील सुनने के बाद मिथुन को नाबालिग के अपहरण में आजीवन कारावास, 50 हजार जुर्माना और नहीं देने पर तीन साल की सजा, हत्या में सश्रम उम्रकैद, 50 हजार जुर्माना व नहीं देने पर तीन साल और शव को छुपाने के आरोप में सात साल की सजा, 20 हजार रुपया जुर्माना और नहीं देने पर दो साल की सजा सुनायी।

अधेड़ की हत्या करने वाले को आजीवन कारावास

दुमका|द्वितीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश पवन कुमार की अदालत ने गुरुवार को मामूली बात पर गोपीकांदर निवासी अधेड़ सुरेंद्र देहरी की हत्या करने वाले रामलाल दोषी मानते हुए आजीवन कारावास और दस हजार रुपया जुर्माना की सजा सुनायी। जुर्माना नहीं भरने पर अभियुक्त को एक साल की अतिरिक्त सजा काटनी होगी।रामलाल देहरी और सुरेंद्र देहरी गोपीकांदर गोपीकांदर प्रखंड के बांधटोला के निवासी हैं। सुरेंद्र की प|ी सुंदर महारानी गांव के एक आंगनबाड़ी केंद्र में सहायिका है। सुंदर और सुरेंद्र 14 नवंबर 11 की शाम अपने घर में थे। तभी पड़ोस में रहने वाला रामलाल देहरी, कोलेन देहरी, बुदिन महारानी और समंती महारानी दरवाजे पर आयी और सुरेंद्र से कहा कि तुम्हारी प|ी दूसरे मर्द की तलाश कर रही है। सुरेंद्र ने जब इसका विरोध किया तो कहासुनी हो गई। गुस्से में रामलाल ने सुरेंद्र के सिर पर लाठी से हमला कर घायल कर दिया। बीच बचाव करने पर प|ी को पीटकर अधमरा कर दिया। शोर सुनकर बेटी लीलमुनि बाहर आयी और शोर मचाया। शोर मचते ही सभी आरोपी वहां से फरार हो गए। अस्पताल ले जाने से पहले ही सुरेंद्र ने दम तोड़ दिया। प|ी सुंदर के बयान पर पुलिस ने चारों आरोपियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया। गुरुवार को सहायक लोक अभियोजक अवध बिहारी सिंह और बचाव पक्ष के वकील केएन गोस्वामी की दलील सुनने के बाद रामलाल को आजीवन कारावास की सजा सुनायी। वहीं तीन अन्य आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।

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