बीपीएल काेटे से बचने काे प्रवेश कक्षा में स्कूल ले रहे कम नामांकन
अारटीई एक्ट 2009 के तहत मान्यता प्राप्त निजी स्कूलाें में प्रवेश कक्षा की 25 फीसदी सीटाें में दाखिले हाेते हैं। इस काेटे में कम से कम नामांकन लेना पड़े, इसलिए निजी स्कूल प्रवेश कक्षा में ही कम बच्चाें का दाखिला लेते हैं। यह शिकायत झारखंड अभिभावक महासंघ ने की है। महासचिव मनाेज कुमार मिश्रा ने ट्वीटर पर मुख्यमंत्री कार्यालय, शिक्षा मंत्री, धनबाद उपायुक्त व धनबाद डीएसई काे टैग करते हुए शिकायत की है। कहा है कि एलकेजी में दाखिले के लिए अावेदन लेने के बावजूद सामान्य काेटि के अभिभावकाें काे यूकेजी में दाखिले लेने के लिए बाध्य किया जा रहा है। स्कूलाें का मकसद अारटीई के तहत बीपीएल काेटि के बच्चाें के नामांकन से बचना है। मामले में कार्रवाई हाे। इधर, डीएसई इंद्रभूषण सिंह ने भी बताया कि निजी स्कूल प्रबंधन सामर्थ्य संख्या छुपा रहे हैं। स्कूलाें से प्रवेश कक्षा की सामर्थ्य संख्या मांगी गर्इ थी, जाे अधिकांश स्कूलाें ने नहीं दिया है। सनद हाे कि निजी स्कूलाें में नामांकित बच्चाें की संख्या हजाराें में है, जबकि वे अपनी प्रवेश कक्षा की कुल सामर्थ्य संख्या 30-80 तक बताते हैं। दरअसल स्कूलाें में ऊपर की कक्षाअाें में भी अधिक बच्चे नामांकित हाेते हैं।
आरटीई 2009 के तहत महज 14 स्कूलाें ने दी बीपीएल बच्चाें की रिपाेर्ट
अारटीई 2009 के तहत हुए नामांकन की रिपाेर्ट महज 14 स्कूलाें ने दी है। जबकि जिले में 51 स्कूलाें में इस काेटि में नामांकन लिया जाना है। सरस्वती विद्या मंदिर सिंदरी में 14 अावेदनाें में 8, भूली में 30 में 7 का चयन हुअा है। इसी तरह दून पब्लिक स्कूल में 25 में 7, डीएवी सेंटेनरी में 38 में 11, मुनीडीह में 44 में 10, जामाडाेबा में 98 में 19, डीएवी माॅडल सीएफअारअाई में 95 में 20, बड्स गार्डन में 44 में 35, हाेली मदर्स एकेडमी में 30 में 10, दिल्ली पब्लिक स्कूल में 70 में 28 बच्चाें का चयन किया गया है। वहीं सरस्वती विद्या मंदिर सिनीडीह में 10, डीएवी काेयलानगर में 29, धनबाद सिटी स्कूल में 10 बच्चाें का चयन हुअा है। इसके अलावा सेंट जेवियर्स इंटरनेशनल स्कूल अाैर मांट फाेर्ट एकेडमी ने भी अपनी रिपाेर्ट भेज दी है। इस तरह 37 स्कूलाें ने रिपाेर्ट नहीं दी। इस पर डीएसई ने कहा कि संबंधित प्राचार्य अाैर पर्यवेक्षक से अविलंब रिपाेर्ट तलब की जाएगी।
काेटि के अभिभावकाें काे यूकेजी में दाखिले लेने के लिए बाध्य किया जा रहा है। स्कूलाें का मकसद अारटीई के तहत बीपीएल काेटि के बच्चाें के नामांकन से बचना है। मामले में कार्रवाई हाे। इधर, डीएसई इंद्रभूषण सिंह ने भी बताया कि निजी स्कूल प्रबंधन सामर्थ्य संख्या छुपा रहे हैं। स्कूलाें से प्रवेश कक्षा की सामर्थ्य संख्या मांगी गर्इ थी, जाे अधिकांश स्कूलाें ने नहीं दिया है। सनद हाे कि निजी स्कूलाें में नामांकित बच्चाें की संख्या हजाराें में है, जबकि वे अपनी प्रवेश कक्षा की कुल सामर्थ्य संख्या 30-80 तक बताते हैं। दरअसल स्कूलाें में ऊपर की कक्षाअाें में भी अधिक बच्चे नामांकित हाेते हैं।