निगम में हाेल्डिंग टैक्स की वसूली एजेंसी के हवाले हाेगी
नगर निगम में हाेल्डिंग टैक्स वसूली का काम एक बार फिर से किसी एजेंसी के हवाले हाेगी। नगर विकास विभाग के निर्देश पर यह व्यवस्था बदलने जा रही है। अभी निगम अपने स्तर से हाेलडिंग टैक्स की वसूली कर रहा है। इसके लिए निगम ने दैनिक वेतन पर टैक्स कलेक्टर व वार्ड स्वयं सेवकाें काे बहाल भी किया है। पिछले दाे साल से इसी व्यवस्था के तहत टैक्स की वसूली की जा रही थी, लेकिन लक्ष्य से कम वसूली काे देखते हुए विभाग ने टैक्स वसूली का जिम्मा किसी एजेंसी काे साैपने का निर्णय लिया है। सूत्राें की मानें ताे फिलहाल केवल धनबाद नगर निगम में ही स्थानीय स्तर पर टैक्स की वसूली की जा रही है। जबकि राज्य के सभी निकायाें में टैक्स वसूली का काम काेई न काेई एजेंसी ही कर रही है। हालांकि निगम के अफसराें का कहना है कि अभी तक विभागीय स्तर पर काेई पत्र नहीं मिला है। पत्र अाने के बाद इस पर विचार किया जाएगा।
हाेल्डिंग टैक्स का 2.88 लाख का चेक बाउंस, नगर आयुक्त ने दिया अल्टीमेटम
सिटी रिपाेर्टर | धनबाद
नगर निगम के टैक्स कलेक्टराें व वार्ड स्वयं सेवकाें द्वारा हाेल्डिंग टैक्स के एवज में मिलने वाला चेक भी बाउंस हाेने लगा है। पिछले 15 दिन में 12 टैक्स कलेक्टरों द्वारा निगम के राजस्व शाखा में जमा किए गए कुल 2 लाख, 88 हजार रुपए का चेक बाउंस हाे गया। नगर अायुक्त चंद्रमाेहन कश्यप ने इसे गंभीरता से लेते हुए सभी टैक्स कलेक्टराें व वार्ड स्वयं सेवकाें काे बाउंस चेक के बदले नगद राशि जमा कराने के लिए दाे दिनाें का अल्टीमेटम दिया है। टैक्स भुगतान नहीं हाेने की स्थिति में सभी का वेतन भुगतान बंद करने की चेतावनी दी गई है। बताया जा रहा है कि 12 टैक्स कलेक्टराें द्वारा 15 दिनाें के अंदर अलग-अलग लाेगाें से हाेल्डिंग टैक्स के एवज में चेक लिया गया है। टैक्स कलेक्टर महादेव कुमार ने यूकाे बैंक का 5590 एवं 740 रुपए का चेक लिया था। टैक्स कलेक्टर सहजादा ने दाे लाेगाें से क्रमश: 5209 एवं 5151 रुपए का चेक लिया था। दाेनाें चेक एसबीअाई के थे। टैक्स कलेक्टर दिनेश राय ने 6716 का चेक पीएनबी का व टैक्स कलेक्टर अाकाश साेनी ने 3793 का एसबीअाई का चेक जमा किए थे। वहीं, पंकज कुमार रजक एसबीअाई का 4848 रुपए का चेक, प्रियांशु सिंह एवं प्रीतम कुमार ने कर्नाटका बैंक से 75142 व 174332 का चेक दिया था। ये सारे चेक बाउंस हो गए।
पहले एजेंसी वसूलती थी टैक्स
दाे साल पहले टैक्स वसूली एजेंसी के ही जिम्मे थी। रितिका कंपनी काे यह जिम्मेवारी दी गई थी। वर्ष 2015 में कंपनी ने टैक्स वसूली का काम शुरू किया था। वर्ष 2017 तक कंपनी ने टैक्स वसूलने का काम किया, लेकिन उसके बाद कंपनी काे हटा दिया गया। कंपनी काे हटाए जाने के बाद टैक्स वसूली निगम अपने स्तर से करने लगा। चालू वित्तीय वर्ष में निगम की वसूली मात्र 37 फीसदी ही रही। कम वसूली पर नगर विकास सचिव ने नाराजगी भी प्रकट की है। 26 फरवरी काे विभागीय समीक्षा बैठक में भी यह मामला उठा था अाैर उसी दिन टैक्स वसूली किसी एजेंसी से कराने का निर्णय लिया गया था।
टैक्स कलेक्टरों को बाउंस चेक के बदले लानी होगी नगदी