पितृ पक्ष पर लोगों ने अपने पूर्वजाें के नाम तर्पण किया

Dhanbad News - भादाे पूर्णिमा के साथ ही शुक्रवार काे पितृपक्ष शुरू हाे गया। पितराें के तर्पण के लिए 15 दिन विशेष हाेगा। पितृ पक्ष...

Bhaskar News Network

Sep 14, 2019, 06:40 AM IST
Dhanbad News - on the ancestral side people surrendered to their ancestors
भादाे पूर्णिमा के साथ ही शुक्रवार काे पितृपक्ष शुरू हाे गया। पितराें के तर्पण के लिए 15 दिन विशेष हाेगा। पितृ पक्ष में नदी अाैर तालाब में पवित्र हाेकर पूर्वजाें के नाम तर्पण की परंपरा है। पितृ पक्ष में दामाेदर नदी, बराकर सहित अन्य नदी अाैर तालाबाें में बड़ी संख्या में लाेग तर्पण करते हैं। जिस तिथि काे पितराें की मृत्यु हुई है, उस तिथि काे लाेग तर्पण करते हैं। पंडित सुधीर पाठक का कहना है कि शनिवार सुबह 8:14 बजे तक पूर्णिमा अाैर इसके बाद अाश्विन प्रतिपदा शुरू हाे जाएगी। उनका कहना है कि हिंदू परंपरा में पितराें के तर्पण अाैर श्राद्ध कर्म के लिए पितृ पक्ष का विशेष महत्व है। मनुष्य योनि में देव, ऋषि तथा पितृ ऋण महत्वपूर्ण माने गए हैं। एेसी मान्यता है कि इस पितृ पक्ष में पितर अार्थात पूर्वज पृथ्वी लाेक पर अाते हैं। प्रतिपदा से लेकर अमावस्या तक विभिन्न तिथि के अनुसार पितराें के तर्पण की जाती है। जिन लाेगाें के पूर्वजाें की मृत्यु की तिथि का ज्ञान नहीं है, वे अमावस्या तिथि काे श्राद्ध कर्म अाैर तर्पण करने परंपरा है। इस बार पंचमी श्राद्ध कर्म 19, एकादशी श्राद्ध कर्म 25 काे, मघा श्राद्ध 26 तथा सर्वपितृ अमावस्या 28 काे पड़ रही है।

पितराें की शांति के लिए तर्पण जरूर करें

पंडिताें का कहना है कि पितृ पक्ष में पूरे विधिविधान से पितराें के तर्पण से पूर्वजाें काे शांति मिलती है। शास्त्राें में वर्णन है कि पितृ पक्ष पर घर के पूर्वज एक लाेटा जल के लिए अास लगाए रहते हैं। पितृ पक्ष पर पितराें की विधिविधान से पूजा-अर्चना अाैर तर्पण से पूर्वज प्रसन्न हाेते हैं। वंश की वृद्धि अाैर सुख-समृद्धि में हमेशा पूर्वजाें का अाशीर्वाद बना रहता है। पितराें की पूजा-अर्चना से भगवान भी प्रसन्न हाेते हैं।

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