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नहीं मिल पा रही स्वास्थ्य सुविधाएं

राज्य बनने के सत्रह वर्ष बाद भी उधवा प्रखंड के क्षेत्र के लोगों को सरकारी स्वास्थ्य सेवा का लाभ नहीं मिल पा रहा है।...

Danik Bhaskar | Jul 08, 2018, 04:05 AM IST
राज्य बनने के सत्रह वर्ष बाद भी उधवा प्रखंड के क्षेत्र के लोगों को सरकारी स्वास्थ्य सेवा का लाभ नहीं मिल पा रहा है। चिकित्सकों की कमी के कारण सरकार का लक्ष्य धरातल पर पूरी तरह उतर नहीं पायी हैं। गौरतलब है कि अलग झारखंड राज्य बनने से सत्रह वर्ष बाद भी उधवा प्रखंड में बड़ी आबादी चिकित्सकों की कमी के कारण चिकित्सा सुविधा से वंचित हैं। सरकार ने प्रति दो हजार की आबादी पर एक चिकित्सक बहाल करने को लेकर करोड़ों रुपये की लागत से ग्रामीण क्षेत्रों में चार- चार स्वास्थ्य केंद्र भवन का निर्माण कराया है। लेकिन चिकित्सकों की कमी के कारण सरकार का लक्ष्य धरातल पर नहीं उतर पाया। जिसमें उधवा प्रखंड के राधानगर, जोंका, अमानत एवं पियारपुर में करोड़ों रुपये की लागत से स्वास्थ्य केंद्र भवन का निर्माण कराया गया है। अमानत एवं पियारपुर में दो करोड़ से अधिक की लागत से बना स्वास्थ्य केंद्र भवन चिकित्सकों की कमी के के कारण अक्सर बंद रहता है। बता दें कि छह माह पूर्व पियारपुर स्वास्थ्य केंद्र का उद्घाटन राजमहल अनुमंडल चिकित्सा पदाधिकारी संजय कुमार ने किया था। साथ ही दो एएनएम को पदस्थापित किया था। उत्तर पियारपुर को सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत विकसित करने का भी लक्ष्य है। स्वास्थ्य केंद्र पियारपुर में अभी सिर्फ एक ही एएनएम है। स्वास्थ्य केंद्र में डिलीवरी के अलावा अन्य किसी प्रकार की चिकित्सा की व्वस्था नहीं हैं। स्वास्थ्य केंद्र में मरीज के लिए बिजली की व्यवस्था नहीं है। इस संबंध में स्थानीय ग्रामीण उज्जवल कुमार, उदय कुमार, हफीजुर रहमान, दिपक कुमार, संजय कुमार साहा, सेमी साहा, राहुल भगत, आतिफ आलम,फिरोज शेख, यासीन अली, कुतुबुद्दीन शेख,सहित दर्जनों ग्रामीणों का कहना है कि प्रखंड क्षेत्रों में करोड़ों रुपये की लागत से चार स्वास्थ्य केंद्र बनाया गया। डॉक्टर कमी के कारण स्वास्थ्य केंद्र का लाभ नहीं मिल रहा है। ग्रामीण इलाज के लिए पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल के मालदा, कोलकाता, वर्द्वमान एवं बिहार राज्य के भागलपुर, पटना सहित अन्य स्थानों में जाने को मजबूर हैं। इलाज के लिए ससमय पर नहीं पहुंचने से रोगी की मुत्यु भी हो जाती है।