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पीएमसीएच में कमियां जस की तस इस बार भी नहीं मिलेंगी 100 सीटें

एक वर्ष पहले
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पीएमसीएच को इस बार भी 100 सीट मिलने की उम्मीद नहीं दिखती। अस्पताल प्रबंधन 2016 से लगातार एमबीबीएस की 100 सीट हासिल करने में जुटा है, लेकिन सत्र 2020-21 में भी सीटें बढ़ने की आशा नहीं है। पीएमसीएच प्रबंधन मान चुका है कि एमसीअाई द्वारा चिह्नित कमियां दूर नहीं हुई हैं। इसके बावजूद प्रबंधन की अाेर से एमसीअाई काे कम्प्लाइंस रिपाेर्ट के साथ विजिट के लिए निर्धारित शुल्क भेज दिया गया है। वहीं सूत्र बताते हैं कि एमसीअाई ने भी कमियां दूर किए बगैर निरीक्षण करने से इनकार कर दिया है। एेसे में सीटें बढ़ पाएंगी, इसकी संभावना कम ही है। यदि एमबीबीएस की सीटाें में इजाफा नहीं हाेता है ताे 12 विषयाें में पीजी की पढ़ाई शुरू करने की अनुमति भी एमसीअाई से नहीं मिलेगी।

सीटें नहीं बढ़ने पर 12 विषयों में पीजी की पढ़ाई शुरू करने की तैयारी पर भी फिरेगा पानी

फैकल्टी नियुक्ति की प्रक्रिया अधूरी

पीएमसीएच में एमबीबीएस की सीटें नहीं बढ़ने में सबसे बड़ी बाधा शिक्षकाें की कमी है। इससे पूर्व निरीक्षण के बाद एमसीअाई टीम की अाेर से दी गई रिपाेर्ट के अनुसार फैकल्टी की कमी 33 फीसदी व सीनियर रेजीडेंट की कमी लगभग 40 प्रतिशत बताई गई थी। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग झारखंड सरकार ने फैकल्टी की नियुक्ति की प्रक्रिया प्रारंभ की, लेकिन प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हुई। वहीं एसअार डाॅक्टराें की नियुक्ति प्रक्रिया ताे पूरी हाे गई लेकिन अधिकतर पद खाली रह गए अाैर कमी जस के तस बनी हुई है।

अन्य क्या कमियां, क्या स्थिति

{सेंट्रल रिसर्च लेबाेरेट्री : मेडिकल काॅलेज में पढ़ने वाले छात्राें के लिए सेंट्रल रिसर्च लेबाेरेट्री बनकर तैयार है। तकनीकी कारणाें से चालू नहीं हाे पाई है।

{मेडिकल गैस पाइपलाइन : मेडिकल गैस पाइपलाइन का काम शुरू हुअा है। जानकारी के अनुसार याेजना काे पूरा करने के लिए संबंधित एजेंसी काे छह माह का वक्त दिया गया है।

{वेंटिलेटर व डेफ्रिबिलेटर : अस्पताल के पेडियाट्रिक्स विभाग में वेंटिलेटर व डेफ्रिबिलेटर की खरीदारी हुई है लेकिन चालू नहीं हुअा है।

{लेक्चर थियेटर : अस्पताल में 150 सीट का लेक्चर थियेटर की कमी दूर नहीं हुई है। इसके लिए प्रबंधन के समक्ष कई बाधाएं भी हैं।

एमसीअाई की अाेर से कम्प्लाइंस रिपोर्ट मांगी गई थी। फिलहाल जाे वस्तुस्थिति है, उससे अवगत करा दिया गया है। सबसे बड़ी बाधा फैकल्टी है। फैकल्टी की कमी जस की तस है।”
डाॅ शैलेंद्र कुमार, प्राचार्य, पीएमसीएच
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